
उदयपुर। सरकारी अस्पताल में अपने बेटे का इलाज के दौरान लापरवाही का आलम अपनी आंखों से देखा तब बेटे ही नहीं दूसरे मरीजों की पीड़ा ने दिल को झकझोर दिया। उसी दिन ठाना, सिस्टम ठीक करने के लिए राजनीति में आना जरूरी है।
सरकारी नौकरी छोड़ राजनीति में जाने का मन बनाया। यह है उदयपुर के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की सविता परमार। इनके पिता रूपलाल परमार वर्ष 1980 में खेरवाड़ा के विधायक रह चुके हैं। लेकिन तब सविता की राजनीति में आने की इच्छा नहीं थी। सविता का दस साल का बेटा बीमार हुआ तो उदयपुर के एमबी चिकित्सालय लेकर गई।
बेटे को उपचार ढंग से नहीं मिला, सार-संभाल नहीं हुई। डॉक्टर के घर भी गई पर राहत नहीं मिली। तत्काल अहमदाबाद की राह पकड़ी। जिस बस में सवार हुई उसमें और भी मरीज थे। अस्पताल व बस की तस्वीरें रह-रहकर सामने आ रही थी। सविता बताती है कि उसके बाद कई रात नींद नहीं आई बस एक ही ख्याल आता था कि बदलाव लाने के लिए अपने कदम आगे बढ़ाने होंगे।
बकौल सविता
राजस्थान पत्रिका के चेंजमेकर्स अभियान से जुडऩे पर उन्हें स्वच्छ राजनीति का संकल्प पसंद आया। आम व्यक्ति जब राजनीतिक में आएगा तो ही व्यवस्था में बदलाव सुनिश्चित होगा। आप पार्टी से उन्हें टिकट भी मिला है।
शिक्षा विभाग में द्वितीय श्रेणी शिक्षक के पद पर तैनात सविता ने पिछले लंबे समय से प्रतिनियुक्ति पर जनजाति छात्रावास में वार्डन के पद काम किया। सविता कहती है कि उन्होंने 1200 पौधे लगाए जो आज पेड़ बन गए है। 39 वर्षीय सविता कई सम्मान भी प्राप्त कर चुकी है, वे एमए, बीएड और बीए अतिरिक्त की शिक्षा प्राप्त है।
Published on:
02 Nov 2018 09:27 am
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