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प्रेम और समर्पण का प्रतीक सारस क्रेन

जीवनभर एक ही साथी के साथ जीवन व्यतीत करता है यह पक्षी

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प्रेम और समर्पण का प्रतीक सारस क्रेन

प्रेम और समर्पण का प्रतीक सारस क्रेन

उदयपुर. मेनार. परिंदों का संसार बहुत ही खूबसूरत होता है। हर परिंदा किसी ना किसी खूबी के लिए जाना जाता है। धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही लिहाज से इनके महत्व और उपयोगिता को हम नकार नहीं सकते। ऐसे पक्षी के बारे में बता रहे हैं, जो सिर्फ परिंदों के लिए ही नहीं बल्कि इंसानों के लिए सुखद गृहस्थ जीवन और निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

हम बात कर रहे हैं सारस क्रेन ( क्रोंच ) की, जिसे किसानों का मित्र भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम ग्रस एंटीगोन है। जो हानिकारक कीट-पतंगों और चूहे जैसे जीवों का सफाया कर खेतों की रखवाली करते हैं। पिछले 2 वर्षों में मेनार क्षेत्र में सारस पक्षी के अधिकतम 15 जोड़े देखे गए हैं। यहां इनके आवास भी देखे गए हैं। उड़ने वाले पक्षियों में सारस सबसे बड़े पक्षियों की श्रेणी में आता है। जब ये खड़े होते हैं तो इनकी औसत ऊंचाई 5 फीट तक होती है। इनका औसत वज़न करीब 6.35 किलो होता है। उड़ते समय इनके पंखों का फैलाव 1.5 से 2 मीटर तक होता है। ये समान जलवायु वाले अन्य भागों में देखा जा सकता है। भारत में पाए जाने वाला सारस यहां के स्थाई प्रवासी होते हैं और एक ही भौगोलिक क्षेत्र में रहना पसंद करते हैं।
हमेशा रहते हैं जोड़े में

इस पक्षी को प्रेम और समर्पण का प्रतीक मानते हैं। यह जीवन काल में एक बार जोड़ा बनाता है और उसके बाद पूरे जीवनभर साथ रहते हैं। यदि किसी कारण से एक साथी की मृत्यु हो जाती है तो दूसरा बहुत सुस्त होकर खाना पीना बंद कर देता है, जिससे प्रायः उसकी भी मृत्यु हो जाती है।

रामायण में भी उल्लेख
महर्षि वाल्मीकि ने रामायण लिखने का आरंभ सारस पक्षी के वर्णन से ही किया था। प्रणयरत सारस युगल में से एक की शिकारी के तीर से हत्या कर दी जाती है तो दूसरा अपने साथी के वियोग में वहीं तड़प कर प्राण त्याग देता है। इस घटना से द्रवित होकर महर्षि उस शिकारी को श्राप देते हैं और वही पंक्तियां रामायण के प्रथम श्लोक के रूप में लिपिबद्ध होती हैं। सारस युगल को पवित्र और सौभाग्य के प्रतीक के रूप में मान्यता मिली हुई है। इसका वर्णन लोक कथाओं और लोक गीतों में मिलता रहता है।


राजस्थान में 4 तरह की प्रजातियां
राजस्थान में सारस की चार प्रजातियां पाई जाती है। आमतौर पर ये एक या 2 अंडे देते हैं। इनमें से अक्सर एक ही बच्चा जीवित रहता है। ये ब्रीडिंग के समय सुंदर एक्रोबेटिक नृत्य करते हैं। इनकी आवाज दूर आबादी इलाकों तक सुनाई देती है। ये सर्वाहारी होते हैं, जो कंदों, बीजों और अनाज के दानों को भी ग्रहण करते हैं।