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उदयपुर

पीएम केयर फंड में मिले बेकार वेंटिलेटर्स की होगी ऑडिट, प्रधानमंत्री ने दिए आदेश

मुख्यमंत्री गहलोत ने ट्विट कर बताया सही दिशा में उठाया गया कदम
 
– राजस्थान पत्रिका ने लगातार उठाया मामला- उदयपुर को मिले थे 95 वेंटिलेटर, एक भी काम का नहीं
– राजसमन्द को मिले थे 12, केवल दो काम आए

उदयपुरMay 16, 2021 / 09:33 am

bhuvanesh pandya

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पीएम केयर फंड में मिले बेकार वेंटिलेटर्स की होगी ऑडिट, प्रधानमंत्री ने दिए आदेश,पीएम केयर फंड में मिले बेकार वेंटिलेटर्स की होगी ऑडिट, प्रधानमंत्री ने दिए आदेश

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. पीएम केयर फंड में देशभर के चिकित्सालयों में पहुंचे बेकार वेंटिलेटर्स की ऑडिट के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदेश जारी किए हैं। इसे लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के जरिए संदेश दिया है कि प्रधानमंत्री द्वारा पीएम केयर फंड से मिले वेंटिलेटर्स की ऑडिट करवाने का निर्णय सही दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने लिखा है कि इस बात की पूरी जांच होनी चाहिए कि किस प्रकार राज्यों को डिफेक्टिव वेंटिलेटर्स सप्लाई किए गए। राजस्थान पत्रिका ने उदयपुर को मिले 95 व राजसमन्द को मिले 12 बेकार वेंटिलेटर्स का मुद्दा समय-समय पर पुरजोर तरीके से उठाया है।
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राजस्थान पत्रिका ने ऐसे प्रकाशित किए समाचार और उजागर किया मामला:

राजस्थान पत्रिका उदयपुर संस्करण ने 6 अप्रेल के अंक में ‘उदयपुर को मिले 85 वेंटिलेटर इफेक्टिव नहीं, 28 अप्रेल को ‘पीएम केयर फंड से मिले 95 वेंटिलेटर बेकार, तड़प रहे मरीज और राजसमंद संस्करण ने 15 मई ‘राजसमन्द में लोग मर रहे यहां नए वेंटिलेटर हो रहे कबाड़ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर समय-समय पर मुद्दा उठाया है।
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मुख्यमंत्री ने एक के बाद एक कई ट्विट किए….
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पीएम केयर फं ड से मिले वेंटिलेटर्स की ऑडिट करवाने के निर्णय को सही दिशा में उठाया गया कदम बताते हुए, शनिवार शाम को एक के बाद एक कई ट्विट किए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत सरकार निष्पक्ष जांच करवाकर इस प्रकार के डिफेक्टिव वेंटिलेटर सप्लाई करने वाली कम्पनियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री गहलोत ने अन्य ट्विट में लिखा है कि मीडिया रिपोर्ट से पता लगा है कि भारत सरकार की कम्पनी एचएलएल लाइफ केयर लिमिटेड के माध्यम से लगभग 10 कम्पनियों से 59,000 वेंटिलेटर खरीदे गए, उसमें कई ऐसी कम्पनियां भी हैं, जिन्हें वेंटिलेटर बनाने का किसी प्रकार का अनुभव ही नहीं था। इसलिए कई राज्यों को डिफेक्टिव वेंटिलेटर वितरित हो गए। इस कारण डॉक्टर्स द्वारा मरीजों के जीवन के रिस्क की कीमत पर अधिकांश जगह इन वेंटिलेटर्स का उपयोग नहीं किया गया।
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सीएम ने की थी जांच की मांग

मुख्यमंत्री गहलोत ने गुरुवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से डिफेक्टिव वेंटिलेटर्स की खरीद की जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने उल्लेख किया कि इन डिफेक्टिव वेंटिलेटर्स से रोगियों की जान को खतरा हो सकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार भारत सरकार ने प्रदेश को पीएम केयर फं ड से 1900 वेंटिलेटर उपलब्ध करवाए थे। इन वेंटिलेटर्स के इंस्टॉलेशन और मेंटिनेंस की जिम्मेदारी भारत सरकार की थी। डॉक्टरों के मुताबिक इनमें से कई वेंटिलेटरों में तकनीकी कमियां हैं, जिनके कारण इन्हें इस्तेमाल करना रोगियों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र एवं गुजरात में भी इन वेंटिलेटरों में अलग-अलग समस्याएं मीडिया में रिपोर्ट की गईं हैं।
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प्रभारी मंत्री खाचरियावास ने भी कल की थी जांच की मांग
प्रदेश के परिवहन मंत्री व उदयपुर के जिला प्रभारी मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने शुक्रवार को एसएस ब्लॉक में मरीजों से मिलने के बाद कबाड़ में पड़े इन वेंटिलेटर्स को देखा था। पत्रिका की ओर से मुद्दा उठाने के बाद कई बार इस पर चिकित्सधिकारियों ने मंत्री के ध्यान में ये लाया गया था। इसे लेकर खाचरियावास ने भी इसकी जांच करवाने की मांग की थी।

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