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शिकारी की आहट पर मरने का नाटक करता है हरियल

पक्षी का नाम : हरियल कबूतर (येलो फुटेड ग्रीन पिजन), वैज्ञानिक नाम : ट्रेरन फॉनीकॉप्टेरा, जाति : एवीसपरिवार : कोलम्बीडी, कहां पाया जाता है : भारत में हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक और राजस्थान से लेकर पूर्व में असम तक यह देखने को मिलते है

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शिकारी की आहट पर मरने का नाटक करता है हरियल

शिकारी की आहट पर मरने का नाटक करता है हरियल

मेनार . बर्ड विलेज में हरियल कबूतर बड़ी तादाद में है। धण्ड तालाब किनारे आसानी से देखा जा सकता है। समूचे भारतीय उपमहाद्वीप के घने जंगलों में पाया जाता है। पीपल, बड़, गूलर, अंजीर के पेड़ों के पत्ते, बेर, चिरौंजी, जामुन इसकी खाता है। हरियल कबूतर परिवार का हरे-पीले, स्लेटी रंगवाला सुंदर पक्षी है। सीटी जैसी आवाज मीठी लगती है। इसका शिकार भी अधिक होता है।

पक्षी मित्र दर्शन मेनारिया ने बताया कि महाराष्ट्र का राजकीय पक्षी हरियल को यैलो फुटेड ग्रीन पीजन के नाम से जाना जाता है। इसका शरीर चमकीला पीलापन लिए हरे और धूसर रंग का होता है। नर का रंग मादा के मुकाबले ज्यादा चमकीला होता है। समूह में रहना पसंद करता है। घने पत्तों वाले पेड़ पर आवास करता है। फल खाते समय यह कलाबाजी करता है।
खासियत

पक्षीविद विनय दवे ने बताया कि पीले पांव के कारण इसे येलो फुटेड पीजन कहते हैं। शर्मिला और डरपोक किस्म का होता है। अधिकतर हरे पत्तों में छुपा रहता है। इस लिए आसानी से नहीं दिखाई देता। इसका शर्मिला स्वभाव होना इसकी मुसीबत का कारण बन गया है। अधिक शिकार के कारण इसकी संख्या तेजी से कम हो रही है। शिकारी की आहट होने पर चोंच में तिनका लेकर जमीन पर गिर मरने का नाटक करता है। जैसे ही शिकारी का ध्यान हटता है उड़ जाता है।


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