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बबूल के ‘कांटो से यहां का ग्रामीण परेशान, जिम्मेदार बेचे बैठे हैं ‘ईमान

udaipur road network हादसे को आमंत्रण देता सड़क किनारे खड़ा बबूल वृक्ष

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बबूल के 'कांटो से यहां का ग्रामीण परेशान, जिम्मेदार बेचे बैठे हैं 'ईमान

बबूल के 'कांटो से यहां का ग्रामीण परेशान, जिम्मेदार बेचे बैठे हैं 'ईमान

उदयपुर/ कानोड़. udaipur road network भींडर-कानोड़ मार्ग पर पीपलीखेड़ा चौराहे के समीप सड़क की ओर झुके हुआ बबूल वृक्ष अनहोनी का अंदेशा दे रहा है। तेज हवाओं के बीच सूखे बबूल की शाखा के सड़क पर गिरने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। राहगीर से लेकर वाहन सवार अधिकांश मौकों पर ईश्वर से बबूल के नहीं गिरने की मनोकामना कर निकलते हैं, लेकिन लोगों की इस चिंता को लेकर लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं। शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी भविष्य में होने वाली अनहोनी को लेकर अनजान बने हुए हैं। ऐसे में वाहन सवारों के साथ कभी भी हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इससे पहले हो चुके हादसों से भी विभागीय जिम्मेदार सबक नहीं लेना चाहते। ऐसे में समस्या से ग्रामीणों की भोहें तनी हुई है।
अतिवृष्टि की बरसात के दौरान भी हवाओं के तेज झोंकों के बीच यहां सड़क किनारे बबूल के पेड़ गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं। बता दें कि पूर्व में कानोड़ से लूणदा सड़क मार्ग पर सूखे बबूल के गिरने से बाइक सवार युवक कल्याणसिंह चौहान जिंदगी से हाथ गवां बैठा था। किस्मत ही थी कि घटना में युवक के साथ मौजूद उसके नौनिहालों की जिंदगी बच गई थी। तब लोगों के विरोध के बीच लोक निर्माण विभाग ने हलचल दिखाते हुए सड़क किनारे खड़े बबूल वृक्षों की छंगाई की जिम्मेदारी पूरी की थी। इधर, स्थानीय ग्रामीणों एवं वाहन सवारों ने विभागीय ढिलाई पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार महकमे से समय से पहले इस तरह के वृक्षों की छंगाई की गुहार लगाई है।
पुलिया को लेकर अब तक 'बेसुध
गींगला पसं. अतिवृष्टि की बरसात में क्षतिग्रस्त हुई क्षेत्र की कांट-छापपर मार्ग की पुलिया की अनदेखी दुर्घटनाओं को जन्म दे रही है। समस्या को लेकर स्थानीय क्षेत्रवासी खासे परेशान हैं। दूसरी ओर पुलिया मरम्मत को लेकर विभागीय ओहदेदारों ने चुप्पी साध रखी है। बता दें कि मानसून के दौरान खैराटी नदी में तेज पानी के बहाव के बीच पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके ऊपर का समतल हिस्सा पानी में बह गया था। तब मार्ग पर आवागमन भी बाधित रहा था। udaipur road network इसके बाद विभाग को अतिवृष्टि के लिए आपदा प्रबंधन से आवश्यक मद भी मिल चुका है, लेकिन विभाग स्तर पर लोगों की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाया जा रहा है।