
garbage_free_city
मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. झीलों की नगरी को गार्बेज फ्री सिटी का थ्री स्टार तमगा नहीं मिला है। केन्द्र सरकार की ओर से घोषित परिणाम में उदयपुर के अलावा प्रदेश के किसी भी शहर का नाम नहीं है। उदयपुर ने थ्री स्टार के लिए आवेदन किया था लेकिन वह नहीं मिला। इसका सीधा नुकसान स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 की रैंकिंग पर होगा। जानकारों के अनुसार उसमें उदयपुर के सीधे 600 नंबर कम हो जाएंगे। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की ओर से जारी परिणाम में उदयपुर का नाम ही नहीं था। वैसे तो प्रदेश का ही नाम नहीं था लेकिन उदयपुर का नाम नहीं होने से नगर निगम को बड़ा झटका लगा है। उदयपुर ने थ्री स्टार के लिए आवेदन किया था, पूरा जोर था कि थ्री स्टार मिल जाएगा तो स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में उदयपुर का परिणाम बेहतर रहेगा लेकिन उदयपुर का नाम ही नहीं आया।
समझे क्यों नहीं नाम आया उदयपुर का
1. अनिवार्य कार्य श्रेणी : इसमें डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सेग्रीगेशन, स्वीपिंग, लीटरबिन व स्टोरेज बिन शामिल था।
- उदयपुर यहां पिछड़ा : नगर निगम के वार्ड 7 की स्वीपिंग का डेटा ही सर्वेक्षण एजेंसी को नहीं मिला
2. वांछित कार्य : सस्टेनेबिलिटी, गीले कचरे का मौके पर निपटान, सीएंडडी स्टोरेज, सेग्रीगेशन, प्रोसेसिंग, सीएंडडी यूज, डंप साइट रिमिडिएशन
- उदयपुर यहां पिछड़ा : सीएनडी वेस्ट में सेग्रीगेशन नहीं हो रहा है और न हीं प्रोसेसिंग हो रहा।
3. आवश्यक कार्य : बल्क वेस्ट जनरेटर, जुर्माना, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक प्रतिबंंध आदि
- उदयपुर यहां पिछड़ा : बताते है कि उदयपुर में वार्ड वाइज जुर्माना राशि नहीं वसूली जाती इसलिए शून्य मिला। निगम का तर्क है कि यहां तो जुर्माना निगम के स्तर पर कटता है, वार्ड वाइज चिन्ह्ति नहीं करते।
इनका कहना है...
थ्री स्टार के लिए हमने आवेदन किया लेकिन वह हमे नहीं मिला अफसोस है। इसकी पूरी समीक्षा करेंगे। जो कमियां रही होगी उनको ठीक करेंगे। प्रयास रहेगा कि हम सभी श्रेणियों में अच्छा काम करेंगे।
- अंकित कुमार सिंह, आयुक्त नगर निगम
Published on:
21 May 2020 11:54 am

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