
मुकेश हिंगड़
कोटड़ा को बदलने के लिए कदम आगे बढ़ रहे हैं। योजनाओं का फायदा जन-जन तक पहुंचे, इसकी कवायद उदयपुर से जयपुर तक हो रही है। मिशन कोटड़ा के तहत कोटड़ा को बदलने की कवायद पर जिला प्रशासन ने भी रोड मेप बनाया है। इस समय की जरूरत कोटड़ा का विकास नक्शा सबसे पहले बदलना होगा। वहां की तस्वीर बदलने लगी है लेकिन अब योजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए धन देकर योजनाओं को खाका साकार करने पर काम होना चाहिए। प्रकृति व विरासत को सुरक्षित रखते हुए कोटड़ा के शहरी विकास के तहत सेटेलाइट टाउन के लिए वहां उन सभी सुविधाओं पर फोकस करना होगा। ऐसा सब कुछ होगा तो सरकारी सेवा में जिनको भी वहां पोस्टिंग दी जाए तो वे वहां रहते हुए अच्छे से करने का मन बनाएंगे तो परिणाम भी उसके अच्छे मिलेंगे। कोटड़ा गुजरात-राजस्थान सीमा पर है ऐसे में वहां के विकास का फायदा कोटड़ा के साथ-साथ उदयपुर को भी होगा।
कोटड़ा में सबसे पहले इन पर काम करना होगा
रोड नेटवर्क
कोटड़ा को कनेक्ट करने वाले प्रमुख स्थानों का जुड़ाव अच्छे रोड नेटवर्क से हो। इसमें सबसे अहम उदयपुर से कोटड़ा कनेक्शन तो सुगम व बेहतर होना ही चाहिए।
समाधान : देवला तक तो उदयपुर-पिंडवाड़ा हाइवे है। देवला से कोटड़ा तक 50 किमी की रोड पर डामर नहीं दिखेगा, सिर्फ खड्डे ही दिखेंगे। इस सडक़ से अफसर भी जाते है और दर्द उनको भी दिखता है। इनको सबसे पहले ठीक कर स्टेट हाइवे जैसी सडक़ बनाई जाए। अभी जिला सडक़ भी नहीं है। गुजरात रूट पर तो सडक़ें अच्छी है।
परिवहन सुविधाएं
कोटड़ा से उदयपुर तक सीधे परिवहन की सुविधाएं है और सुबह से रात तक। पिंडवाड़ा हाइवे जहां से कोटड़ा का रास्ता कटता है वहां से भी कुछ अंतराल में बस सुविधाएं हो। उदयपुर के लिए दोपहर तीन बजे बाद कोई साधन कोटड़ा से नहीं है। पिछले दिनों शुरू की पांच बसे अलग-अलग रूट से जाती है और वह दोपहर तक के लिए ही है। कोटड़ा से आबू रोड जाने वाली बस को भी बंद कर दिया गया है।
समाधान : उदयपुर के लिए सीधी बस सेवाएं शुरू की जाए। रोडवेज का अच्छा बस स्टैंड बनाया जाए। कोटड़ा से चारों दिशाओं में बसें शुरू की जाए। ऐसी सुविधाएं और माहौल दिया जाए कि रात में भी सफर किया जा सकता है। कोटड़ा से गुजरात के लिए तो हर पांच मिनट में वाहन मिल जाते है, ठीक उसी प्रकार उदयपुर के लिए भी ये कनेक्टिविटी हो।
सेटेलाइट हॉस्पिटल पूरे स्टाफ के साथ हो
कोटड़ा मुख्यालय पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए काम करना होगा। मरीजों को वहां ही बेहतर सुविधाएं मिलेगी तो वे 120 से ज्यादा किमी की दूर तय कर उदयपुर क्यों आएंगे।
समाधान : उदयपुर शहर के जो सेटेलाइट चिकित्सालय है उस तर्ज की तस्वीर कोटड़ा की हो। सडक़ दुर्घटनाओं के मरीजों व प्रसूताओं को गुजरात पर निर्भर रहना पड़ता है, सबसे पहले इस पर काम किया जाए। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द को सेटेलाइट चिकित्सालय में बदलने के साथ ही सुविधाएं, संसाधन व स्टाफ पूरा दिया जाए। ऐसा होगा तो गुजरात की राह नहीं पकडऩी होगी।
शिक्षा के मंदिरों की बदले तस्वीर
