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 उदयपुर की पौषी सिंघवी और हिमांशी झंवर ने देश-विदेश में मचाई धूम, किया उदयपुर का नाम रोशन

लेकसिटी की पौषी सिंघवी ने मिस फेशनिस्टा का खिताब जीता व कथक नृत्यांगना हिमांशी ने विदेश में मचाई धूम। 

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Udaipur pride: Poushy Singhvi and himanshi jhanwar udaipur

उदयपुर. मुम्बई के सेंट एंड्यूज ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित मिस्टर एवं मिस फेशनिस्टा-2017 प्रतियोगिता में लेकसिटी की पौषी सिंघवी ने मिस फेशनिस्टा का खिताब जीता। देशभर से 300 प्रतिभागियों में से 30 प्रतिभागियों के ग्रैण्ड फिनाले में दीपक चतुर्वेदी के निर्देशन और आरके कास्टिंग से सलेक्शन द्वारा शहर की युवा प्रतिभा को यह गौरव हासिल हुआ।


कथक नृत्यांगना हिमांशी ने विदेश में मचाई धूम

उदयपुर. शहर की उभरती कथक नृत्यांगना हिमांशी झंवर ने स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख और आल्टन शहरों में अपने मनमोहक एवं उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद एवं बृहन महाराष्ट्र मंडल स्विट्जरलैंड के संयुक्त तत्वावधान में 2 से 7 सितंबर तक आयोजित सांस्कृतिक विरासत प्रस्तुतिकरण के तहत हिमांशी ने पुणे के प्रख्यात कथक गुरु मंजरी कारूलकर निर्देशन मे एकल, युगल एवं सामूहिक नृत्यों में लयबद्ध तत्कार और नयनाभिराम चकरियों का नायाब प्रदर्शन कर परदेस में भारतीय शैली की धाक जमाई। गौरतलब है कि हिमांशी इससे पूर्व दुबई में सम्पन्न हुए कथक ओलम्पियाड की चैम्पियंस ट्रॉफी की उपविजेता रह चुकी हैं।

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उदयपुर . रंगमंच जीवन के यथार्थ की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है, किन्तु लोक से अलग होकर कोई रंगमंच सफल नहीं हो सकता। नाटक जब आमजन से जुड़े सरोकारों को अभिव्यक्त करता है तभी वह सार्थक होता है।

यह विचार प्रो. एस एन जोशी ने माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की ओर से आयोजित परिचर्चा में अभिव्यक्त किए। राजस्थान विद्यापीठ, मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय और बीएन विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘थियेटर : द एजेज बिफोर द कर्टन राइजेज’ विषयक परिचर्चा में रविवार को चालीस से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

प्रसिद्ध रंगकर्मी मोहिंदर सिंह पुरी ने विश्व रंगमंच की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते कहा कि जीवन के हर क्षेत्र से रंगमंच जुड़ा है, वहीं शायर और निर्देशक खुर्शीद नवाब ने बताया कि रंगमंच जीवन ऐसी शैली है जिससे जुडकऱ इंसान का व्यक्तित्व ही बदल जाता है। इस मौके पर गुल भाटिया, प्रो. मलय पानेरी, प्राचार्य प्रो. सुमन पामेचा और प्रो. हेमेन्द्र चंडालिया ने भी लोक रंगमंच की व्याख्या की।