
video...उदयपुर में बनाएंगे वाटर स्पोर्ट्स सेंटर, झीलें साफ होंगी तो खेलों के विकास को मिलेगी गति: भट्ट
उदयपुर में वाटर स्पोर्ट्स सेंटर बनाएंगे, इससे ड्रेगन बोट व कयाकिंग केनोइंग जैसे खेलों का विकास होगा। झीलें साफ होंगी तो वाटर स्पोर्ट्स से जुडे् खेल व खिलाडि़यों को नई राह मिलेगी।यह बात संभागीय आयुक्त राजेन्द्र भट्ट ने कही। वे बुधवार को फतहसागर पाल पर ड्रेगन बोट ट्रायल के शुभारंभ पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। भट्ट ने कहा कि खेल संघों को दूरदर्शिता रखते हुए औद्योगिक घरानों का सहयोग लेकर कयाकिंग को उदयपुर का प्रमुख खेल बनाना है। उन्होंने झीलों की स्वच्छता की शपथ दिलाई। संघ के भागीरथी प्रयासों की प्रशंसा की। भट्ट ने एक माह का जिला स्तरीय मेवाड़ बोट फेस्टिवल शुरू कर पर्यटन को बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग का विश्वास दिलाया। मुख्य अतिथि विधायक प्रीति गजेंद्र सिंह शक्तावत थी। उन्होंने कहा कि उदयपुर में कयाकिंग खेल के विकास की अपार संभावनाएं हैं। हमारा सौभाग्य है कि उदयपुर को इतनी खूबसूरत झील प्रकृति से उपहार स्वरूप मिली है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाएं भी आयोजित की जा सकती है। संभागीय आयुक्त भट्ट व विधायक शक्तावत ने ड्रेगन बोट ड्रम बजा दो ड्रेगन बोट खिलाड़ियों को सौंपी। विशिष्ट अतिथि पर्यटन विभाग की सहायक निदेशक शिखा सक्सेना, राजस्थान तैराकी संघ के सचिव चन्द्रगुप्त सिंह चौहान, उपाध्यक्ष विनोद सनाढ्य, जिला खेल अधिकारी ललित सिंह झाला, शकील हुसैन, सदस्य जिला पर्यटन समिति नवल सिंह चूंडावत, वीरमदेव सिंह कृष्णावत, अजय अग्रवाल, पीयूष कच्छावा ने विचार व्यक्त किए।
भारतीय ड्रेगन बोट चेयरपर्सन दिलीप सिंह चौहान ने बताया कि आयोजन में खेल प्रेमी अजय अग्रवाल, कयाकिंग कोच निश्चय सिंह चौहान, अंतरराष्ट्रीय खिलाडी नेहा कुमावत, चित्रांगी दशोरा, भीम अवार्डी विजेंद्र सिंह, रविन्द्र, मनजीत सिंह, अभय सिंह, सत्यवान सिंह, सचिन कुमार, मंजू, अनील कुमार, रविन्द्र सिंह, प्रभजोत कौर काे सम्मानित किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष आरके धाभाई, उपाध्यक्ष किशन गायरी, सचिव महेश पिम्पलकर सहित कई गणमान्य मौजूद थे।
तेज बारिश ने डाला व्यवधान: ड्रेगन बोट्स में भरने लगा पानी तो दो बार रोकनी पड़ी चयन ट्रायल
सुहावने मौसम के बीच उदयपुर के फतहसागर में ड्रैगन बोट विश्व चैम्पियनशिप के लिए भारतीय टीम की चयन ट्रायल बुधवार से शुरू हुई। खिलाडि़यों ने हल्की बारिश में तो बोट्स पूरी ताकत से दौड़ाई लेकिन जैसे ही बारिश तेज होने लगी तो बोट्स में पानी भरने लगा, तेज लहरों व तेज बारिश के कारण दो बार चयन ट्रायल को रोकना पड़ा। हालांकि कुछ देर बाद जैसे ही मौसम साफ हुआ तो फिर से खिलाडि़यों ने पूरी तैयारी से अपनी-अपनी बोट्स को दौड़ाकर बेहतर प्रदर्शन किया। 1 से 4 सितम्बर तक चेकोस्लावाकिया में होने वाली वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए भारत के 39 खिलाडि़यों की टीम भेजी जाएगी। इसमें भारत की मेन, वुमन व मिक्स तीन टीम बनाई जाएगी।
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पहुंचे टीम सलेक्टर्स:इंडियन टीम के चयन के लिए उदयपुर में नाडा यानी नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी से दो ऑफिसर पहुंचे है, जो खिलाडि़यों का डोपिंग टेस्ट करेंगे। इसके अलावा चार टेक्नीकल ऑफिशियल पहुंचे है, जो इसमें इंडिया कैंप के लिए खिलाडि़यों का सलेक्शन करेंगे। इंडिया कैंप के लिए जाने वाले खिलाडियों का चीफ सलेक्टर्स भी चयन करेंगे। इसमें वह खिलाडि़यों का पुशअप, वेट ट्रेनिंग, चिन अप, कूपर टेस्ट- 12 मिनट दौड़ सहित अन्य टेस्ट से फाइनल सलेक्शन करेंगे।
