
मोहम्मद इलियास/उदयपुर
केन्द्र सरकार के नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से शहर में लगाई गई प्योर स्कीस मशीन ने महज तीन माह में ही कोर्ट चौराहे व उसके आसपास एक किलोमीटर क्षेत्र में 40 फीसदी वायु प्रदूषण कम कर दिया। आईआईटी कानपुर से एप्रूव दुनिया की सबसे एडंवास यह मशीन सरकारी क्षेत्र में देश में सिर्फ लखनऊ व राजस्थान के लेकसिटी उदयपुर में लगी हुई है।
इस मशीन के सकारात्मक परिणाम की रिपोर्ट को टीम ने जिला कलक्टर व नगर निगम आयुक्त को उपलब्ध करवाया है। करीब 3.50 करोड़ की कीमत की इस मशीन को क्रय करने को लेकर निगम तथ्य जुटा रहा है। इसके अलावा निगम ने तीन तरह की एंटी स्मॉग गन खरीद के लिए टेंडर निकाल दिए हैं। जो वायु प्रदूषण को रोकेगी, साथ ही पेड़ पौधों को पानी देकर व उन पर जमी धूल को हटाएगी।
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यूं काम करती है प्योर स्कीस मशीन
विशेषज्ञों ने बताया कि स्मॉग गन हवा में पानी का छिडक़ाव करती है, इससे धूल मिट्टी एक बार बैठ जाती है, लेकिन पानी सूखते ही वापस हवा में आ जाती है। जबकि प्योर स्कीस मशीन हवा में अपशिष्ट को वेेग के साथ पकड़़ती है, जिसे वापस ऊपर नहीं आने देती। इस मशीन को उदयपुर में 11 दिसम्बर को कोर्ट चौराहे पर खान विभाग परिसर में लगाया गया था। तीन माह में इसने 40 फीसदी प्रदूषण को कम किया है।
केन्द्र सरकार का चल रहा प्रोजेक्ट
केन्द्र सरकार ने देशभर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए 300 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) शुरु किया है। इस कार्यक्रम में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए पहले उन स्मार्ट शहरों को शामिल किया है, जहां वायु प्रदूषण ज्यादा है। इसके तहत वर्ष 2017 को आधार वर्ष मानते हुए वायु में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 पार्टिकल्स को 20 से 30 फीसदी कम करने का अनुमानित लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उदयपुर सहित सभी शहरों को प्रदूषण के आधार कार्ययोजना विकसित करने के लिए कहा है। इसी के तहत निगम यहां एंटी स्मॉग गन सहित कई महत्वपूर्ण मशीनों की खरीद के लिए टेंडर कॉल कर रहा है।
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पानी की बूंदों को हवा में फेंकता है एंटी स्मॉग गन
एंटी स्मॉग गन को स्प्रे गन, धुंध गन या वाटर कैनन भी कहा जाता है। यह आसमान में फैले धुंध के कणों को हटाने का काम करती है। इसका उन जगहों पर प्रयोग किया जाता है, जहां प्रदूषण खतरनाक स्तर पर होता है। एंटी स्मॉग गन एक तरह से एक मशीन है, जो नेबुलाइज्ड पानी की बारीक बूंदों का हवा में छिडक़ाव करती है। इसे पानी के टैंक से जोड़ा जाता है और हाईप्रेशर प्रोपेलर के जरिए 50 से 100 माइक्रोन की छोटी बूंदों को हवा में फेंका जाता है। इससे धूल और प्रदूषण के कण अवशोषित होने लगते हैं।
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ऐसेे काम करती है एंटी स्मॉग गन
स्मॉग गन में हाई स्पीड पंखा लगा होता है। मशीनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इन्हें ऑन करने के बाद पंखे की मदद से पानी की बौछार हवा में की जाती है। हवा में फैले प्रदूषण के कणों को पानी की बौछार से जमीन पर लाया जाता है। इन मशीनों से 2.5 माइक्रोन तक के खतरनाक कणों को भी कम किया जा सकता है। यह मशीनें करीब 150 फीट की ऊंचाई से लेकर 100 मीटर लंबाई तक पानी की बौछार कर प्रदूषण को कम कर सकती हैं।
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पेड़ पौधों पर जमी धूल भी हटाती है
एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल खनन, ग्राइंडिंग, कोयला और पत्थरों की घिसाई के दौरान उडऩे वाली धूल को कंट्रोल करने के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा यह पेड़ पौधों को पानी पिलाने व 10 मीटर की ऊंचाई तक के पौधों पर जमी धूल मिट्टी को भी हटाने में उपयोगी होगी।
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तीन तरीके की एंटी स्मॉग गन के टेेंडर निकाल दिए हैं। यह मशीनें शीघ्र ही खरीदी जाएगी। इसके अलावा प्योर स्कीस मशीन के रिजल्ट काफी अच्छे आए हैं, लेकिन इसके बारे में पूरी पड़ताल की जा रही है। सब कुछ ठीक रहा तो इसे भी शीघ्र ही खरीदा जाएगा।
मुकेश पुजारी, अधीक्षण अभियंता, नगर निगम उदयपुर
Published on:
09 Apr 2023 10:20 pm
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