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उदयपुर में सर्दी का थर्ड डिग्री, मौसम की सबसे सर्द रात, कंपकंपी और गलन से जनजीवन प्रभावित

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धीरेंन्द्र जोशी/उदयपुर . जिले में शुक्रवार की रात सबसे सर्द रही और न्यूनतम तापमान इस मौसम का सबसे कम 1.8 डिग्री सेल्सियस रहा, वहीं एमएलएसयू के आरसीए परिसर में पारा पहली बार ऋणात्मक दर्ज किया गया। इसके चलते शनिवार को दोपहर तक ठिठुरन एवं गलन बनी रही। दिन में तेज धूप ने कुछ देर राहत दी मगर शाम होते ही शीतलहर से जनजीवन ठिठुरा गया। गत दो-तीन दिन से पारा फिर लुढक़ने से ठंड का असर बढ़ गया है। शुक्रवार रात को न्यूनतम पारा लुढक़कर इस मौसम में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। डबोक स्थित मौसम कार्यालय के अनुसार शनिवार को अधिकतम तापमान 22.2 एवं न्यूनतम 1.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इधर, सूरजपोल स्थित आरसीए परिसर में अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम तापमान 1 डिग्री सेल्सियस तो एमएलएसयू स्थित सीटीएई में न्यूनतम पारा -0.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहर में शनिवार सुबह कई जगह पर घास एवं खुले में खड़े वाहनों पर बर्फ की पतली परत बिछी हुई दिखाई दी।

 

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इसलिए बढ़ रही ठंड

मौसम विज्ञानी नरपतसिंह राठौड़ ने बताया कि पिछले दो सप्ताह से मेवाड़ सहित पूरा राजस्थान शीतलहर की जकड़ में है। इसका मुख्य कारण चिलाई कला (कश्मीर में लंबे समय तक ठंड) तथा तापक्रम की विलोमता है। तापक्रम कम होने से हवा ठंडी होकर धरातल पर बहती है। इससे शाम से सुबह अत्यधिक ठंड महसूस की जाती है। पिछले दस दिन से सूर्य ढलने के साथ ही रात को तेजी से ठंडी हो रही है। मौसम की इस प्रकार की दशाएं लगभग 20 वर्ष पहले बनी थी। इसमें लगातार ठंड पड़ी। अगले दो-तीन दिनों तक यह स्थिति बनी रहेगी।
पाले से बचाए फसलों को

प्रोफेसर नारायणसिंह सोलंकी ने बताया कि लगातार ठंड पडऩे से पाला गिरने की संभावना बढ़ जाती है। इन दिनों खेतों में सरसों और चने की फसल में दाना बन रहा है। पाला पडऩे से सब्जियों की फसल में नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसानों को फसल पर विशेष ध्यान देना होगा। पाले के प्रभाव को कम करने के लिए किसानों को शाम के समय खेतों में धुआं करना चाहिए। साथ ही हल्की सिंचाई भी करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि फसलों 0.1 प्रतिशत सल्फुरिक एसिड का छिडक़ाव करने से भी पाले के असर को कुछ कम किया जा सकता है।