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ताकत व तकनीक से होता है चयन
- चयन के लिए खिलाड़ी की ताकत व तकनीक दोनो देखी जाती है, इसके साथ ही लैफ्ट व राइट्स पैडलिंग देखी जाती है, इसमें मसल्स, हाथों का स्विंग तकनीक को बारिकी से देखा जाता हैं। जब खिलाड़ी बोट्स दौड़ाते हैं तो पानी को खींचने के दौरान इंडिया टीम के सलेक्टर्स दूसरी बोट्स से उन पर नजर रखते हैं।- सिक्रोनाइज- यह एक विशेष तकनीक होती है, जिसमें आगे से बोट्स चलाने का तरीका देखा जाता है। इसमें ये देखा जाता है कि बोट्स में एक साथ पैडल चल रहे हैं या नहीं।
- एक बोट में 12 खिलाड़ी होते हैं, दस पैडल चलाने वाले, एक ड्रमर व एक इस्टीरियर होता है। ड्रम की ताल पर पैडल चलाए जाते हैं। इंस्टीरियर बोट की दिशा तय करता है।- यह 18 फीट की बोट में दस खिलाड़ी बैठते हैं, इसके अलावा एक अन्य बोट में 20 से 22 खिलाड़ी बैठ सकते हैं।
- यह 200, 500, 1 हजार व दो हजार मीटर की ड्रेगन बोट रेस होती है।
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ये खिलाड़ी ले रहे हिस्सालैकसिटी में पहली बार भारतीय टीम का चयन किया जा रहा है, इसे लेकर 120 राष्ट्रीय, अन्तरराष्ट्रीय खिलाड़ी है। इसमें 30 महिला खिलाडी शामिल हैं।
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हमारी मांग उदयपुर में खुले एकेडमी: चौहान
भारतीय ड्रेगन बोट चेयरपर्सन दिलीप सिंह चौहान ने बताया कि सबसे प्रमुख मांग उदयपुर में एकेडमी खोली जाए, ताकि यहां से बेहतर खिलाड़ी आगे जा सके। पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि संभागीय आयुक्त राजेन्द्र भट्ट ने उदयपुर को वाटर स्पोटर्स की पहचान वाला शहर बनाने की बात कही है। भट्ट ने 70 लाख रुपए की घोषणा की है। उदयपुर में वर्ष 2012 से लगातार इवेंट करवा रहे हैं। चौहान ने बताया कि राजस्थान क्रीडा परिषद इस खेल को पंजीकृत करें, तो खेल संघ में मान्यता मिलेगी और इसका फायदा होगा। खेल की फाइल विधानसभा में विचाराधीन है, वहां से गजट नोटिफिकेशन होगा इसके बाद इसे मान्यता मिलेगी। अजमेर का आनासागर व डूंगरपुर में गैपसागर में इसकी शुरुआत को लेकर योजना बना रहे हैं। वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत आठवां स्थान रखता है। एशियन प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल भारत ले चुका है।
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सरकार से सहयोग की दरकार: सिंहभारत के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर वर्ल्ड चैम्पियनशिप में देश को कांस्य पदक दिला चुके रवीन्द्रसिंह ने बताया कि विदेशों में सब कुछ अलग है। पत्रिका से बातचीत में सिंह ने कहा कि विदेशों में मौसम, तकनीक व तैयारी। उसकी कॉपी कर खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ सकता। हमें सरकार का सहयोग चाहिए, यदि हमें मौका व सहयोग मिले तो खिलाड़ी स्वर्ण पदक ला सकते हैं। इंडियन कायाकिंग व केनोइंग एसोसिएशन जो सपोर्ट कर रही है, वह सरकार भी करें। केनो स्पोर्ट्स में आठ स्पोर्ट्स होते हैं, सभी में तकनीक अलग-अलग होती है, इसके लिए एक खिलाड़ी को 1 वर्ष तक प्रेक्टिस करनी होती है। सिंह वर्तमान में पंजाब पुलिस में है।
Published on:
14 Jul 2022 10:55 am

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