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आओ लेकसिटी को ऑफ व्हाइट सिटी की दिलाएं पहचान

UDAIPUR CITY

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आओ लेकसिटी को ऑफ व्हाइट सिटी की दिलाएं पहचान

(मुकेश हिंगड़) उदयपुर. इंटरनेट पर राजस्थान की व्हाइट सिटी खोजेंगे तो मिलेगा पढक़र, देखकर या सुनकर फख्र तो होगा, लेकिन विडम्बना है कि शहर इस पहचान को खोता जा रहा है। इंग्लैण्ड का एक जिला है व्हाइट सिटी, वहां भी सिटी पैलेस से लेकर कई ऐसी इमारतें हैं, जो सफेदी लिए हुए हैं। चूंकि यहां भी झीलों के किनारें अधिकतर इमारतें सफेद पत्थरों से निर्मित हैं, ऐसे में उदयपुर का नाम पड़ा व्हाइट सिटी। लाखों देसी व विदेशी सैलानी इन्हीं इमारतों व झीलों को यहां निहारने आते हैं। सात समुद्र पार मिली राजस्थान के व्हाइट सिटी की जानकारी मिलने के बाद यहां पहुंचने वाले सैलानी निराश हो रहे हैं क्योंकि सफेद की बजाय अलग-अलग रंगों से घरों व प्रतिष्ठानों को रंग दिया गया है। अब जरूरत है इसका वैभव लौटाने की। पिंक सिटी व ब्ल्यू सिटी में तो यह पहल हो गई है। अब कुछ करके उदयपुर के शहरवासियों को दिखाना है। नगर निगम और जिला प्रशासन भी इसके लिए तैयार है।

महापौर बोले....
शहर में ऑफ व्हाइट सिटी का निर्णय किया था। इसके तहत हमने शहर के कुछ क्षेत्रों में काम किया है। सरकारी बिल्डिंगों पर ऑफ व्हाइट कलर करवाया है तथा हमारी भवन अनुमति में भी यह शर्त जोड़ दी है कि निर्माण के बाद भवन का रंग ऑफ व्हाइट ही किया जाएगा। इस क्रम को दूसरे अन्य भागों में भी आगे बढ़ाएंगे, लोगों को भी जोड़ेगे। परिकल्पना है कि शहर ऑफ व्हाइट रंग का हो।
- चन्द्रसिंह कोठारी, महापौर

कार्य शुरू तो हुआ लेकिन....
नगर निगम ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर के वॉल सिटी क्षेत्र को ऑफ व्हाइट सिटी का स्वरूप देने का काम भी शुरू किया था। इसके तहत शहर के मकानों और दुकानों को सफेद रंग से पोता गया था। घंटाघर के करीबी क्षेत्र को ऑफ व्हाइट बनाने का काम पिछले साल हुआ था लेकिन यह कार्य अभियान का रूप नहीं ले सका। तब घंटाघर से जगदीश चौक तक के बाजार का स्वरूप निखरने लगा था।

यह भी किया था निगम ने
तब नगर निगम और स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से शहर के सरकारी विभागों और नगर निगम की निर्माण समिति को आदेश भेजे थे कि उनके अधीन कोई सरकारी भवन बनता है या उनका रंगरोगन किया जाता है तो उसका कलर ऑफ व्हाइट ही हो, इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए। साथ ही नगर निगम की भवन अनुमति की शर्तों में भी इस को जोडऩे की बात हुई थी लेकिन हुआ कुछ नहीं। वॉल सिटी के बाजारों को ऑफ व्हाइट बनाने के साथ-साथ हर दुकान का साइन बोर्ड भी एक जैसा हो और उसमें हैरिटेज स्वरूप का ध्यान रखा जाए, यह भी तय किया गया था। यह कहा गया था कि एक जैसे साइन बोर्ड में फर्म का नाम ही अंकित होगा, अन्य जानकारी नहीं लिखी जाएगी।

इनसे ले सकते हैं प्रेरणा
पिंक सिटी (जयपुर): 48 साल पहले बनाए बॉयलोज 1876 में इंग्लैण्ड की महारानी और प्रिंस का जयपुर आगमन हुआ। तत्कालीन महाराज सवाई रामसिंह ने परकोटे समेत कई इलाकों में गुलाबी रंग करवाया। परकोटे में आज भी गुलाबी रंग है। करीब 48 साल पहले जयपुर की शहरी सरकार ने पिंक सिटी को लेकर बॉयलाज भी बनाए। धीरे-धीरे गुलाबी आभा कम होने लगी तो नगर निगम प्रशासन ने जागरुकता से लेकर कई निर्णय किए। आज चहुंओर यहां गुलाबी चमक है।

ब्ल्यू सिटी (जोधपुर): निगम ने कल बनाई कमेटी
मेहरानगढ़ के आसपास सैकड़ों मकान पहले नीले रंग से रंगे थे। धीरे-धीरे इसका वैभव ब्लू सिटी के रुप में छाने लगा। अधिकाधिक लोगों ने अपने घर-प्रतिष्ठानों में नीला रंग करना शुरू किया। जोधपुर नगर निगम की गुरुवार को साधारण सभा की बैठक हुई। इस दरम्यिान पूर्व मंत्री राजेन्द्र गहलोत की अगुवाई में एक कमेटी बनाई गई है, जो पूरे शहर को नीले रंग से रंगने को लेकर नियम-उपनियम बनाने के लिए रिपोर्ट सौंपेंगी। यह कार्य आगामी एक माह के भीतर किया जाएगा।

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