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स्वाध्याय से अज्ञान रूपी अंधकार दूर होता है : आचार्य वर्धमान सागर

सर्वऋतु विलास स्थित श्री महावीर जिनालय में हुई धर्मसभा

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स्वाध्याय से अज्ञान रूपी अंधकार दूर होता है : आचार्य वर्धमान सागर

स्वाध्याय से अज्ञान रूपी अंधकार दूर होता है : आचार्य वर्धमान सागर

उदयपुर. वर्षा योग में साधु चातुर्मास करते हैं, किंतु साधुओं के साथ श्रावकों का भी चातुर्मास होता है। आपको असीम पुण्य से तीर्थंकर कुल जैन धर्म में मनुष्य पर्याय मिली है, इसलिए देव शास्त्र गुरु रतनत्रय रूपी धर्म देशना से जीवन में परिवर्तन लाना चाहिए।
यह बात आचार्य वर्धमान सागर ने सर्वऋतु विलास स्थित श्री महावीर जिनालय के आचार्य शांति सागर सभागार में कही। उन्होंने बताया कि साधु आप सबके लिए समय निकालकर प्रवचन करते हैं, किंतु बहुत से लोग प्रवचन में आते नहीं, जो आते हैं वह देरी से आते हैं, कई प्रवचन सुनते हैं, किंतु ग्रहण नहीं करते और जो प्रवचन को ग्रहण करते हैं वे उसका चिंतन कर मनन नहीं करते। संसार के आवागमन से मुक्त होने के लिए आपको देव शास्त्र, गुरु, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र, अणुव्रत, महाव्रत, तप संयम के पुरुषार्थ करने पर सिद्धालय की प्राप्ति हो सकती है।आचार्य के प्रवचन के पूर्व मुनि हितेंद्र सागर ने कहा कि चारों ओर विकास की चर्चा हो रही है किंतु इस विकास की भारी कीमत दूषित जल, दूषित पर्यावरण से चुकानी पड़ रही है। मुनि ने कहा कि व्यक्ति कुएं, तालाब, नदी से पानी लाता था तो जितना उपयोग होता था उतना ही पानी लाता था, किंतु वर्तमान में पेयजल का जरूरत से ज्यादा उपयोग किया जा रहा है। आपको जल का सीमित उपयोग करना होगा।
शांतिलाल भोजन, शांतिलाल वेलावत, सुरेश पद्मावत ने प्रवचन के पूर्व मंगलाचरण बाद आचार्य के चरण प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किया।


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