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आदिवासी अंचल में जैविक खेती की अलख जगा रहे युवा किसान

कम लागत में हो रही अच्छी पैदावार
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खेत में किसानों को जागरूक करते हुए

मदनसिंह राणावत/झाड़ोल. आजकल खेती में लगातार हो रहे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से खेत की उर्वरा शक्ति घटती जा रही है। तेजी से बढ़ती आबादी की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल का आम लोगों के स्वास्थ्य व पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। अनाज और सब्जियों के माध्यम से इस जहर के लोगों के शरीर में पहुंचने के कारण वे तरह-तरह की बीमारियों का शिकार बन रहे हैं। ऐसे में खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक जैविक खाद का प्रयोग करने की किसानों से अपील करते हैं।

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र झाड़ोल के प्रशिक्षण प्राप्त युवा किसान इन दिनों किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरुक कर रहे हैं। इन युवा किसानों ने पहले सेवा मंदिर से प्रशिक्षण लिया। इसके बाद ये गांव गांव पहुंच कर किसानों को जैविक खेती के बारे में बता रहे है। इन युवा किसानों का कहना है कि अधिक से अधिक जैविक खाद का इस्तेमाल करें। इससे लागत कम आएगी और पैदावार भी बढ़ेगी। इससे प्रदूषण नहीं होता और यह पर्यावरण हितैषी भी है। साथ ही जैविक खेती के कारण किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है।

फसल प्रदर्शन केे माध्यम से प्रयोग करके कर रहे है जागरुक

प्रशिक्षण कार्यक्रम के सहयोगी भगीरथ सिंह मीणा ने बताया कि ग्राम पंचायत देवास के ढाकला चौड़ा गांव की निवासी सूरज बाई (40) एवं भैंषाणा निवासी वालूराम मीणा (45) ने सेवा मंदिर झाड़ोल से जैविक खेती करने का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद गांव में नर्सरी लगाकर फसल प्रदर्शन केे माध्यम से प्रयोग करके आदिवासी अंचल में किसानों को जैविक खेती करने के लिए जागरुक कर रहे है। इससे क्षेत्र में आम लोगों को रासायनिक खाद से मुक्त अनाज व सब्जियां मिल पाए और स्थानीय बाजार झाड़ोल मुख्यालय पर सब्जी विक्रेताओं को बेचकर अच्छी आय भी प्राप्त कर सके।

जैविक खेती से किसानों को लाभ ही लाभ

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