
जयकारों की गूंज के साथ संतों का हुआ चातुर्मास प्रवेश
उदयपुर. प्रवर्तक सुकनमुनि, उपप्रवर्तक अमृत मुनि, युवा प्रणेता महेश मुनि, बालयोगी अखिलेश मुनि, डॉ. वरुण मुनि का चातुर्मास के लिए बुधवार को पंचायती नोहरे में मंगल प्रवेश हुआ। सुबह साढ़े सात बजे अशोक नगर स्थित नाकोड़ा ज्योतिष कार्यालय से प्रवेश यात्रा रवाना हुई। इस दौरान मार्ग में मुनियों के जयकारें गूंजे और जगह-जगह संतों का स्वागत किया गया।
यात्रा देहलीगेट, धानमण्डी, मार्शल चौराहा, मुखर्जी चौक होते हुए सुबह 9 बजे पंचायती नोहरे में पहुंची। यहां धर्मसभा हुई। धर्मसभा में प्रवर्तक सुकन मुनि ने कहा कि चातुर्मास आत्म उल्लास का अवसर है। पांच माह के दौरान साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकायें भगवान महावीर की वाणी को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेंगे। इस दौरान संस्कार शिविर, आत्मोत्थान शिविर, ज्ञान शिविर के माध्यम से कर्मनिर्जरा के विशाल स्तर पर विविध आयोजन किये जाएंगे।उप प्रवर्तक अमृत मुनि ने कहा कि महाराणा प्रताप की धरती पर शौर्य का अद्वितीय प्रताप है, वहीं भामाशाह के देशप्रेम का अविरल त्याग, इस मेवाड़ की धरती के कण-कण में व्याप्त है। चातुर्मास में उदयपुर की जनता को सद्मार्ग पर जीने की प्रेरणा देने के लिये मारवाड़ से हम यहां आए हैं।
युवा प्रणेता महेश मुनि, बालयोगी अखिलेश मुनि, डॉ. वरुण मुनि ने कहा कि अहिंसा धर्म की पालना के लिए केवल जैन धर्म में ही नहीं अन्य सभी धर्म परम्पराओं में संत महात्माओं को चार महीने तक एक स्थान पर रहकर धर्म आराधना करने का विधान है।इस अवसर पर संघ अध्यक्ष सुरेश नागौरी, महामंत्री एडवोकेट रोशनलाल नागौरी, नन्दलाल सेठिया, कान्तिलाल जैन, मांगीलाल लुणावत आदि मौजूद थे। रजनी डांगी ने प्रवचन स्थल के दरबार हाल का लोकार्पण एवं डॉ. लक्ष्मीलाल वीरवाल ने ध्वजारोहण किया।
प्रारम्भ में श्राविका संघ के गीतिका प्रस्तुत की। आगन्तुक अतिथियों का संघ की ओर से स्वागत किया गया। साध्वी डॉ. हर्ष प्रभा, साध्वी मनीषाश्री, साध्वी पूर्वाश्री ने मुनि की अगवानी करते हुए ऐतिहासिक चातुर्मास के प्रवेश की अनुमोदना की।----------
माता-पिता की सेवा के लिये बचपन में ली दीक्षा
35 वर्ष पूर्व मेरे प्रवचन की श्रृंखला की शुरुआत उदयपुर से हुई
फोटो :उदयपुर. राष्ट्रसंत ललितप्रभ महाराज ने कहा कि अहिंसा परमो धर्म में सभी धर्मों का सार समाहित है। जिसके जीवन में अहिंसा है उसके जीवन में सर्वधर्म है। जीवन में हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। हमारी सोच सकारात्मक होगी तो जीवन के हर कार्य सफल होंगे।
वे आज अशोकनगर स्थित लोकाशाह स्थानक में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राष्ट्रसंत चंद्रप्रभ भी विराजमान थे। संत ललितप्रभ ने कहा कि उदयपुर से मेरा 35 वर्ष पुराना नाता रहा है, क्योंकि यहीं से मैंने प्रवचन देने की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि आज से 12 साल पूर्व उदयपुर में हमारा चातुर्मास हुआ था। इस दौरान उदयपुर नगर से जो प्रेम हमें मिला वही प्रेम ठीक 12 साल बाद पुनः हमें यहा खींच लाया है। इन पांच माह के दौरान पूरे शहर में प्रेम, सत्य अहिंसा का संदेश फैलाएंगे।
इस बार का लोक कल्याणकारी चातुर्मास 5 माह का होगा। 5 माह में 54 दिनों का प्रवचनकाल रहेगा जो नियमित रूप से टाउन हॉल प्रांगण में चलेगा। 54 दिनों के बाद हम सर्वधर्म समभाव को लेकर शहर के अलग-अलग कॉलोनियों शिक्षण संस्थान और अलग-अलग स्थानों पर जाकर जीवन जीने की कला बताएंगे। संत ने कहा कि प्रवचन का प्रथम सप्ताह जीवन निर्माण पर केंद्रित सप्ताह होगा। उन्होंने कहा कि हमें सबको समान समझना चाहिए। अलग-अलग धर्म और पंथों में उलझने के बजाय हम एक ही मानव धर्म को अपनाएंगे तो सभी का कल्याण होगा।
माता-पिता के साथ उन्होंने ली संन्यास की दीक्षाउन्होंने कहा कि यह जीवन राज आज आपके समक्ष खोलता हूं कि हमारे माता-पिता के मन में अचानक वैराग्य की उत्पत्ति हुई। उन्होंने अचानक दीक्षा लेने का निर्णय ले लिया। हम पांच भाइयों में से तीन बड़े भाइयों की शादियां हो चुकी थी और हम दो भाई बचे थे। माता-पिता के वैराग्य के भाव प्रकट करते ही ललितप्रभ ने भी दीक्षा लेने का मन बना लिया। उन्होंन कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मेरे बडे़ भाई राष्ट्रसंत चन्द्रप्रभ ने सर्व समाज का कल्याण करने के उद्देश्य से हम तीनों के साथ दीक्षा ली।
इस अवसर पर चातुर्मास संयोजक हंसराज चौधरी, सह संयोजक अनिल नाहर, हरिसह लोढ़ा, अनिल कोठारी, कालूलाल जैन सहित अनेक समाजजन मौजूद थे।
Published on:
29 Jun 2023 10:06 pm
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