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उदयपुर का रोडवेज बस स्टैंड, बना तब उत्तर भारत में था सर्वश्रेष्ठ

फ्लेशबैक: बस स्टैंड भवन ने पूरे किए 41 साल, 10 सितम्बर 1980 को हुआ था बस स्टैंड का उद्घाटन, आज भी जयपुर बस स्टैंड के बाद सबसे बड़ा भवन उदयपुर का

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उदयपुर का रोडवेज बस स्टैंड, बना तब उत्तर भारत में था सर्वश्रेष्ठ

उदयपुर का रोडवेज बस स्टैंड, बना तब उत्तर भारत में था सर्वश्रेष्ठ

उदयपुर. शहर के उदियापोल पर स्थित रोडवेज बस स्टैंड को बने 41 साल पूरे हो गए है। बस स्टैंड की नींव सन 1976 में रखी गई थी, वहीं 10 सितम्बर, 1980 को उद्घाटन किया गया। जब यह बस स्टैंड बना, उत्तर भारत का सर्वश्रेष्ठ बस स्टैंड माना गया था। कालांतर में कई बदलाव हुए और इससे भी श्रेष्ठ बस स्टैंड बिल्डिंग कई शहरों में बनी। हालांकि उदयपुर बस स्टैंड प्रदेश में आज भी बेहतर बस स्टैंड की श्रेणी में आता है।

राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के उदयपुर में बस स्टैंड की नींव 19 सितम्बर, 1976 को रखी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के हाथों शिलान्यास के दौरान तत्कालीन यातायात मंत्री रामनारायण चौधरी, रोडवेज निगम महाप्रबंधक इंद्रसिंह कावडिय़ा, अध्यक्ष मोहिंद्रसिंह मौजूद रहे थे। इसके ठीक चार साल बाद भवन का उद्घाटन 10 सितम्बर, 1980 को तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाडिय़ा ने किया था। उस समय यातायात मंत्री हनुमान प्रसाद प्रभाकर थे। उद्घाटन समारोह में महाप्रबंधक चंद्रप्रकाश, अध्यक्ष आरजे मजीठिया, व्यवस्थापक एसआर मेहता मौजूद थे। बस स्टैंड बिल्डिंग का निर्माण जयपुर की वीरेंद्र एंड कंपनी ने किया था।

आंकड़ों में जानें
1976 : में रखी गई थी बस स्टैंड की नींव

1980 : में बनकर तैयार हुआ बस स्टैंड
1.11 : लाख वर्गफीट क्षेत्र में का है परिसर

55 : हजार वर्गफीट में बनी है बस स्टैंड बिल्डिंग
50 : लाख में ही बनकर तैयार हुआ था बस स्टैंड
बस स्टैंड भवन की खास बातें

- महज चार साल में बनने वाली रोडवेज की एक मात्र बिल्डिंग
- बस स्टैंड बिल्डिंग के बीम में ही डाली गई थी ड्रेनेज लाइनें

- उदयपुर की तर्ज पर बांसवाड़ा और भीलवाड़ा में बने बस स्टैंड
- कॉन्ट्रेक्टर ने मॉडल के तौर पर लागत मूल्य में बनाई थी बिल्डिंग
सुखाडिय़ाजी ने चौराहे पर कर दी थी बस स्टैंड की घोषणा

उदयपुर में बस स्टैंड बनते समय असिस्टेंट रिजनल मैनेजर रहे यूसी भट्ट बताते हैं कि जहां वर्तमान में बस स्टैंड है, वह जगन्नाथ सिंह मेहता-हरनाथसिंह मेहता की बाड़ी थी। सन 1971 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा ने शहर का दौरा करते समय मेवाड़ मोटर्स की गली के यहां खड़े होकर यहां बस स्टैंड बनाने की घोषणा कर दी थी। मामला कोर्ट में चला। आखिर सरकार की जीत हुई और यूआईटी ने जमीन अधिग्रहित करके रोडवेज निगम को दी। इससे पहले तक उदयपुर में बस स्टैंड नहीं होने पर बापू बाजार स्थित एक बिल्डिंग में रोडवेज का दफ्तर चलता था।

टाउनहॉल से उठती थी बसें, बापू बाजार में था दफ्तर
उदयपुर आगार के चीफ मैनेजर रह चुके एसके उपाध्याय बताते हैं कि जब बस स्टैंड नहीं बना था, टीनशेड में दो कमरे थे, उसी में बुकिंग होती थी। बसों का संचालन यहां से शुरू होने के बाद पूरे रास्ते पर केबिन लगी दुकानें चलती थी। उस समय एएसपी और कलक्टर ने सख्ती से केबिन हटवाकर रोडवेज की राह आसान की। चंद बसों का संचालन टाउनहॉल के सामने से होता था। इस दरमियान हाथीपोल चौराहे से निजी बसें चलती थी, जिनसे कड़ी प्रतिस्पर्धा में रोडवेज बसों का संचालन किया जाता था। इसके बाद यहां बस स्टैंड बनना शुरू हुआ। रोड निकलने से परिसर छोटा हो गया है, जबकि पहले काफी गुंजाइश थी।
इनका कहना

उदयपुर बस स्टैंड की बिल्डिंग जयपुर के बाद प्रदेश में सबसे बड़ी है। अजमेर बस स्टैंड का निर्माण भी तीन-चार हिस्सों में हुआ, जबकि एक ही बार में पूरी बिल्डिंग का निर्माण उदयपुर में ही हुआ। उस समय की तकनीक से बिल्डिंग की ड्रेनेज समस्या बीम में रखी गई। इसे बाद में सुधारा गया। हालांकि इससे भी काम नहीं चला और अब भी ड्रेनेज की तकनीकी परेशानी है। बिल्डिंग की तकनीकी रूप से भी उम्र पूरी कर चुकी है। इसमें काफी सुधार की जरुरत है।
महेश उपाध्याय, चीफ मैनेजर, उदयपुर आगार