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बारूद की गंध पहचानकर सबको शिकारी से सचेत कर देता है ये पक्षी

पक्षी का नाम - ग्रे लेग गूज (हंस), वैज्ञानिक नाम - एंसर एसेर, प्रजाति - एंसर, परिवार- अनाटिडी, कहां से आता - सेंट्रल एशिया, यूरोप और ठंडे प्रदेशों से।

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बारूद की गंध पहचानकर सबको शिकारी से सचेत कर देता है ये पक्षी

बारूद की गंध पहचानकर सबको शिकारी से सचेत कर देता है ये पक्षी

मेनार . सात समंदर पार से बर्ड विलेज में आने वाले प्रवासी पक्षियों में बहुत ही सुन्दर पक्षी है ग्रे लेग गूज। ये हर साल हजारों किलोमीटर का सफर तय कर मेनार के जलाशयों में सर्द ऋतु के चार माह बिताने आता है। पिछले कुछ समय से कई जगहों पर ग्रे लेग गूज पक्षी का शिकार अधिक होने लगा है, जिससे इसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।

विशेषता
पक्षी मित्र दर्शन मेनारिया ने बताया कि ग्रे लेग गूज गोल व भारी शरीर वाली बड़ी बतख है। इसकी चोंच व पैरों का रंग सुर्ख गुलाबी तथा पूछ का रंग सफेद व काला होता है। इसका शरीर सलेटी रंग का होता है और इसके परों में काली रेखाएं होती है। स्थानीय भाषा में इसे 'आड़Ó कहा जाता है। यह अक्सर समूह मेंं रहता है और विशेष प्रकार की आवाज करते हुए जल क्रीड़ा करता है। एक साथ उड़ते हुए ग्रे लेग गूज की उड़ान बड़ी आकर्षक होती है। मेनार में 100 के करीब ग्रे लेग गुज आए हुए हैं।

पक्षीविद् विनय दवे के अनुसार ग्रे लेग गूज बहुत ही सुंदर एव चौकन्ना पक्षी है, जो हंस कुल का है। ये पक्षी शिकारी के साथ बारूद की गंध को पहचान लेता है और तेज आवाज कर सबको सचेत कर उड़ जाता है। इसके चोंच के किनारों पर बड़े दांत जैसी आकृति होती है, जिसे इन्हें घास खाने में सहायता मिलती है। ये अप्रदूषित जलाशय एव जिसमें खतरा कम हो उसी में आश्रय लेती है। ये अधिकतर निशाचर है, जो रात को भोजन कर सुबह झीलों में आ जाती है। ये करीब छ: हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर प्रवास के लिए सर्दी में यहां आते हैं। आजकल हंस की प्रजातियां बहुत ही कम हो गई, है, वहीं ग्रे लेग गूज हंस से मिलती जुलती प्रजाति होने के कारण अब लोग इसे हंस मानने लगे हैं। ये बहुत जोर से आवाज करता है। जल में काई के साथ यह तालाब के आसपास या खेतों से घास की पत्तियां खाता है। अलसुबह जब यह खेतों के आसपास घास पत्तियां खाने समूह में जाता है तो तेज आवाज करता है। कभी-कभी बढ़ती फसलों पर विशेष रूप से अंधेरे में भोजन करता है।