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सिटी बसों का समय निश्चित नहीं, झीलों में बढ़ रहा प्रदूषण

- पत्रिका स्पीक अप में युवाओं ने रखे विचार  

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सिटी बसों का समय निश्चित नहीं, झीलों में बढ़ रहा प्रदूषण

सिटी बसों का समय निश्चित नहीं, झीलों में बढ़ रहा प्रदूषण

उदयपुर. शहर में चल रही सिटी बसों का समय निश्चित नहीं है। इनके रुकने के स्टैंड पर कभी समय पर बस आ जाती है तो कभी दो-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। इन बसों का समय निश्चित होना चाहिए। इससे इनमें यात्रा करने वाले यात्रियों को नियत समय पर कहीं भी पहुंचने में परेशानी नहीं हो। इसी प्रकार की शहर में व्याप्त अन्य समस्याओं पर साइंस कॉलेज के विद्यार्थियों ने राजस्थान पत्रिका स्पीक अप कार्यक्रम में बेबाक अपनी राय रखी।
उमेश नाथ ने बताया कि शहर में कई स्थानों पर सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे पड़े हुए हैं। जिसकी जहां मर्जी होती है वहां अपने हिसाब से बेरियर्स तैयार करवा देता है। इससे वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं और शहर की छवि भी खराब हो रही है। प्रशासन को चाहिए कि सड़कों की िस्थति सुधारने के साथ ही नियमानुसार बेरियर्स बनाए जाएं।

प्रियांश तंवर ने बताया कि शहर में ऑटो की संख्या काफी बढ़ गई है। ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए इनकी संख्या को नियंत्रित करना आवश्यक है। कई रूटों पर सिटी बसें नहीं चलती। ऐसी जगहों को चिह्नित करके इन रूटों पर भी बसों का संचालनन शुरू किया जाए।
विशाखा पालीवाल ने बताया कि सिटी बस में आवागमन करने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ये बसें कभी भी समय पर नहीं पहुंचती। इनका समय निश्चित करने होने पर इनके प्रति लोगों को विश्वास बढ़ेगा और आय में भी वृद्धि होगी।

अविशी पालीवाल ने बताया कि झीलों की नगरी में प्रदूषण बढ रहा है। झीलों में प्रदूषण के कारण इनका पानी गंदा हो रहा है, ऑक्सीजन की कमी हो रही है। इससे जलीय जीवों का जीवन चक्र प्रभावित हो रहा है। इन्हीं झीलों के पानी को पीने के लिए उपयोग में लिया जाता है। झीलों को प्रदूषण मुक्त करवाने की आवश्यकता है।
बाबुल सरकार ने बताया कि पूरे शहर में सीवर सिस्टम फैल है। पुराने शहर के साथ ही उपनगरीय क्षेत्रों में भी सीवरेज जाम होने और गंदा पानी सड़कों पर बहने की समस्या व्याप्त है। सरकारी एजेंसियां इसका दोषारोपण एक-दूसरे पर करती है और काम नहीं किया जाता। इससे आम लोग परेशान हो रहे हैं।

विपुल साहू ने बताया कि शहर में डस्टबिन की कमी खलती है। जब से कंटेनर और डस्टबिन हटाए गए हैं। कचरा इधर से उधर उड़ता हुआ दिखाई देता है। हर मोहल्ले में लोगाें खाली जगहों पर स्वघोषित कचरा पात्र बना दिए हैं। नगर निगम और यूआईटी को कचरा संग्रहण की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए।