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आरटीआई में सूचना हर बार टालमटोल, आयुक्त को कहा अब भरो 10 हजार जुर्माना

आरटीआई में सूचना हर बार टालमटोल, आयुक्त को कहा अब भरो 10 हजार जुर्माना

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आरटीआई में सूचना हर बार टालमटोल, आयुक्त को कहा अब भरो 10 हजार जुर्माना

आरटीआई में सूचना हर बार टालमटोल, आयुक्त को कहा अब भरो 10 हजार जुर्माना

मोहम्मद इलियास/उदयपुर
नगर निगम को सूचना के अधिकार कानून में परिवादी को सूचना नहीं देना महंगा पड़ गया। राज्य सूचना आयोग ने इसे नगर निगम आयुक्त की लापरवाही मानते हुए उन पर 10 हजार का जुर्माना लगाया। सूचना आयुक्त नारायण बारेठ ने यह राशि दोषी निगम आयुक्त के वेतन से काटकर जरिए डिमांड ड्राफ्ट सचिव सूचना आयोग जयपुर के नाम से तीस दिन में भिजवाने का आदेश दिया।
राज्य सूचना आयोग ने यह आदेश देवेन्द्र सिंह सैनी बनाम राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं आयुक्त नगर निगम के प्रकरण में दिया। अपीलार्थी सेक्टर-14 सी ब्लॉक निवासी सैनी ने 5 दिसम्बर 2019 से सफाई कर्मियों की उपस्थिति रिपोर्ट सहित कुल 13 बिंदुओं की सूचना मांगी थी। निगम ने निर्धारित समय पर सूचना नहीं दी, प्रथम अपील में भी टालमटोल करने पर आयोग के समक्ष द्वितीय अपील दायर की थी। अपील के दौरान आयोग के ओर से 17 अगस्त 2020 को नोटिस जारी किया गया फिर भी कोई जवाब नहीं दिया गया। आयोग ने बाद में सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 (1) के अंतर्गत 16 फरवरी 2020 को पंजीकृत नोटिस जारी कर सूचित किया गया कि सूचना नहीं दिए जाने का कारण क्यों न आपको उक्त धारा के तहत दंडित किया जाए? उपरोक्त नोटिस के बावजूद प्रत्यर्थी ने कोई अपीलोत्तर आयोग में प्रस्तुत नहीं किया है तथा न हीं अपीलार्थी को सूचना उपलब्ध करवाई गई। सुनवाई के दौरान भी प्रत्यर्थी समक्ष भी उपस्थित नहीं हुआ है तथा न ही धारा 20(1) के नोटिस पर उनके द्वारा कोई स्पष्टीकरण दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि प्रत्यर्थी जानबूझ कर सूचना नहीं देना चाहता। उसका यह कृत्य सूचना के अधिकार के प्रति लापरवाही प्रकट करता है। अत: उपरोक्त कृत्यों के लिए प्रत्यर्थी को दोषी पाकर 10 हजार की शास्ति लगाई। आयोग ने आदेश के एक प्रति शासन सचिव, कार्मिक विभाग शासन सचिवालय, जयपुर को पालना सुनिश्चित तकरने के लिए प्रेषित करने के लिए कहा।
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15 दिन में सूचना देने के आदेश
सूचना आयोग ने कहा कि पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेख का अवलोकन किया गया। यद्यपि अपीलार्थी द्वारा चाही गई सूचनाएं विस्तृत एवं विशिष्टिविहीन है, तथापि सूचना का अधिकारी अधिनियम, 2005 की भावना को देखते हुए प्रत्यर्थी को निर्देशित किया जाता है कि अपीलार्थी को जरिये पंजीकृत डाक रिकॉर्ड अवलोकन के लिए निर्णय प्राप्ति के 15 दिन में आमंत्रित करें। अपीलार्थी द्वारा चिहिृत करने पर 50 पृष्ठों तक की निशुल्क सूचना उसी दिन अधिप्रमाणित एवं हस्ताक्षरित कर करवाना सुनिश्चित करें।

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