जयसमंद (सलूम्बर). जयसमंद अभयारण्य में शुक्रवार को लगी आग पर शनिवार को दिनभर काबू नहीं पाया जा सका। जिससे जंगल का करीब 250 हेक्टेयर क्षेत्र जलकर राख हो गया। हालांकि वन विभाग ग्रामीणों की मदद से देर शाम तक आग पर काबू पाने में लगा रहा। लेकिन तेज हवाओं से आग ने विकराल रूप ले लिया। शनिवार दोपहर तक आग ढिमडा फाटक के समीप वाली पहाड़ी तक पहुंच गई। वहीं, दूसरी ओर जयसमंद कस्बे के समीप वाली पहाड़ी तक आग पहुंच गई। ढिमडा बाग के अंदर वाली पहाड़ियां देर रात तक धधकती रही। रेंजर शांतिलाल मेघवाल के नेतृत्व में द्वितीय रेंजर दिनेशचंद्र मीणा मय स्टाफ, ईडीसी सदस्य व ग्रामीण दिनभर आग बुझाने में जुटे रहे। अधिकांश क्षेत्र में आग बुझाने में सफलता जरूर मिली लेकिन तेज हवा के कारण कुछ क्षेत्र में पूर्ण रूप से काबू नहीं पाया जा सका। देर शाम तक आग पर काबू पाने का सर्च अभियान जारी रहा।
ग्रामीणों ने बताया कि गनीमत रही कि आग पिलादर वाली पहाड़ी की दिशा में नहीं बढ़ी, नहीं तो आग घने जंगल में फैल जाती। इधर, शाम चार बजे जयसमंद झील किनारे गामड़ी के समीप स्थित पहाड़ी धधक उठी। जिससे स्टाफ व ग्रामीणों को दोनों तरफ दौड़ लगानी पड़ी। हालांकि गामड़ी क्षेत्र में लगी आग पर काबू पाया जा सका। लेकिन जयसमंद-उदयपुर स्टेट मेगा हाइवे से नजर आने वाली अभयारण्य की पहाड़ियां रात-भर सुलगती रही। वन विभाग के अनुसार आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण दमकल का उपयोग नहीं हो पाया। रातभर धधकती पहाड़ियां दूरदराज स्थित गांवों से नजर आई।