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ये सर्टिफिकेट किस काम का… ना खेल का नाम, न कलक्टर के हस्ताक्षर

राज्य सरकार की ओर से आयोजित राजीव गांधी शहरी और ग्रामीण ओलंपिक का जिला स्तर पर समापन हो चुका है। जिस सर्टिफिकेट के लिए खिलाडि़यों ने जिले तक अपनी पहुंच बनाई।

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ये सर्टिफिकेट किस काम का... ना खेल का नाम, न कलक्टर के हस्ताक्षर

ये सर्टिफिकेट किस काम का... ना खेल का नाम, न कलक्टर के हस्ताक्षर

उदयपुर. राज्य सरकार की ओर से आयोजित राजीव गांधी शहरी और ग्रामीण ओलंपिक का जिला स्तर पर समापन हो चुका है। जिस सर्टिफिकेट के लिए खिलाडि़यों ने जिले तक अपनी पहुंच बनाई। आखिर में उनके साथ खेल विभाग ने लापरवाही बरतते हुए नाइंसाफी कर डाली। माजरा खेल विभाग की ओर से खिलाडि़यों को जारी किए गए सर्टिफिकेट से किया गया है। उदयपुर में हुए जिला स्तरीय समापन समारोह में आयोजकों की बड़ी लापरवाही सामने आई। फुटबाल में जिला स्तर पर विजेता बनी क्लस्टर 67 के खिलाड़ियों को आधे अधूरे प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। जिन पर फुटबाल के अलावा सभी खेलों के नाम दिए गए हैं। यही नहीं जो प्रमाण पत्र खिलाडि़यों को दिए गए हैं। उनमें जिला खेल अधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद के तो साइन हैं लेकिन जिला कलक्टर के नहीं। ऐसे में खेल विभाग की ओर से जारी किया गया प्रमाण पत्र किसी काम का नहीं है। खिलाडि़यों ने बताया कि चाहे पढ़ाई हो या नौकरी। सब जगह ये प्रमाण पत्र खिलाडि़यों का काम आता है, लेकिन खेल विभाग की ओर से किया गया मजाक इन खिलाडि़यों पर भारी पड़ रहा है। आपको बता दें कि जिला स्तरीय समापन समारोह में करीब तीन हजार खिलाड़ी खेले थे।

प्रमाण पत्र पर फुटबाल का नाम ही अंकित नहीं

फुटबाल के विजेता और रनरअप खिलाडि़यों ने बताया कि हमने कड़ी मेहनत कर क्लस्टर से लेकर जिला स्तर तक मेहनत की और विजेता का मुकाम हासिल किया है। लेकिन खेल विभाग की ओर से नाइंसाफी की गई। इस कारण खिलाडि़यों का हौसला टूटा है। जारी किए ये प्रमाण पत्र इन खिलाडि़यों के किसी काम के नहीं है।

इनका कहना है

खिलाडि़यों को देने के लिए प्रमाण पत्र छपवाए थे। उसमें भूलवस फुटबाल शब्द छूने से रह गया है। कलक्टर साहब के भी साइन नही हो ले थे। यदि किसी के पास ऐसा प्रमाण पत्र है तो वे जिला खेल अधिकारी कार्यालय में आकर देवें। उन्हें सही करके दे दिया जाएगा।
अजीत जैन, जिला खेल अधिकारी, उदयपुर