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प्रदेश के 9500 समायोजित राज्य कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का इंतजार

सु्प्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट की स्वीकृति के बावजूद अब तक नहीं हुई जारी  

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प्रदेश के 9500 समायोजित राज्य कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का इंतजार

प्रदेश के 9500 समायोजित राज्य कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का इंतजार

उदयपुर. प्रदेश के 9500 समायोजित राज्य कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का इंतजार है। सु्प्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट भी पेंशन जारी करने की स्वीकृति दे चुके हैं, लेकिन सरकार ने अब तक पेंशन जारी नहीं की, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश है। दरअसल, सरकार में कार्मिकों की कमी होने के कारण इसकी पूर्ति करने के लिए अनुदानित शिक्षण संस्थाओं का अनुदान बंद कर कर्मचारियों को सत्र 2010-11 में राज्य सरकार ने समायोजित किया था। इसमें मेवाड़ अंचल की कई ख्याति प्राप्त संस्थाओं का अनुदान बंद करना न्यायोचित नहीं था, लेकिन अनुदान बंद कर देने के कारण कर्मचारियों को राज्य सरकार में समायोजित होने के लिए मजबूर होना पडा । संगठन के भूपालसिंह राणा ने बताया कि समायोजित कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन देने के लिए सरकार से कई बार गुहार लगाई, लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से कर्मचारियों को हाईकोर्ट जोधपुर की शरण लेनी पड़ी, जहां से पुरानी पेंशन देने की स्वीकृति मिल गई । फिर भी पुरानी पेंशन देने के आदेश जारी नहीं किए गए । इसके बाद कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली का सहारा लेना पड़ा। जहां से भी पुरानी पेंशन पाने का अधिकार मिल गया। लेकिन अब तक सरकार ने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने के आदेश जारी नहीं किए हैं। ऐसे में कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का इंतजार है। अनुदानित कर्मचारी अर्ध सरकारी कर्मचारी होता है, जिसने कुछ वर्ष राज्य सरकार को भी दिये है। उन्हें पुरानी पेंशन नहीं देना न्यायोचित और मानवीय नहीं है। जबकि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से पुरानी पेंशन देने की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। अतः अविलम्ब पुरानी पेंशन देने के आदेश जारी होने चाहिए।


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