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श्रीनाथजी मंदिर में दूध-दही का छिड़काव, अस्थल आश्रम में ढाढा-ढाढिन ने किया नृत्य

इस्काॅन में धूमधाम से मनाया नंदोत्सव

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श्रीनाथजी मंदिर में दूध-दही का छिड़काव, अस्थल आश्रम में ढाढा-ढाढिन ने किया नृत्य

श्रीनाथजी मंदिर में दूध-दही का छिड़काव, अस्थल आश्रम में ढाढा-ढाढिन ने किया नृत्य

उदयपुर. अस्थल आश्रम और श्रीनाथजी मंदिर सहित अन्य मंदिराें में शुक्रवार को नंदोत्सव की धूम रही। कहीं दूध-दही का छिड़काव किया गया तो कही ढाढा-ढाढिन का नृत्य, भक्तों-पुजारियों ने नंदबाबा और यशोदा बनकर कान्हा को लाड़ भी लड़ाए।अस्थल आश्रम में सुबह 11 बजे नंदोत्सव मनाया गया। इसके तहत ढाढा-ढाढिन का नृत्य किया गया। इसमें नंद बाबा यशोदा स्वरूप के सामने बधाई गान प्रभु श्री कृष्ण लाल को खेल खिलौने से रिझाया गया। महंत रासबिहारी शरण ने बताया कि ठाकुर जी के जन्म की बधाइयां देकर खुशिया मनाई गई। भक्तों पर हल्दी का पानी छिड़कने, फल, नारियल, चॉकलेट, दक्षिणा आदि न्यौछावर किया गया। कीर्तनकारों ने बधाई गीत गाए। इसके बाद मटकी फोड़ प्रतियोगिता ( दधिकोत्सव ) में निंबार्क बी-एङ व एसटीसी के छात्राध्यापकों ने टीम के रूप में भाग लिया। भक्त जनों ने जयकारों के साथ भावपूर्ण नित्य प्रस्तुत किए पंजीरी पंचामृत प्रसाद वितरण किया।

श्रीनाथजी मंदिर में सुबह नंद महोत्सव की शुभ वेला में मुखियाजी ने प्रभु के छठी की पूजा की। इसके बाद श्री मदनमोहनजी को श्रीजी प्रभु के सम्मुख चांदी के पालने में पधरा कर मुखियाजी ने नंदबावा एवं बलभोगिया ने यशोदा के रूप में सज संवर कर रजत व काष्ट के विशेष खिलौनों से रिझाया। प्रभु को पालना में झुलाया गया। ग्वाल एवं गोपी बने मंदिर सेवकों ने नृत्य गान किया। इस अवसर पर संपूर्ण मंदिर परिसर में दही, छाछ, केसर, हल्दी से नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की... उद्घोष के साथ छिड़काव किया गया। प्रभु के सम्मुख और मंदिर के सभी चौक में सभी सेवादारों ने जयकारे के साथ नृत्य किया घूमर ली।

गंगूकुण्ड स्थित इस्काॅन मन्दिर में शुक्रवार को सुबह धूमधाम से नन्दोत्सव मनाया गय। भक्तों ने नन्द के आनन्द भयो जय कन्हैयालाल की..., हरे कृष्ण हरे राम के जयकारे के साथ उछल-उछल कर आनंद उठाया। एक-दूसरे को जन्माष्टमी की बधाइयां दी। इस्काॅन संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद के 127वें आविर्भाव दिवस को व्यास पूजा के रूप में मनाया। प्रबंधक मायापुरवासी दास ने बताया कि इस अवसर पर वैष्णव ब्रह्मचारी तथा भक्तों ने प्रभुपाद का पंचामृत गंगाजल तथा फूलों से महाअभिषेक किया। जन्माष्टमी में विशेष सेवा देने पर डाॅ. बालकृष्ण शर्मा को डाॅ. सार्वभौम प्रभु के कर कमलो से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व मुम्बई से आये कुण्डल कृष्ण प्रभु ने कृष्ण जन्म तथा नन्दोत्सव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। पाकिस्तान में इस्काॅन सनातन का प्रचार करने वाले वृन्दावन के डॉ. सार्वभौम प्रभु ने बताया कि नन्दोत्सव के दिन ही प्रभुपाद का जन्मदिन पूरा विश्व मनाता है।