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उदयपुर रखेगा 29 देशों के मद्दों की नींव

- लेकसिटी बनेगी इस महान इवेंट की साक्षी - जी- 20 का शेरपा सम्मेलन हमारा गौरव

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उदयपुर रखेगा 29 देशों के मद्दों की नींव

उदयपुर रखेगा 29 देशों के मद्दों की नींव

जी-20 सम्मेलन लेकसिटी के लिए एक महान अनुभव रहेगा। खास बात ये है कि शेरपा सम्मेलन में जो ड्राफ्ट तैयार होगा, वह सभी 29 देशों के लिए महत्वपूर्ण होगा। जी- 20 की अध्यक्षता मिलने के बाद यह पहला सम्मेलन होगा। यहां जो ड्राफ्ट तैयार होगा, वह वित्त मंत्रियों के स्तर का जो सम्मेलन आयोजित होगा उसमें रखा जाएगा, इसके बाद शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें सभी जी-20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे। ये उदयपुर के लिए इसलिए बेहतर होगा कि विश्व के ये सभी 29 शक्तिशाली देशों के पास जो दस्तावेज पहुंचेगा, उसमें उदयपुर का हवाला होगा, इतना ही नहीं बल्कि हमारे यहां से जिस आर्थिक व अन्य मुद्दों की नींव रखी जाएगी वह पूरी दुनिया की दिशा तय करेगी।

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सबसे पहले गर्वनर्स की बैठक:

साल 1999 में पहली बार एशिया में आए वित्तीय संकट के बाद वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक के गवर्नरों की बैठक के तौर पर जी-20 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई थी। साल 2008 में जी-20 के नेताओं का पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। समूह ने वैश्विक वित्तीय संकट का जवाब देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. यह एक ऐसा समूह जिसमें 19 देश हैं और 20वां यूरोपीय संघ है। सभी मिलाकर 29 देश इसमें शामिल हैं। साल में एक बार जी-20 शिखर सम्मेलन आयोजित होता है. जिसमें जिसमें राष्ट्र प्रमुखों के साथ उन देशों के केंद्रीय बैंक के गवर्नर भी शामिल होते हैं. सम्मेलन में मुख्य रूप से आर्थिक मामलों पर चर्चा होती है.

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जी-20 को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के समूह जी-7 के विस्तार के रूप में देखा जाता है. जी-7 में फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा शामिल हैं. साल 1998 में इसमें रूस में भी जुड़ा और यह जी-7 से जी-8 बन गया. हालांकि, यूक्रेन के क्रीमिया इलाके को अपने साथ मिलाने के कारण रूस को 2014 में इस समूह से अलग कर दिया गया. इसकी वजह से यह एक बार फिर से जी-7 बन गया।

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इसलिए हमारे लिए अहम..

इस बार का शिखर सम्मेलन में कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव, भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं, मुक्त व्यापार, आर्थिक विकास, वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा एवं पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित रहेगा. इसमें भारत आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग, वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर सभी देशों को एकजुट करने की कोशिश करेगा.

जी-20 समूह की पहली बैठक

जर्मनी के कोलोन में साल 1999 में जी-8 देशों की बैठक हुई थी, जिसमें एशिया के आर्थिक संकट पर चर्चा हुई थी. इसके बाद ही दुनिया के बीस शक्तिशाली अर्थव्यवस्था वाले देशों को एक मंच पर लाने का फैसला हुआ और दिसंबर 1999 में बर्लिन में पहली बार जी-20 समूह के लिए बैठक हुई. जी-20 वित्तीय स्थिरता बोर्ड, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन, संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन के साथ मिलकर काम करता है।