
विशेषज्ञों की देखरेख में होगा घायल वन्यजीवों का उपचार
उदयपुर. सज्जनगढ अभयारण्य में वन्यजीवों का रेस्क्यू सेंटर तैयार किया जा रहा है। इसमें संभाग और आसपास के क्षेत्र में रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को रखने के साथ ही उनका उपचार भी किया जाएगा। यह संभाग का पहला ऐसा रेस्क्यू सेंटर होगा जहां वन्यजीवों को प्राकृतिक परिवेश में विशेषज्ञों की देखरेख में आधुनिक उपचार दिया जाएगा और स्वस्थ्य होने पर उन्हें पुन: जंगल में छोड़ा जाएगा।
उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में घने वनों में आए दिन वन्यजीवों का रेस्क्यू किया जाता है। इनमें से कई वन्यजीव घायल अवस्था में होते हैं। जिन्हें दो से तीन दिन तक उपचार और देखरेख की आवश्यकता रहती है। सबसे अधिक पैंथर का रेस्क्यू किया जाता है। घायल वन्यजीव को बायोलॉजिकल पार्क में मौजूद सीमित संसाधनों में ही रखना पड़ता है। यहां मौजूद चिकित्सक ही उनका उपचार करते हैं। गंभीर होने पर पशु चिकित्सालय में ही उपचार करवाया जाता है। इसमें पैंथर, चीतल, सांभर, जरख, भालू आदि बड़े जीवों के साथ पक्षियों और छोटे वन्यजीवों के उपचार की सुविधा होगी।
4.72 करोड़ से बनेगा सेंटर
रेस्क्यू सेंटर 4.72 करोड़ की लागत से 4 हेक्टेयर क्षेत्र में बनाया जा रहा है। एक माह पूर्व इस सेंटर का काम शुरू हुआ था। वर्तमान में इसका फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है। इस रेस्क्यू सेंटर में 21 एनक्लोजर कार्निवोरस प्रजाति के वन्यजीवों के लिए होंगे। इसके साथ ही दो एनक्लोजर पक्षियों के लिए और 4 एनक्लाेजर शाकाहारी जीवों के लिए बनाए जाएंगे।
घूमने और आराम की व्यवस्था भी
एनक्लोजर के अटैच नाइट शेल्टर बनाए जाएंगे। ऐसे में घायल वन्यजीव रात को इनमें आराम कर सकेंगे। क्राल में दिन के समय वे विचरण भी कर पाएंगे। सेंटर में पक्षियों के लिए भी ट्रीटमेंट रूम बनाए जाएंगे। ऐसे में घायल पक्षियों का भी प्राकृतिक परिवेश में उपचार संभव हो सकेगा।
कैमरों से होगी निगरानी
इस सेंटर में आने वाले वन्यजीवों की सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक क्राल और नाइट शेल्टर में सीसीटीवी लगाए जाएंगे। इसके साथ ही रेस्क्यू सेंटर में रोशनी करने के लिए सोलर प्लांट लगाया जाएगा। यहां सोलर से रोशनी की व्यवस्था की जाएगी।
Published on:
27 Oct 2023 09:11 pm
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