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UIT पैसे बंटोरने को तैयार, लेकिन जमीन पर निशान तक नहीं लगाया

UIT अम्बेरी योजना में आवेदन करने से पहले लोकेशन देखने वाले भूल भूलैया हो रहे, न तो सडक़ बनाई, न कोई संकेतक लगाए

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uit_udaipur

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Udaipur Amberi आवासीय योजना में आवेदन नहीं किया उससे पहले ही लोग इस लोकेशन को खोजने में भूल भूलैया हो गए है। UIT ने योजना लांच कर दी और पैसा बंटोरने में लग गई, लेकिन कोई साइट देखना चाहते तो अम्बेरी में घूमता ही फिरे लेकिन उसे इस योजना की लोकेशन नहीं मिलेगी। न तो वहां जाने की सडक़ है और न ही वहां कोई संकेतक है। इस योजना के आसपास निजी रूप से कटी प्लानिंग का प्रचार-प्रसार जोरों पर है, लेकिन सरकारी योजना वाली साइट मिलना तो मुश्किल ही है।
UIT ने इस योजना के लिए आवेदन लेने शुरू कर दिए है, लेकिन अधिकतर लोग आवेदन करने से पहले इस साइट पर गए, लेकिन उनको लोकेशन नहीं मिली। कई लोगों ने यूआइटी में पूछा लेकिन कोई उस साइट तक पहुंचाने में मदद नहीं कर सका। असल में यही कहा जाता है कि पुरोहितों के तालाब से पहले है, लेकिन वहां यह कैसे पता चले कि ये यूआइटी की योजना वाली साइट है। वहां जितने लोग गए, वे निराश ही लौटे है। योजना से जुड़ी विवरिणका में योजना को गूगल मेप के जरिए समझाया गया और उसके अनुसार भी कई लोगों ने वहां तक जाने का प्रयास किया, लेकिन वहां कोई संकेतक या लेंडमार्क नहीं है, ऐसे में निराश ही लौटना पड़ रहा है।

लोग बोले- जगह तो देखे कैसी है

विशाल शर्मा कहते हैं कि जैसे ही अम्बेरी योजना की जानकारी मिली और वहां गए तो जगह मिली ही नहीं। राहुल जैन कहते है कि परेशान हो गए और वहां आसपास लोगों को भी पूछा, लेकिन कोई बता नहीं पाया। एक महिला ने बताया कि विवरणिका के अनुसार वहां पहुंच तो गए, लेकिन वहां निजी योजनाएं दिखी यूआइटी वाली प्लानिंग मिली ही नहीं।

तालाब से पहले तो कई दूसरी प्लानिंगें
पुरोहितों के तालाब से पहले तो वहां कई दूसरी निजी प्लानिंगे कटी हुई है। इन स्थानों पर बड़े स्तर पर काम किया गया है। निजी प्लानिंग वालों ने भूखंड नंबर तक डाल कर सजा रखा है और यूआइटी की प्लानिंग तक जाए कैसे यह ही पता नहीं चलता है। वहां पहुंच जाए तो प्लानिंग में कौनसा भूखंड कहा है यह पता तक नहीं कर सकते है।

आवेदन 17 से शुरू किए
यूआइटी ने आवेदन 17 जनवरी से शुरू किए और अंतिम तिथि 16 फरवरी है। योजना कुल10,1900 हैक्टेयर क्षेत्र में है।