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अब कभी नहीं चहकेगी चहक, देर रात 12:15 बजे फतहसागर किनारे पर मिला शव

फतहसागर झील के किनारे मंगलवार देर रात 12:15 बजे मेवाड़ दर्शन दीर्घा के सामने बंसियों के पास पानी में चार साल की चहक का शव तैरता दिखा। पास बैठे कुछ किशोरों ने शव को देखा और आसपास के लोगों को बताया। बाद में शव को एमबी हॉस्पिटल की आपातकालीन इकाई में लाए।

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Madhulika Singh

May 31, 2017

फतहसागर झील के किनारे मंगलवार देर रात 12:15 बजे मेवाड़ दर्शन दीर्घा के सामने बंसियों के पास पानी में चार साल की चहक का शव तैरता दिखा। पास बैठे कुछ किशोरों ने शव को देखा और आसपास के लोगों को बताया। बाद में शव को एमबी हॉस्पिटल की आपातकालीन इकाई में लाए। वहां चिकित्सकों ने देखा और उसके बाद शव मोर्चरी में ले गए।

प्रत्यक्षदर्शी मनोज साहू ने बताया कि बंसियों पर बैठे 18-20 साल के तीन किशोरों की नजर किनारे आए शव पर गई तो उन्होंने अंदर उतर शव को उठाया ओर पास ही जेटी पर नाव वाले को बताया। हाथीपोल पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। वे बच्चे भोईवाड़ा के बताए गए। इस बीच भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चहक के गले मे लाइफ जैकेट भी था।

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इससे पूर्व देर शाम तक चहक का शव नहीं मिलने से परिजनों का हाल बुरा था। जयपुर से नाते रिश्तेदार सभी यहां पहुंच चुके थे। हादसे के बाद से मां ने अब तक पलक नहीं झपकाई तो पिता निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। सिर में गहरी चोट लगने से वह अचेतावस्था में है। चहक को ढूंढऩे के लिए उसी समय से गोताखोर छोटू हेला, अहसान मोहम्मद, गनी मोहम्मद, नूर भाई की टीम उन्हें ढूंढने में जुटी रही है। रात 11 बजे तक अंधेरे में भी गोताखोरों ने खूब प्रयास किया लेकिन शव नहीं निकल पाया। मंगलवार सुबह 7.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक फिर से अभियान चलाया, इस दौरान काफी दूरी तक पानी की तह में जाकर शव की तलाशी ली गई लेकिन नहीं मिला।

दोपहर तीन बजे के बाद गोताखोरों ने फिर से अभियान चलाया जो देर शाम तक जारी था। गोताखोरों का कहना है कि झील के जिस छोर में हादसा हुआ, वहां पर अत्यधिक मात्रा में जलीय घास है। काफी मात्रा में घास को वे बाहर निकाल चुके हैं, लेकिन शव रात तक नहीं मिल पाया था।

गौरतलब है कि सोमवार शाम करीब 4.20 बजे हुए हादसे में स्पीड बोट में सवार जयपुर के सीकर रोड लोहामंडी निवासी चार वर्षीय चहक डूब गई थी। हादसे में उसके पिता विद्याधर सैनी, मां, दीपा सैनी, साथ रहे सुमित शर्मा, उसकी पत्नी वंदना शर्मा, पुत्र ऋषभ व चिराग के अलावा दूसरी नाव में सवार नीमच निवासी श्यामलाल पाटीदार, उसकी पत्नी गंगाबाई, पुत्री लक्ष्मी व वर्षा को चोटें आई थी। इनमें विद्याधर सैनी के सिर में चोट लगने से उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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नेवी की टीम पहुंची

चहक की तलाश को लेकर मंगलवार शाम को नेवी के दो सदस्यों की टीम पहुंची लेकिन वे रेस्क्यू नहीं कर सके क्योंकि वे बिना संसाधन के आए थे।

सेना बुलाने की उठी थी मांग

मौके पर कुछ लोगों ने एएसपी सुधीर जोशी को कहा कि बड़ी में ऐसे ही सेना का जवान डूब गया था, तब उसको निकालने के लिए जामनगर से सेना के जवान को बुलाया गया। ऐसे में बुधवार तक चहक नहीं मिलती तो सेना के जवान की मदद लेने के लिए प्रयास करने चाहिए। चहक को खोजने के लिए चार-चार रेस्क्यू बोट अलग-अलग दिशा में काम कर रही थी लेकिन देर शाम तक कोई सफलता नहीं मिली। चहक को खोजने के लिए गोताखोर छोटू हेला कई बार पानी में उतरे।

सीसीटीवी फुटेज लिए

निगम ने दोनों नाव संचालकों के वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज लिए। इनको देखा जाएगा और इसके साथ ही रिकार्ड और अनुबंध की शर्तों के तहत रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई की जाएगी। निगम ने दोनों ही फर्मों के सीज ऑफिस खोल दिए। निगम अंतिम जांच के बाद कार्रवाई करेगा।

सुबह खोले सीज टिकट कक्ष

सोमवार रात करीब साढ़े बारह बजे एम.एम. ट्रावेल्स और यश एम्यूजमेंट के टिकट काउंटर सीज करने के बाद नगर निगम की टीम मंगलवार सुबह वहां पहुंची। सीज खोलने के बाद दोनों के रिकार्ड खंगाले और नावों की संख्या को लेकर जानकारी जुटाई। महापौर चन्द्रसिंह कोठारी, उपायुक्त भोजकुमार के नेतृत्व में राजस्व व गैरेज की टीम ने वहां से जानकारी जुटाई। दोनों फर्म ने फिटनेस और बीमा के दस्तावेज निगम को उपलब्ध कराए। एम.एम.ट्रावेल्स पर ऑनलाइन टिकट देने की सुविधा होने से कम्प्यूटर का रिकार्ड अभी लेना बाकी है। निगम जांच कर रही है कि नाव संचालकों ने अनुबंध शर्तों की किस हद तक पालना की।

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