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राजस्थान के इन उत्पादों को जीआई टैग मिले तो देश दुनिया में छा जाएं

We Need GI Tag For These Iteams : दुनियाभर में कसूरी मैथी हर रसोई की जरूरत है और इसका उत्पादन सिर्फ नागौर जिले में होता है। केसरिया ग्रीन मार्बल की उदयपुर तो कोटा स्टोन की खदानें सिर्फ कोटा में हैं। श्रीगंगानगर के किन्नू देश-विदेश में मशहूर हैं और पिछवाई कला के लिए नाथद्वारा जाना जाता है। इसके बावजूद इन सभी उत्पादों को जीआई टैग (GI Tag) हासिल नहीं है।

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राजसमंद जिले के नाथद्वारा में पिछवाई कलाकृति बनाते कलाकार

रुद्रेश शर्मा / मधुलिका सिंह

उदयपुर. प्रदेश के विभिन्न जिलों में डेढ़ दर्जन से अधिक ऐसे उत्पाद व कलाओं को जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिले तो यह प्रदेश के आर्थिक विकास को गति दे सकते हैं। इनमें ऐसी कई वस्तुएं हैं, जिनकी ख्याति राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैली है। अलवर का कलाकंद देश-विदेश में पसंद किया जाता है।

दुनियाभर में कसूरी मैथी हर रसोई की जरूरत है और इसका उत्पादन सिर्फ नागौर जिले में होता है। केसरिया ग्रीन मार्बल की उदयपुर तो कोटा स्टोन की खदानें सिर्फ कोटा में हैं। श्रीगंगानगर के किन्नू देश-विदेश में मशहूर हैं और पिछवाई कला के लिए नाथद्वारा जाना जाता है। इसके बावजूद इन सभी उत्पादों को जीआई टैग हासिल नहीं है। यदि सरकार इन वस्तुओं को जीआई टैग दिलवाने में कामयाब होती है, तो यह सभी उत्पाद प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय ख्याती और आर्थिक उन्नति में चार चांद लगा सकते हैं।

राजस्थान में इन्हें चाहिए जीआई टैग

उदयपुर- केसरिया ग्रीन मार्बल, काष्ठ कला, मिनिएचर आर्ट, जल सांझी

राजसमंद- नाथद्वारा की पिछवाई कला

नागौर- कसूरी मैथी (नागौरी पान मैथी), हैण्ड टूल्स

कोटा- कोटा स्टोन

सवाईमाधोपुर- अमरूद व हैण्डीक्रॉफ्ट

श्रीगंगानगर जिला- देशी कपास किस्म आरजी-8, गंगानगरी किन्नू, गेहूं की किस्म- 1482

अलवर- कलाकंद

अजमेर- किशनगढ़ की प्रसिद्ध बणी-ठणी चित्रकारी

पाली- गुलाब हलवा

भीलवाड़ा- फड़ चित्रण

बूंदी- बूंदी शैली चित्रकला


जानिए क्यों जरूरी है जीआई टैग?

जीआई यानि भौगोलिक संकेतक। जीआई टैग मुख्य रूप से कृषि, प्राकृतिक, निर्मित उत्पाद, हस्तशिल्प और औद्योगिक सामान जो एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होता है, उसकी पहचान है। यह उस उत्पाद को दिया जाता है, जो विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से निर्मित या उत्पादित किया जा रहा है। भारत सरकार के डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड की ओर से एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत जीआई ट्रेड के लिए पंजीकरण किया जाता है। इन्हें इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया का घटक माना जाता है। इससे संबंधित उत्पाद अथवा हस्तशिल्प कला की वैश्विक पहचान बन जाती है। उनकी इंटरनेशनल ट्रेडिंग के अवसर बढ़ जाते हैं। वैश्विक स्तर पर उनकी ब्रांडिंग में मदद मिलती है।

प्रदेश की इन चीजों को हासिल है जीआई टैग

हस्तशिल्प

बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग (हस्तशिल्प)

जयपुर की ब्लू पॉटरी (हस्तशिल्प)

जयपुर की ब्लू पॉटरी (लोगो)

राजस्थान की कठपुतली (हस्तशिल्प)

प्रमोटेड कंटेंट

राजस्थान की कठपुतली (लोगो)

कोटा डोरिया (लोगो) (हस्तशिल्प)

मोलेला मिट्टी का काम (हस्तशिल्प)

फुलकारी (हस्तशिल्प)

पोकरण मिट्टी के बर्तन (हस्तशिल्प)

सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग (हस्तशिल्प)

थेवा आर्ट वर्क (हस्तशिल्प)

अन्य सामग्री

बीकानेरी भुजिया (खाद्य सामग्री)

मकराना मार्बल (प्राकृतिक सामान)

सोजत मेहंदी


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