15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मेवाड़ में कई ‘वीरप्पन’, चंदन काटकर पहुंचा रहे दक्षिणी भारत, वहां चल रहा मिलावट का खेल

मेवाड़ में कई ‘वीरप्पन’, चंदन काटकर पहुंचा रहे दक्षिणी भारत, वहां चल रहा मिलावट का खेल

4 min read
Google source verification
मेवाड़ में कई ‘वीरप्पन’, चंदन काटकर पहुंचा रहे दक्षिणी भारत, वहां चल रहा मिलावट का खेल

मेवाड़ में कई ‘वीरप्पन’, चंदन काटकर पहुंचा रहे दक्षिणी भारत, वहां चल रहा मिलावट का खेल

मोहम्मद इलियास/उदयपुर
दक्षिण भारत के विख्यात चंदन में मिलावट का ‘खेल’ मेवाड़ के चंदन की आड़ में किया जा रहा है। यहां का चंदन घटिया व निम्न श्रेणी का होने के बावजूद तस्करी के लिए मेवाड़ में पेड़ों का ठेका लेते हुए इन पर दनादन आरियां चला दी गई। तस्करों ने सर्वाधिक राजसमंद व उदयपुर जिले में पेड़ों का खात्मा कर यहां से चंदन की खुशबू पूरी तरह गायब कर दी। इस खेल में पुलिस ने शातिर तस्करों को नामजद भी किया, लेकिन वे आज तक उनके गिरेबां तक नहीं पहुंच पाई। इधर, पेड़ों की रखवाली का दावा करने वाले वन विभाग के पास तस्करी व पेड़ों की गणना का कोई आंकड़ा नहीं है। कीमती लकड़ी होने के बावजूद विभाग ने उसे अवैध पेड़ों की कटाई में डाल रखा है, जबकि दक्षिणी भारत में यह पेड़ बहुमूल्य होने से वहां पेड़ों की गणना होती है।चंदन तस्करी का यह पूरा खेल चित्तौडगढ़़ के निकुंभखेड़ा, कलंदरखेड़ा व सादलखेड़ा के कई नामी तस्करों के हाथ में है। वे यहां के आदिवासियों को बतौर श्रमिकों के रूप में काम में लेते हुए उन्हें प्रति पेड़ कटाई का मेहनताना दे रहे हैं। विगत पांच वर्ष में संभाग की पुलिस ने चंदन तस्करी के 83 मुकदमे दर्जकर 136 मुल्जिम पकड़े, लेकिन बड़े तस्कर आज तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े। महज गुर्गे ही पकड़ में आए।
--
मेवाड़ से बिठाई गणित
कर्नाटक, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश, ओड़ीसा व केरलके कई इलाके की उच्च श्रेणी की चंदन की आबोहवा महकती है। वहां वृहद स्तर पर व्यापारिक उत्पादन होता है, जिसे देशभर में सप्लाई किया जाता है। उच्च गुणवत्ता वाले चंदन की सबसे निम्न श्रेणी के पेड़ मेवाड़ में हैं। तस्करों ने इसका फायदा उठाते हुए महानगरों में बैठे बड़े तस्करों से यहां चंदन पेड़ों का सौदा करना शुरू दिया। इसके चलते तस्करों ने मेवाड़-वागड़ क्षेत्र के वनों व निजी क्षेत्रों में उगाए गए चंदन पेड़ों का सफाया कर दिया। इस क्षेत्र में करीब अस्सी फीसदी चंदन साफ हो चुका है तथा बचे पेड़ों पर भी तस्करों की गिद्ध निगाहें हैं।
--
रात के अंधेरे में इलेक्ट्रॉनिक आरी से खेल
तस्कर अलग-अलग इलाकों में दिन में रैकी करते हुए पेड़ों को चिहिृत करते हैं। तने में वे फर्मा डालकर कच्चे पक्के माल का पता लगाते हैं। इसके बाद रात के अंधेरे में इलेक्ट्रॉनिक आरी चलाकर पेड़ को काटते हैं। पेड़ गिरने के बाद वे चंद मिनटों में तने में से मुख्य माल निकालकर पलभर में भाग निकलते हैं।
--
मेवाड़ से कर दिया चंदन का खात्मा
