
कोर्ट ऑर्डर
मो. इलियास/उदयपुर. बीमा अवधि में चोरी हुए मोबाइल का क्लेम पास नहीं करने पर न्यायालय ने परिवादी को राहत देने के साथ ही कंपनी पर 10 हजार का जुर्माना लगाया। न्यायालय ने निर्णय में स्पष्ट लिखा कि कंपनी ने महज मोबाइल का उपयोग परिवादी की बजाए उसके भाई की ओर से करने का अड़ंगा लगाकर अनावश्यक रूप से न्यायालय में लिटीगेशन बढ़ाने का प्रयास किया।
स्थाई लोक अदालत ने यह निर्णय भोइवाड़ा बड़ी होली निवासी दीपक साहू व मयंक साहू की ओर से बजाज एलीयांस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के यरवाड़ा पूना स्थित मुख्य कार्यालय के प्रबंधक और पंचवटी स्थित स्थानीय कार्यालय के प्रबंधक के खिलाफ दर्ज परिवाद में दिया। अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व बृजेन्द्र सेठ ने न्यायालय ने माना कि मोबाइल सेट का नुकसान परिवादी को होने के कारण किसी तकनीकी शब्दावली के आधार पर क्लेम अस्वीकार किए जाने का कोई न्यायोचित कारण नहीं पाया जाता। बीमा कंपनी ने आर्बीटेरी एवं त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के साथ-साथ सकरात्मक दृष्टिकोण न रखकर अनाश्वक रुप से न्यायालय में लिटीगेशन बढ़ाने का प्रयास किया। दो माह के भीतर बीमा कंपनी जुर्माने के साथ ही परिवादी को मोबाइल की कीमत के 24 हजार 10 प्रतिशत ब्याज तथा शारीरिक, मानसिक क्षति व वाद व्यय के 5000 रुपए परिवादी को अदा करे।
यह था मामला
परिवादी दीपक का कहना था कि उसने एक मोबाइल सेट 32 हजार में खरीदा। 29 फरवरी 2016 में बीमा कंपनी से 2510 रुपए प्रीमियम अदा करते हुए मार्च 2017 तक एक वर्ष की अवधि के बीमा करवाया। इस अवधि में 23 फरवरी 2017 को मोबाइल चोरी हो गया। इसकी सूचना सुखेर थाने में दर्ज करवाने के साथ ही बीमा कंपनी को सूचना दी।
ऋण का ब्याज कम नहीं कर लगा दी पेनल्टी
उदयपुर. ऋण में ब्याज की राशि अधिक होने की स्थिति में अन्य संस्थान में टेकओवर करने पर फाइनेंस कंपनी की ओर से कम ब्याज लेने का आश्वासन देने के बावजूद पेनल्टी लगाना महंगा पड़ गया। न्यायालय ने सुनवाई के बाद परिवादी को राहत दिलाई।
हिरणमगरी सेक्टर-5 निवासी हरीश गौरव पुत्र रघुनाथ पटेल ने नई दिल्ली स्थित मैसर्स रेलीगेयर हाउसिंग डवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन और स्थानीय दुर्गा नर्सरी रोड स्थित कार्यालय के शाखा प्रबंधक के खिलाफ परिवाद पेश किया। बताया कि परिवादी ने विपक्षी से सौभागपुरा स्थित रॉयल राजविलास स्थित प्लेट नम्बर 707 जी-2 पर लेने के लिए विपक्षी से 70 लाख का ऋण 96 माह की किश्त 1,32,115 रुपए 14 प्रतिशत वार्षिक दर ब्याज पर लिया। ब्याज दर अव्यवहारिक होना पाते हुए परिवादी ने ऋण को अन्य संस्थान से टेकओवर किए जाने का फरवरी 2017 में निवेदन किया। विपक्षी कंपनी ने 12 प्रतिशत ब्याज रिड्यूसिंहग किए जाने का आश्वासन देकर एक ई-मेल की प्रति उपलब्ध करवा दी, लेकिन ब्याज दर कम नहीं की। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से अनावश्यक पेनल्टी भी लगाने से विपक्षी ने पेनल्टी लगा दी। इसके अलावा ब्याज दर क्षेत्राधिकारी नई दिल्ली का होना बताकर ब्याज कम नहीं किया। स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व बृजेन्द्र सेठ ने माना कि विपक्षी ने बैंक की सेवा शर्तों का उल्लंघन किया। परिवादी को उसके विधिक अधिकारों से वंचित किए जाने का भी द्योतक है। न्यायालय ने विपक्षी की सेवा शर्तों की गलती पर परिवादी को शारीरिक, मानसिक क्षति व वाद व्यय के 10 हजार रुपए एक माह में देने के आदेश दिए। साथ ही 10 फरवरी 2017 से निरंतर ब्याज दर 14 प्रतिशत के स्थान पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से बिना पेनल्टी रिशिडयूल करने के आदेश दिए।
Published on:
03 Oct 2018 03:21 pm
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