कोटड़ा में यूं तो शिक्षा के लिए स्कूल-कॉलेज खोल रखे है लेकिन जरूरत वहां शैक्षणिक गुणवत्ता पर काम करने से लेकर शिक्षा के मंदिरों में पर्याप्त गुरुजी की संख्या हो। स्कूलों की बिल्डिंग पुरानी है, जर्जर हो गई है।
समाधान : सरस्वती के मंदिरों की शक्ल ठीक किया जाए। उनको आधुनिक रूप दिया जाए। भवनों को ठीक करने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट जैसे स्मार्ट कोटड़ा स्कूल की योजना बनाई जाए। कक्षा-कक्षों के अभाव को दूर किया जाए। जहां स्टाफ की कमी है उनको पूरा भरा जाए।
उदयपुर आने वाला टूरिस्ट कोटड़ा भी जाए
कोटड़ा भी केरल से कम नहीं है। पाड़ाखादरा, साबरमती, कालीबोर बांध देखकर तो वास्तव में प्रकृति व पानी के बीच कोटड़ा का अलग ही स्वरूप दिखता है। जरूरत है इस क्षेत्र को पर्यटन रूप से भी विकसित करने की। गुजराती पर्यटक तो फुलवारी की नाल आते है लेकिन उदयपुर वाले नहीं पहुंचते है।
समाधान : जो भी जो प्राकृतिक वादियां है, बांध से लेकर जंगल है उनके वहां तक जाने की सीधी एप्रोच हो। उन स्थानों को विकसित किया जाए तथा सुरक्षा के माकूल प्रबंध हो। फुलवारी की नाल तक उदयपुर से जाना सुविधाजनक हो। ऐसा होगा तो उदयपुर से आबू जाने वाला पर्यटक फुलवारी की नाल जरूर जाएगा।
बाजार व ग्रोथ सेंटर
कोटड़ा का व्यक्ति रोजगार के लिए पलायन करता है। कोटड़ा में रहने वालों को मनरेगा के अलावा कोई रोजगार नहीं है। इसके अलावा कुछ जगह खेती करते है पर ज्यादातर गुजरात जाकर खेतों पर काम करते है।
समाधान : वहां पर अच्छे बाजार से लेकर ग्रौथ सेंटर विकसित किए जाएंगे तो जरूर कोटड़ा बदलेगा, रोजगार के अवसर मिलेंगे। कृषि मंडी से लेकर स्थानीय व्यापारियों को प्रोत्साहित किया जाए। आदिवासियों का उत्पाद दूर तक जाए इसके लिए पूरा नेटवर्क तैयार किया जाए। कृषि मंडी भी कोटड़ा से तीन किमी दूर बनाई जिसका उपयोग नहीं आ रहा है।
बिजली व संचार सर्विसेज
बिजली आपूर्ति सिरोही से होती है, आए दिन फॉल्ट हो जाता है। यहां 132 केवी की लाइन की सरकार ने घोषणा की है लेकिन अभी चारदीवारी ही बनी है। मोबाइल नेटवर्क है लेकिन कई गांव ऐसे है जहां पर न तो बिजली है न मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट तो दूर की बात है।
हकीकत : 132 केवी लाइन की घोषणा को कागजों से निकालकर धरातल पर लाने की जरूरत है, तेजी से काम हो, पूरी निगरानी की जाए। जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है उन गांवों को बीएसएनएल अपने नेटवर्क से तो जुड़े। कोटड़ा मुख्यालय इंटरनेट के मजबूत प्रयास हो।
प्यास भी बुझे कोटड़ा की
कोटड़ा को पूर्ति होने वाली ही पाइप लाइन है जो जोगीवड़ बांध से आती है। ये कनेक्शन भी कुछ है बाकी पूरे कोटड़ा के गांवों में तो नल है नहीं है। कुएं, हैडपंप व नदी-नाले से पानी लाते है।
समाधान : केन्द्र व राज्य की जल पहुंचाने की योजनाएं सबसे पहले समतल इलाकों में पहुंचाने के लिए सर्वे कर योजना में शामिल किया जाए। पहाड़ी इलाकों में पानी के लिए इंजीनियरों को विकल्प तलाशने चाहिए।
Published on:
06 Sept 2022 09:59 am

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