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Video : अगले बरस तू जल्दी आ… के उद्घोष के साथ प्रतिमाओं का हुआ विसर्जन

- नम आंखों से बप्पा को विदाई- सुबह से जगह-जगह निकली शोभायात्राएं

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अगले बरस तू जल्दी आ... के उद्घोष के साथ प्रतिमाओं का हुआ विसर्जन,अगले बरस तू जल्दी आ... के उद्घोष के साथ प्रतिमाओं का हुआ विसर्जन

उदयपुर. ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ भजनों पर झूमते श्रद्धालु, गुलाल और अबीर के उड़ते गुबार के नजारे गुरुवार को अनंत चतुर्दशी पर सुबह से देर रात तक दिखाई दिए। प्रथम आराध्य भगवान गणेश की भक्ति में लीन श्रद्धालु उत्साह से प्रतिमाओं को प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थलों तक ले गए और श्रद्धा से उनका विसर्जन किया।
शहर के विभिन्न मंडलों के साथ ही घर-घर में स्थापित भगवान गणपति की प्रतिमाओं का विसर्जन गुरुवार को किया गया। अधिकतर बड़े मंडलों और संगठनों ने दोपहर बाद शोभायात्रा के रूप में प्रतिमाओं का विसर्जन किया। घरों और छोटे मंडलों की प्रतिमाओं को स्कूटर, कार, ठेला गाड़ी, सिरोधार्य करके लाया गया। प्रशासन द्वारा निर्धारित दूधतलाई, अंबापोल, गोवर्धन सागर आदि स्थानों पर प्रतिमाओं को लाकर विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद कुंड में प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

भर आई आंखें

गणपति प्रतिमा के विसर्जन के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई। गणेश चतुर्थी के साथ ही गणपति प्रतिमा स्थापित की गई। प्रतिदिन सुबह-शाम उनकी पूजा-अर्चना से उत्सव का माहौल व्याप्त रहा। ऐसे में गुरुवार को विसर्जन करते समय कई महिलाएं और बच्चे रोने लगे।
कई संगठन अपने साथ ले गए प्रतिमाएं
कई संगठनों ने स्थायी प्रतिमाएं बना रखी है। इनमें लकड़ी, चांदी, अष्ट और पंचधातु की प्रतिमाएं हैं। जिन्हें धूमधाम से झीलों के किनारे लाया गया। यहां सांकेतिक रूप से जल का छिड़काव कर प्रतिमाओं को पुन: अपने साथ ले गए।

सेल्फी विद गणपति

विसर्जन से पूर्व श्रद्धालुओं ने गणपति प्रतिमाओं के साथ सेल्फी ली। युवक-युवतियों में इसका क्रेज अधिक दिखाई दिया। इसके साथ ही कई लोगों ने अपने स्टेटस पर भी भगवान गजानन के साथ वाली फोटो लगाई।
झीलों की शुद्धता का रखा ध्यान
प्रतिमा विसर्जन के दौरान गणगौर घाट, फतहसागर, बड़ी, गोवर्धन सागर, दूधतलाई आदि स्थानों पर पुलिस और नगर निगम की टीम लगी रहीे। घाट पर प्रतिमाओं लाने वाले लोगाें को केवल जल का छिड़काव ही करवाया गया। इसके बाद यहां खड़े नगर निगम के वाहनों में प्रतिमाओं को रखवाया गया। ऐसा ही माहौल निर्धारित कुंड पर भी दिखाई दिया। यहां प्रतिमाओं और पूजन सामग्री को जल में डूबोने के बाद बाहर रखवाया गया।