
Watch : गुजरात बह जाता है 3,800 एमसीएफटी पानी, इससे भर सकते हैं 9 फतहसागर
Udaipur Water Crisis : Mansi-Wakal Project धीरेन्द्र् कुमार जोशी/ उदयपुर . झीलों की नगरी में पानी लगातार कम ( Water Crisis ) होता जा रहा है। हम पानी होते हुए भी उसे सहेज नहीं पा रहे हैं। इन्द्र देवता जो पानी हमारी धरा पर बरसाता है, वह बहकर समीपवर्ती राज्य गुजरात चला जाता है। राज्य सरकार ने योजनाएं ( Project ) तो बनाई लेकिन वे कागजों से निकल कर धरातल पर नहीं दिख रही है। राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में योजनाएं पूरी नहीं हो पा रह है। वेपकॉस ने अपनी रिपोर्ट में माना कि प्रतिवर्ष करीब 3800 एमसीएफटी पानी बांध बनाकर सहेज सकते है। अभी ये पानी व्यर्थ ही बहकर गुजरात चला जाता है जिससे उदयपुर के करीब 9 फतहसागर भर सकते हैं।
करीब 37 वर्ष पहले उदयपुर में पेयजल की समस्या खड़ी होने लगी थी जिसे 1982 में ही भांप लिया गया था तब तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. मोहनलाल सुखाडिय़ा ने मानसी वाकल ( Mansi-Wakal Projec ) की विभिन्न योजनाएं रखी। इसके तहत बांध बनाए जाने थे। वर्ष 1987 में वेपकॉस को सर्वे सौंपा गया जिसकी रिपोर्ट 1990 में तैयार हुई। तब तीन बांध बनाने पर विचार किया गया। बाद में प्रथम चरण का गोराणा बांध बनाया गया जिससे आज भी उदयपुर को पेयजल सप्लाई हो रहा है लेकिन बिरोठी और लंगोटिया भाटा का बांध अधरझूल है। इस बीच, उदयपुर शहर का विस्तार और आबादी तो बढ़ी लेकिन पानी के लिए बांध नहीं बनाए गए।
वेपकॉस की रिपोर्ट के अनुसार उदयपुर जिले के कोटड़ा क्षेत्र में साबरमती बेसिन के आसपास से करीब 3,800 एमसीएफटी से अधिक पानी बहकर गुजरात चला जाता है। वेपकॉस ने कहा कि देवास तृतीय के तहत बिरोठी में 2550 एमसीएफटी से अधिक तथा देवास चतुर्थ के तहत वाकल नदी पर खांचन पुलिया के निकट 1250 एमसीएफटी से अधिक पानी के संचय के लिए बांध बनाना जाए जिससे वहां 3,800 एमसीएफटी से अधिक पानी गुजरात जाने से रोका जा सकेगा।
...
वेपकॉस ने माना सर्वाधिक उपर्युक्त
मानसी वाकल के बांधों को लेकर एजेंसी वेपकॉस के सर्वे में इन्हें मेवाड़ के लिए सर्वाधिक उपर्युक्त माना। योजना में एक ही कमी है कि इसका पानी लिफ्ट कर शहर तक पहुंचाना होगा। यह उल्लेखनीय है कि अभी भी मानसी वाकल का पानी लिफ्ट करके ही लाया जा रहा है तो इन दोनों बांधों का पानी भी लिफ्ट करके लाया जा सकता है।
---
ऐसे समझे पूरी योजनाओं को
1. मेवाड़ के लिए बहुउपयोग मानसी वाकल की चार योजनाओं में से प्रथम चरण गोराणा बांध बनाया गया। यह बांध भी वर्ष-2001 की मांग को देखते हुए तैयार किया गया था। 1060 एमसीएफटी के इस बांध का 862 एमसीएफटी पानी पेयजल के रूप में उपयोग में लिया जा रहा है।
2. मानसी वाकल तृतीय योजना का बांध वर्ष-2021 की मांग को देखते हुए प्रस्तावित था। यह बांध बिरोठी के पास बनाया जाना था। इस बांध में 2566 एमसीएफटी क्षमता का बनाया जाना था लेकिन ये अब तक तैयार नहीं हो सका है क्योंकि सर्वे होने के बाद बजट नहीं दिया गया। इस बांध में एक बाधा यह भी है कि कुछ मामूली आबादी क्षेत्र बांध के डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। ऐसे में वोट बैंक के चलते जनप्रतिनिधि हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
3. मानसी वाकल चतुर्थ चरण के बांध को लेकर भी सर्वे हुआ था। इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह वन क्षेत्र में आता है, परन्तु इसकी एनओसी वन विभाग से ली जा सकती है। यहां भी मेवाड़ के नेताओं की इच्छाशक्ति व उनके बौने नेतृत्व का अभाव साफ दिखने को मिला। यह बांध खांचन पुलिया के पास बनाया जाना था। इस बांध में 1223 एमसीएफटी पानी उपलब्ध हो सकता है। इसका पानी 66 किलोमीटर की टनल से गे्रविटी से जयसमंद झील में पहुंचाया जा सकता है लेकिन इसका काम तो दूर योजना को मूर्त रूप देने के लिए बजट का प्रावधान ही नहीं किया।
...
एक्सपर्ट व्यू...
पेयजल की आवश्यकता मानसी वाकल तृतीय और चतुर्थ योजना से पूरी की जा सकती है। इस योजना को मानसी वाकल प्रथम योजना से जोड़ते हुए उदयपुर पानी लाना कम खर्चीला होगा। जयसमंद ले जाकर वहां से पंप करने के बजाय मानसी वाकल प्रथम में डालकर पंप करना मूल लागत और चालन व्यय दोनों में कम खर्चीली होगी।
- जीपी सोनी, पूर्व अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
..
साबरमती बेसिन का पानी उदयपुर के लिए ही उपयोग में आए, इसका पूरा प्रयास किया जाएगा, हम प्रयास कर रहे है लेकिन जरूरत है कि प्रदेश सरकार भी बिना किसी भेदभाव के इस प्रोजेक्ट को साकार करने में सहयोग करें।
- धर्मनारायण जोशी, विधायक मावली
Published on:
23 Aug 2019 01:11 pm
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
