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Watch : लोग पट्टे दिखाकर मांग रहे पानी

- 20 वर्ष पुरानी कॉलोनियों में आज तक नहीं पहुंचा पानी- विकास शुल्क लेने में आगे, सुविधा देने में पीछे यूआईटी  

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Watch : लोग पट्टे दिखाकर मांग रहे पानी

Watch : लोग पट्टे दिखाकर मांग रहे पानी

Udaipur Water Problem : Colony Wise crisis धीरेंद्र् कुमार जोशी/उदयपुर. शहर का विकास हुआ तो कई कॉलानियां भी बसीं, लेकिन इन कॉलोनियों में विकास के नाम पर कुछ खास नहीं हो पाया। कुछ कॉलोनियों को बसे 20 वर्ष से अधिक समय होने के बावजूद इनमें अब तक पेयजल ( Drinking Water ) व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है, जबकि विकास शुल्क के नाम पर भारी-भरकम राशि यूआईटी वसूलती है। बार-बार गुहार लगाने के बाद कोरे आश्वासन ही मिल रहे हैं। ऐसे में लोग पसोपेश मेंं है कि वे क्या करे।

लगाई गुहार पर सुनवाई नहीं
शहर का विस्तार धोल की पाटी से डबोक, बलीचा से चीरवा, सीसारमा से भीलों का बेदला तक हो चुका है। आसपास के कई गांवों में कॉलोनियां बन गई है। इन कॉलोनियों को यूआईटी ने पट्टे जारी किए। विकास की जिम्मेदारी भी यूआईटी की है। मूलभूत सुविधाओं के नाम पर अधिकांश कॉलोनियों में मात्र सडक़ बनाकर इतिश्री कर ली गई। रोड लाइट, नाली, सीवरेज से भी जरूरी पानी की मांग को लेकर लोग कई बार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं होने से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।

यहां होता है गोलमाल
नियमानुसार किसी भी कॉलोनी को बसाने से पूर्व डवलपर को वहां मूलभूत सुविधाएं विकसित करनी होती है, लेकिन ऊपरी तौर पर सडक़, स्ट्रीट लाइट आदि दिखाने के बाद अनुमति ले ली जाती है। इसके बाद यहां बसने वाले लोगों को परेशानी ( Problem ) होती है

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एक्सपर्ट व्यू...
यूआईटी गंभीर नहीं तो निजी सेक्टर की क्या बात करें

किसी भी कॉलोनी के विकास से पूर्व उसकी आधारभूत सुविधाओं की आरक्षित दर तय होती है। यूआईटी की बात करें तो शहर में कई पुरानी कॉलोनियां ऐसी है, जिनकी आधारभूत सुविधाओं की राशि अन्य जगह खर्च कर दी गई। अब इन कॉलोनियों में सुविधाओं से लोग वंचित है। मूलभूत सुविधाओं में सडक़, पानी, बिजली आदि शामिल है। यूआईटी के ये हाल है तो निजी क्षेत्र के डवलपर की बात क्या करें।
- बीएस कानावत, सेवानिवृत्त वरिष्ठ नगर नियोजक

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फ्लोराइड की मात्रा काफी अधिक

यहां भू-जल में फ्लोराइड की मात्रा काफी अधिक है। पीना तो दूर कपड़े धोना और नहाना आदि इस पानी से नहीं हो सकता। सडक़ को लेकर भी कॉलोनीवासियों ने संघर्ष किया। उम्मीद है यह समस्या जल्द ही हल होगी। पेयजल लाइन डालने के साथ ही पानी की समस्या का हल हो जाए तो सुकून से जी पाए।
- नरेश सोनी, गोवर्धन विलास टेक्नो मोटर के सामने

