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पेराफेरी के गांव शामिल हो निगम में, विकास और स्वच्छता में भी हो आगे

निगम को दी जाए सम्पूर्ण जिम्मेदारी, स्वच्छ भारत मिशन के समन्वयक गुप्ता ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र, राजस्थान पत्रिका का अभियान निगम मांगें विस्तार, सुविधाओं की दरकार

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भुवाणा क्षेत्र में कचरे का ढेर

उदयपुर. शहर से सटी ग्राम पंचायतों और बस्तियों को नगर निगम सीमा में शामिल करने की मांग को लेकर राजस्थान पत्रिका की ओर से चलाए गए अभियान निगम मांगें विस्तार, सुविधाओं की दरकार में अब जनमानस जुडऩे लगा है। पंचायतों के लोगों के अलावा जनप्रतिनिधि भी इसकी मांग कर रहे हैं। गुरुवार को राजस्थान सरकार के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) प्रदेश समन्वयक के.के. गुप्ता ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को इस संबंध में पत्र लिख मांग की है। उन्होंने कहा कि देश दुनिया में पर्यटन के लिए प्रसिद्ध राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर के पर्यटन और सर्वांगीण विकास के लिए उदयपुर शहर से लगी ग्राम पंचायतों और बस्तियों को उदयपुर नगर निगम में शामिल कर उनके विकास की सम्पूर्ण जिम्मेदारी निगम को ही दी जानी चाहिए। अभी यूडीए इन पंचायतों में भूखंड बेचकर मोटी कमाई कर रहा है, लेकिन विकास के नाम पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गुप्ता ने बताया कि देश-दुनिया से रोजाना हज़ारों पर्यटक उदयपुर में भ्रमण के लिए आते हैं, लेकिन नगर और आसपास की बस्तियों की सडक़ों पर फैली गन्दगी को देखकर निराश और मायूस होते हैं। इससे न केवल नगर के पर्यटन पर प्रतिकूल असर पड़ता है, बल्कि छवि भी धूमिल होती है।

विकास शुल्क लेने के बावजूद निगम पंचायतों पर नहीं देता ध्यान

बताया कि उदयपुर नगर की आबादी निरन्तर बढ़ती जा रही, लेकिन निगम के क्षेत्राधिकार में अभी भी नगर के आसपास के क्षेत्र और बस्तियां जिसमें भुवाणा के आंशिक हिस्सों के अलावा बड़गांव, तितरडी, बेदला, बेदला खुर्द, शोभागपुरा, मनवा खेड़ा, सविना खेड़ा, सीसारमा, कानपुर, देबारी, रेबारियों का गुड़ा, कलड़वास, बेडवास, बलीचा, सुखेर, धोलीमगरी, रूप नगर, एकलिंगपुरा, बुझड़ा, रकमपुरा, सापेटिया, देवली, हवाला कला, हवाला खुर्द, जोगी तालाब, सेठ जी की कुंडल आदि नगर निगम में शामिल नहीं है, जिससे नगर निगम इन इलाक़ों में विकास के कार्य नहीं करवा पा रही है। जबकि निगम क्षेत्र के आस पास की बस्तियों में उदयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा विकास शुल्क लेकर निर्माण कार्य करवाए गए हैं, वहीं बड़ी-बड़ी कॉलोनियां काटने से विकास प्राधिकरण उदयपुर के पास भारी राशि जमा हुई है। इसके बावजूद इन कॉलोनियों के नगर निगम को हस्तांतरित नहीं होने से इन बस्तियों में रहने वाले निवासियों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।

पेराफेरी के गांवों में गंदगी का अंबार

गुप्ता ने बताया कि दुर्भाग्य से उदयपुर की पेरीफेरी पर बसी इन बस्तियाें में गंदगी का अंबार है। यहां की सडक़ें टूटी हैं, तथा कई अंधेरे में डूबी है। कचरा उठाने के नाम से खानापूर्ति हो रही है। चारों ओर प्लास्टिक फैल रहा है। खाली भूखंड में गंदगी और जीव-जंतु होने से बीमारियां फैल रही हैं। सड़कों पर आवारा पशु घूम रहे हैं तथा शहर के आस पास के क्षेत्रों के तालाब, कुएं एवं बावड़ियां गंदगी से अटी पड़ी है। उनकी साफ-सफाई एवं सुदृढीकरण का काम भी नहीं हो रहा है ।

मुख्यमंत्री से ये मांग रखी

- जो कॉलोनियां उदयपुर शहर से लगी हुई हैं और उदयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ने उनसे राशि प्राप्त कर अपने पास जमा की है, उस राशि को निगम को हस्तान्तरित की जाए।

- पंचायतों में खाली पड़ी भूमि को भी निगम को हस्तान्तरण किया जाए, ताकि विकास हो सके।

- निगम नई कॉलानियों में रहने वाले निवासियों को स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, शुद्ध पर्यावरण एवं सडक़ आदि आवश्यक सुविधाएं स्थायी रूप से उपलब्ध करवा सके।