तस्कर चंदन के पेड़ों का लगातार सफाया कर मेवाड़ से इसकी खुशबू गायब करने पर आमादा हैं। बड़ी संख्या में चंदन के पेड़ अब तक कट चुके हंैं और शेष पेड़ों पर भी तस्करों की नजर है, और वे थोड़े- थोड़े अंतराल में मजदूरों की सहायता से लगातार वारदातें कर रहे हंंै। तस्करी का यह माल वृहद स्तर पर जयपुर, मालवा, गुजरात तक जा रहा है। अधिकांश माल सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री बनाने में काम में लिया जा रहा है।
--
हर बार बच निकले
उदयपुर पुलिस अब तक चंदन चोरी की कई बड़ी गैंग पकड़ चुकी है, लेकिन वारदात लगातार दिन- ब- दिन बढ़ती ही गई। पुलिस का कहना है कि पूर्व में पकड़ में आए चंदन तस्कर जेल से बाहर आ गए, और फिर सक्रिय हो गए। वन विभाग की ओर से नीलाम होने वाला सीलशुदा चंदन ये ही लोग खरीदते हैं। बाद में तस्करी करते हैं। पकड़ में आने पर लाइसेंसी चंदन बताकर बच निकलते हैं।
-
मालिक करने लगे पेड़ की सुरक्षा
तस्करों से चंदन पेड़ों को बचाने के लिए अब हालात यह हो गए कि मालिक खुद पेड़ों की सुरक्षा कर पूरे तने के चारों ओर पत्थर की कोट, करंट के वायर या लोहे का कवच लगाने लगे हैं।
---
अन्य राज्यों में जा रहा माल
पुलिस के मुताबिक माल के खरीदार उदयपुर शहर, चित्तौडगढ़़ के निकुंभ, कलंदरखेड़ा व सादलखेड़ा के शातिर तस्कर हैं। ये चोरी का माल दो हजार से बारह सौ रुपए प्रतिकिलो खरीदते हैंं। आगे यह माल मध्यप्रदेश, गुजरात व जयपुर के खरीदार को तीन से चार हजार रुपए प्रतिकिलो में दिया जाता है। अधिकांश माल परफ्यूम, अगरबत्ती व सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री तैयार करने में काम आता है।
...
मेवाड़ में यहां से सर्वाधिक किया माल साफ
हल्दीघाटी के वन क्षेत्र चंदन से महकते हुए चंदन वन के नाम से प्रसिद्ध था। यहां से लगातार चंदन पेड़ों की कटाई से वन विभाग ने यहां सुरक्षा के लिए चार दीवारी बनाई लेकिन गश्त के अभाव में चोर यहां से 70 फीसदी पेड़ काटकर ले गए। यहां वन विभाग ने पुलिस थाने में 35 से ज्यादा एफआईआर करवाई लेकिन इस पर लगाम नहीं लग पाई। इसी तरह देलवाड़ा व खमनोर से भी तस्कर आरियां चलाकर चंदन पेड़ काट ले गए। यहां थानों में मामले दर्ज होने के बावजूद चोर आज तक पकड़ में नहीं आए।
--
ऐसा उगता है चंदन
चंदन के पेड़ पार्शली पैरासिटिक यानी आंशिक परजीवी होने से इसके पौधे ढाई फीट तक बड़े नहीं हो तब तक दूसरे पेड़ पौधों पर यह निर्भर रहते हैं। इसके अलावा परिंदों की बीट से बीज पहुंचने से ही इसके पौधे उगते हैं। ये उगाए नहीं जाते। इसके चलते आदिवासी अंचल में इसके पेड़ कम है। यहां विभागीय नर्सरियों, कब्रिस्तानों, निजी फार्म हाउस, मार्बल एरिया और घरों के आसपास की छूटी जमीन पर ही चन्दन के पेड़ हैं, जिनकी गणना बहुत कम होती है।
--
यहां से सर्वाधिक हुई चोरियां
- उदयपुर जिला- गोगुन्दा, सायरा, नाई, शहर में कई निजी इलाकों से, सुखाडिय़ा युनिवर्सिटी कैम्पस, गुलाब बाग, जिला कलक्टर आवास व कई सरकारी महकमें
- राजसमंद - खमनोर, देलवाड़ा व हल्दीघाटी इसके अलावा चित्तौडगढ़़, डूंगरपुर व बांसवाड़ा का चंद इलाके
--
इतने वर्ष में कटे पेड़
5 वर्ष में 83 मामले, 136 गिरफ्तार, सजा महज - 3 प्रकरणों में


बड़ी खबरें

View All

उदयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग