
उदयपुर . पृथ्वी को 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से घिरा है, लेकिन इसमें से 97 प्रतिशत पानी काम का नहीं है। दो प्रतिशत पानी भूमि में है और एक प्रतिशत पानी ही आसानी से उपलब्ध है। एक समस्या यह है कि पृथ्वी पर बचे एक प्रतिशत पानी में से भी 70 प्रतिशत पीने लायक नहीं है। इसमें मात्र .03 प्रतिशत पानी ही पेयजल के रूप में उपयोग लिया जा सकता है। ऐसे में भविष्य में पानी की मारामारी काफी बढ़ जाएगी।
यह बात कोटा ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति मधुसूदन शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के कारण खेती भी नहीं हो पाएगी और पीने का पानी भी कम पड़ेगा। विश्व के भारत, चीन सहित कुछ देशों की जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वैज्ञानिक भाषा में पृथ्वी की केयरिंग कैपेसिटी कम हो गई है।
अब पृथ्वी अधिक भार सहन नहीं कर पाएगी। इसके लिए जनसंख्या को नियंत्रित करना जरूरी है। इससे तीनों चीजें पॉपुलेशन, पॉल्यूशन और पावर्टी जुड़ी हुई है। जनसंख्या बढऩे पर प्राकृतिक संसाधन कम पड़ते हैं जिससे पूरा चक्र प्रभावित होता है। जीवन के आधार वायु, जल व जगह की कमी होगी। निश्चित रूप से पृथ्वी को बचाना है तो जनसंख्या नियंत्रण करना होगा, पर्यावरण बचाना होगा, हवा को शुद्ध रखना होगा।
सबको मिलकर बचानी होंगी पहाडिय़ां
पूर्व वन अधिकारी सतीश शर्मा ने बताया कि मेवाड़ में दो तरह की पहाडिय़ां हैं। एक तो वन विभाग की पहाडिय़ां है और दूसरी निजी। आदमी तो जानता है कि ये पहाडिय़ां किसकी है लेकिन वन्यजीव नहीं जानता कि कौन सी पहाड़ी किसकी है। वे सभी जगह विचरण करते हैं। कुछ लोग इन पहाडिय़ों का व्यावसायिक उपयोग कर रह हैं। इससे जंगली जानवरों का क्षेत्र घट रहा है। पहाड़ों पर घर और होटल बनने से वन्यजीवों का दायरा कम हो रहा है।
शहर की सुंदरता भी खत्म हो रही है। शहर के पानी के बहाव क्षेत्र पर भी असर होगा। पहाडिय़ां बचने से शहर की सुंदरता और शहर की अच्छी आबोहवा बचेगी। यह सबके लिए लाभदायक है। शहरीकरण से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही। इसे पर्यावरण संरक्षण से ही रोका जा सकता है। इस कार्य के लिए सभी को मिलकर सहयोग करना होगा।
भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखनी होगी पृथ्वी
गुरु नानक गल्र्स कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नरपत सिंह राठौड़ ने बताया कि हमारे सौर मंडल में एकमात्र पृथ्वी पर जीवन है। पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों का धर्म और कर्तव्य है कि पृथ्वी को माता के समान समझकर इसके पर्यावरण, संसाधन एवं सभी जीव-जंतुओं का पोषण करें। पृथ्वी दिवस पर सभी मनुष्यों का यह कर्तव्य है कि पृथ्वी के संसाधनों को भावी पीढ़ी के लिए भी भी सुरक्षित रख सकें।
Published on:
22 Apr 2018 05:07 pm
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