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जगह-जगह बिक रही तम्बाकू, लाइसेंसिंग प्रणाली अभी लागू नहीं हुई

डीएलबी ने नगर निगम को स्मरण पत्र के जरिए फिर कहा लाइसेंस

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भारत में तम्बाकू सेवन के मामले में पश्चिम बंगाल के पुरुष एवं महिलाएं सबसे आगे

भारत में तम्बाकू सेवन के मामले में पश्चिम बंगाल के पुरुष एवं महिलाएं सबसे आगे

उदयपुर. तम्बाकू विक्रेताओं को लाइसेंसिंग प्रणाली में बांधने के लिए राज्य सरकार ने नगर निकायों को गाइड लाइन जारी की है लेकिन उदयपुर के नगर निगम और जिले की नगर पालिकाओं में अभी तक लाइसेंस देने का काम नहीं हुआ। जिस मकसद से सरकार ने यह निर्देश दिए वह भी पूरा नहीं हो रहा है। यह व्यवस्था लागू होती है तो निकायों की जेब में भी दो पैसा आएगा और उनके राजस्व संग्रहण में एक नया विकल्प जुड़ेगा।
शैक्षणिक संस्थाओं, स्वास्थ्य केन्द्रों तथा मॉल इत्यादि जहां बच्चों तथा युवाओं का अधिक आना-जाना होता है वहां चल-दुकान (साईकल , मोटर साइकल पर) लगा कर तम्बाकू का विक्रय किया जाता है जिससे इसकी खपत भी बढ़ती है और रास्तों पर अतिक्रमण भी होता है। जगह-जगह तम्बाकू मिलने से इसका सेवन बच्चों से लेकर युवा पीढ़ी में बढ़ रहा है और अगर लाइसेंस प्रणाली लागू होती है तो जगह-जगह तम्बाकू बेचने वालों की तादाद नियंत्रित होगी। उदयपुर नगर निगम के अलावा भींडर, कानोड़, सलूंबर व फतहनगर नगर पालिका में भी यह व्यवस्था लागू नहीं की गई।

लाइसेंसिंग प्रणाली के आदेश 2018 में दिए थे

असल में बच्चों तथा युवाओं को तंबाकू की आदत से बचाने के लिए पहली बार राज्य सरकार ने जनवरी 2018 में नगर निकायों को तंबाकू विक्रेताओं के लिए एक लाइसेंसिंग प्रणाली विकसित कर ऐसे पदार्थों की बिक्री को नियंत्रित करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद से अब तक इसकी पालना में अनावश्यक रूप से देरी हो रही है और निकायों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। डीएलबी ने फिर से निकायों को स्मरण पत्र भेजकर इस पर काम करने को कहा।

निगम को लाभ ही होगा
डीएलबी ने आदेश में कहा कि सभी नगर निकायों को तंबाकू विक्रेताओं के प्राधिकरण के माध्यम से तंबाकू की बिक्री का विनियमन करना आवश्यक है। तंबाकू विक्रेता लाइसेंस प्रणाली लागू होते ही नगर निगम को करोड़ों रुपए का राजस्व मिलेगा।

तम्बाकू कैंसर का मुख्य कारण
जानकारों के अनुसार तम्बाकू में 72 से अधिक हानिकारक तत्व होते हैं जो मानव शरीर के 12 प्रमुख अंगों में कैंसर का कारण बन सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि तम्बाकू मृत्यु के सबसे बड़े रोके जा सकने वाले कारणों में से एक है। वर्तमान और भावी पीढिय़ों को इस विनाशकारी स्वास्थ्य प्रदायक तंबाकू के सेवन से बचाने की आवश्यकता है। यदि शराब एवं मादक पदार्थ बेचने के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता है, तो तंबाकू के लिए भी जरूरी है।