विकास का अता-पता नहीं
मैने यहां वर्ष 2012 में घर बनाया था। यूआईटी को कई बार समस्याओं के निस्तारण के लिए लिखा, लेकिन इसका समाधान नहीं निकाला जा रहा है। यहां सीवरेज, रोडलाइट और सडक़ तक नहीं है। कुछ समय पूर्व सडक़ के लिए सर्वे हुआ। पाइप लाइन की सख्त आवश्यकता है। भूजल अच्छा नहीं है। इससे काफी परेशानियां होती है। विकास शुल्क तो पहले ही ले लिया गया था, लेकिन अब तक दूर-दूर तक विकास नजर नहीं आ रहा है।

- राजीव यादव, गोवर्धन विलास टेक्नो मोटर के सामने

20 साल से मांग रहे पानी

नाकोड़ा नगर प्रथम को बसे करीब 20 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक यहां पेयजल की लाइने नहीं डाली गई है। पेयजल लाइनों के लिए कई बार यूआईटी को लिखकर दिया। पानी की समस्या से लोग खासे परेशान हैं।
- गुलाबसिंह सिसोदिया

सबसे बड़ी मांग पेयजल
मुझे नाकोड़ा नगर द्वितीय में रहते हुए पंद्रह वर्ष हो चुके हैं। यहां भूजल का स्तर काफी नीचे है। ऐसे में लोगों को टैंकर के भरोसे रहना पड़ता है। कॉलोनी की सबसे बड़ी मांग पेयजल सुविधा है।

- निर्मल कुमार टांक

सडक़ के अलावा कुछ नहीं

नाकोड़ा नगर द्वितीय में रहता हूं। यूआईटी ने मूलभूत सुविधा के नाम पर कॉलोनी में सडक़ के अलावा कुछ नहीं दिया। पेयजल समस्या से भी लोग जूझ रहे हैं।
-हरिश चंद्र जोशी

विधानसभा में उठा था मुद्दा
22 वर्ष से नाकोड़ा नगर में रह रहा हूं। विकास शुल्क के नाम पर भारी रकम वसूली गई, लेकिन विकास के नाम पर अब तक ज्यादा कुछ नहीं हुआ है। पेयजल को लेकर लोगों के साथ ही ग्रामीण विधायक विधानसभा तक मांग उठा चुके हैं, लेकिन अब तक राहत नहीं मिल पाई है।

- महेश व्यास

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आठ साल से तरस रहे हम

हमारी कॉलोनी गत 8 साल से बसी हुई है। इस कॉलोनी में सीवरेज और रोड लाइट है पर सडक़ नहीं है। आसपास की कॉलोनियों में पाइप-लाइन है, लेकिन हमारे यहां नहीं है। करीब एक वर्ष पूर्व पानी को लेकर लोगों ने रोष जताया तो जलदाय विभाग ने एस्टिमेट निकाला, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- रमेश चंद्र सोनी, श्री हरिविहार कॉलोनी, रामपुरा चौराहा

कनवर्टेड कॉलोनियों में सुविधाएं
जो कॉलोनियां कनवर्टेड है, उनमें यूआईटी सुविधाएं दे रही है। जुलाई की ट्रस्ट बैठक में भी हमने 16 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। सडक़, लाइट, ड्रेनेज आदि की सुविधा हम करते हैं। पेयजल व्यवस्था जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग करता है। हमने पहले पैसे दिए हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर कॉलोनी में हम ही राशि दे। आधारभूत सुविधाओं के लिए निर्धारित आरक्षित राशि में सभी सुविधाएं नहीं आ पाती। फिर भी यूआईटी जो कर पा रही है कर ही रही है।

- बालमुकुंद आसावा, यूआईटी सचिव।

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पेयजल सुविधा के लिए जहां-जहां यूआईटी राशि दे रही है। हम पाइप-लाइन, फिल्टर प्लांट आदि डाल रहे हैं। जब कॉलोनी का एप्रूव होता है तो इसकी राशि भी यूआईटी लेती है। हमारे पास पैसा आने पर ही काम कर सकते हैं।

- सोहनलाल सालवी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता जलदाय विभाग।