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जिनवाणी के स्वाध्याय से अमृत पान होता है : आचार्य वर्धमान सागर

- आज से शुरू होगा मंदिर प्रतिष्ठा का रजत जयंती समारोह

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जिनवाणी के स्वाध्याय से अमृत पान होता है : आचार्य वर्धमान सागर

जिनवाणी के स्वाध्याय से अमृत पान होता है : आचार्य वर्धमान सागर

उदयपुर. आप सभी ने तीर्थंकरों द्वारा प्रतिपादित जैन कुल में जन्म लिया है यह बहुत ही पुण्य और सौभाग्य की बात है। श्रावक के गुणों में लज्जा गुण होना चाहिए। कोई भी कार्य कुल के विरुद्ध नहीं करना चाहिए।यह बात श्रावक शब्द की विवेचना करते हुए धर्मसभा में आचार्य वर्धमान सागर ने कही। उन्होंने कहा कि श्रावक को श्रद्धा, विवेकवान और क्रियावान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीतराग भगवान पर पूर्ण श्रद्धा होना चाहिए। सात तत्वों पर श्रद्धा कर जो आचरण शास्त्रों में बताया है उसे श्रद्धा पूर्वक ग्रहण करें।

इसके पूर्व में संघस्थ शिष्या आर्यिका दिव्ययश मति ने पुण्य और पुरुषार्थ की विवेचना की। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। श्रावक के 6 कर्तव्य है देवपूजा, गुरु पस्ती, स्वाध्याय, संयम, तप और दान इनका अलग-अलग महत्व बताया। पुण्यार्जक परिवारों द्वारा आचार्य के चरण प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट किया। संचालन राजेंद्र अखावत एवं गौरव गनोडि़या ने किया।--------

तीन दिवसीय रजत जयंती महोत्सव आज सेअध्यक्ष झमक लाल अखावत ने बताया कि श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर की पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में तीन दिवसीय रजत जयंती महामहोत्सव 28 से 30 जून तक आचार्य ससंघ के सानिध्य में होंगेे।

इसके तहत पहले दिन रविवार को सायं 7.30 बजे से सेक्टर-4 के नागेंद्रा भवन में भक्ति संध्या होगी। सोमवार को सुबह 6.30 बजे घटयात्रा, 7 बजे मंडप शुद्धि, आचार्य निमंत्रण, ध्वजारोहण, अभिषेक पंचामृत, शांतिधारा, 7.45 बजे आचार्य के प्रवचन, 8.15 बजे आहार चर्या, दोपहर 1 बजे श्री कल्याण मंदिर विधान पूजन, 3.30 बजे आचार्य का पूजन, 4 बजे प्रवचन, सायं 6.30 बजे महाआरती होगी। मंगलवार सुबह 5.45 बजे अभिषेक, शांतिधारा, 6.30 बजे नित्य नियम पूजन, 7 बजे प्रवचन, 8 बजे पूर्णाहुति हवन, 8.15 बजे आहार चर्या, 9.15 बजे शोभायात्रा, 10.05 बजे मंदिर के शिखर पर ध्वजा परिवर्तन, 10.30 बजे स्वामी वात्सल्य होगा।

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