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VIDEO : ‘जनता पुलिस चौकीÓ नहीं चीरने देगी धरती मां की छाती

- महिलाओं के हाथों में लठ-पत्थर, बोली-जमीन किसी को नहीं देंगे- भल्लों गुड़ा में चरागाह बचाने के लिए ग्रामीण बने प्रहरी

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VIDEO : 'जनता पुलिस चौकीÓ नहीं चीरने देगी धरती मां की छाती

धीरेंद्र्र् जोशी/उदयपुर. चरनोट भूमि और वहां बने दो प्राकृतिक एनिकट पर खनन माफियाओं की गिद्ध निगाहे पड़ते ही भल्लों का गुड़ा के ग्रामीण एकजुट होकर प्रहरी बन गए। हाथों में लठ, पत्थर लेकर वे पहरा देकर हर आने पर पूछताछ कर रहे हैं। जमीन की बात करते ही कह रहे हैं कि चरनोट भूमि व एनिकट गांव के प्राण हैं। हमारे जीते-जी यहां कि धरती मां का छाती छलनी नहीं होने देंगे। शहर से 20 किलोमीटर भल्लों का गुड़ा गांव में यह स्थिति ६ माह से चल रही है। खनन कारोबारियों व ग्रामीणों के बीच आमने-सामने की स्थिति है। राजस्थान पत्रिका की टीम जब मौके पर पहुंची तो यह हालत देखने को मिले। ग्रामीणों से बातचीत करते ही उन्होंने जमीन बचाने की गुहार लगाई।
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35 बीघा का जमीन का है मामला
भल्लों का गुड़ा गांव की करीब 35 बीघा जमीन पर खान विभाग ने खनन के छह पट्टे जारी कर दिए। इसकी भनक लगते ही ग्रामीणों ने 30 अगस्त, 2018 को ग्राम सभा बुलाई और अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी नहीं करने का प्रस्ताव पारित किया। इसके बावजूद आचार संहिता में कुछ लोगों की मिलीभगत से अनापत्ति पत्र जारी हो गया जिससे नाराज ग्रामीणों ने 24 जनवरी, 2019 को कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इस पर कलक्टर ने अनापत्ति प्रमाण-पत्र को निरस्त करते हुए खान विभाग को जांच के निर्देश दिए। इस मामले को लेकर ग्रामीण ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर तत्कालीन सरपंच को पद से हटा दिया। इसके बाद से ही गांव के लोग टीमें बनाकर गांव के प्रहरी बने हुए हैं।
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पट्टों पर स्थगन, मंत्री बोल रहे कनेक्शन करो
खान विभाग की ओर से जारी पट्टों को लेकर न्यायालय अतिरिक्त निदेशक (खान), पर्यावरण एवं विकास, खान एवं भूविज्ञान विभाग की ओर से यथास्थिति के आदेश दिए हुए हैं। इसके बावजूद विद्युत निगम ने 1 माह से कनेक्शन देने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। निगम के अधीक्षण अभियंता ने अधिशासी अभियंता को ऊर्जा मंत्री के निर्देश का उल्लेख करते हुए बिजली कनेक्शन करने के आदेश दिए हैं।
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ये भी हैं जांच के बिंदू
- चरनोट भूमि पर हठधर्मिता से पट्टे जारी करना।
- भूमि के पास ही दो एनिकट हैं, जिनकी भराव क्षमता खुदाई से प्रभावित होगी।
- जो भूमि दी गई है, उसमें कुछ क्षेत्र एनीकट पेटे का भी है।
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ग्रामीण ये बोले...
इस चरागाह भूमि पर सरकार ने खनन के लिए करीब 35 बीघा जमीन पर छह पट्टे जारी कर दिए। इस पर ग्राम सभा में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं करने का प्रस्ताव पारित किया था। आचार संहिता के दौरान मिलीभगत से अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया।
-मन्नाराम डांगी, अधिवक्ता व क्षेत्रवासी
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करगेट और भल्लों का गुड़ा गांव के मवेशियों के लिए चरागाह भूमि है। साथ ही आसपास के जंगलों से ग्रामीण घास और तिनकों के साथ ही जंगल से मिलने वाले संसाधन जुटाते हैं।
-चुन्नीलाल गमेती, करगेट निवासी
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एनीकट पेटे की भूमि के भी पट्टे दे दिए गए हैं। गांव के मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था और आसपास का भू-जल स्तर इसी एनीकट पर निर्भर है।
- कालूराम डांगी, क्षेत्रवासी
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जहां खनन पट्टे दिए गए हैं, उसके आसपास दो एनीकट बने हुए हैं। इनके पास कुआं है जिससे वर्षभर शुद्ध जल मिलता है। एनीकट मवेशियों को पेयजल उपलब्ध करवाते हैं तो जरूरत होने पर हम भी कुएं का पानी पीते हैं।
- रामलाल पटेल, क्षेत्रवासी
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हमने अस्थायी चौकी और कई टीमें बना रखी हैं। ये टीमें दिन-रात गांव में बाहरी व्यक्तियों की गतिविधियों पर निगाह रखती है। अगर निगरानी करने से आनाकानी करता है तो नियमानुसार उस पर दंड लगाया जाता है।
- भंवरलाल डांगी, क्षेत्रवासी
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हमारे खेत और कुएं पास में ही हैं। खनन होने से ये पूरी तरह से तबाह हो जाएंगे। हम गांव की जमीन किसी भी व्यक्ति को नहीं लेने देंगे।
- नारायणी बाई
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हमारे पशु वहां चरने जाते हैं। पास में बने एनीकट में उन्हें पानी भी मिल जाता है। इसके साथ ही जमीन से सूखी लकडिय़ां और घास भी मिलती है। इस पर खनन करने से इस भूमि के साथ ही आसपास की भूमि भी खराब हो जाएगी।
- देऊ बाई