
विधायक पारस जैन से लेकर पार्षद तक लिख रहे मुख्यमंत्री और पीएस को पत्र, आज तक एक पर भी नहीं हो पाई कार्रवाई
उज्जैन। शहर के मास्टर प्लान २०३५ में एक बार फिर शहर के १३ वार्डों की ५५ कॉलेनियों के करीब १ लाख लोगों मायूस होना पड़ा है। वजह है इस बार भी शासन ने सिंहस्थ क्षेत्र की कॉलोनियों को डी-नोटिफाई नहीं किया । जबकि इन कॉलोनियों को सिंहस्थ क्षेत्र से मुक्त करने के लिए वर्ष २००३ से कवायद चल रही है। यहां तक कि क्षेत्रीय विधायक पारस जैन मुख्यमंत्री, पीएस से लेकर संभागायुक्त तक पत्र लिख चुके हैं बावजूद एक पर भी सुनवाई नहीं हो पाई। ऐसे में अब लोग ही जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति पर भी सवाल खड़े करने लगे हैं।
शहर में करीब १३ वार्ड ऐसे है जिनमें वर्ष १९८० के बाद से ही सिंहस्थ मेला नहीं लगाया है। इसके बावजूद इन वार्डों को सिंहस्थ क्षेत्र में शामिल कर रखा है। इन क्षेत्रों को सिंहस्थ से मुक्त करने के लिए २००४ के सिंहस्थ से पहले से कवायद चल रही लेकिन शासन स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया गया। वर्ष २००३ में तत्कालीन मेला अधिकारी ने पत्र क्रमांक ४९२ दिनांक ३/४/२००३ को डिनोटिफिकेशन का पत्र शासन को भेजा था। उस समय भी इस पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। वर्ष २००७ में इसी को लेकर विधायक जैन ने पुन: शासन को पत्र लिखकर डिनोटिफिकेशन करने की मांग की थी।इसके बाद विधायक जैन ने वर्ष २०१२ व सिंहस्थ २०१६ के सिंहस्थ के पहले भी पत्र लिखकर सिंहस्थ क्षेत्र की कॉलोनियों को हटाने की मांग की थी। विधायक जैन के पत्रों पर कोई असर शासन स्तर पर नहीं हुआ।
मास्टर प्लान प्रारुप पर आंदोलन...नहीं दिखा असर
मास्टर प्लान २०.३५ में भी सिंहस्थ क्षेत्र की कॉलोनियों को मुक्त नहीं करने पर विधायक जैन, पूर्व निगम सभापति सोनू गेहलोत सहित अन्य नेताओं ने रहवासियों के साथ आंदोलन किए थे। विभिन्न वार्डों में प्रदर्शन कर मास्टर प्लान को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थी। भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से मुलाकात कर सिंहस्थ क्षेत्र का मुद्दा उठाया था लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा।
विरोध के बादभी मंत्री यादव से जुड़ी भूमि मुक्त
शहर में एक ओर सिंहस्थ क्षेत्र की कॉलोनियों का मुक्त करने के लिए जनहीत में जनप्रतिनिधि आवाज उठा रहे है। वहीं उच्च शिक्षा मंत्री डा. मोहन यादव व उनके परिजनों तथा अन्य जमीनों को सिंहस्थ घोषित करने की मांग को शासन ने स्वीकार नहीं किया। जबकि विधायक पारस जैन, सांसद अनिल फिरोजिया ने वक्तव्य जारी कर मांग की थी सिंहस्थ के मद्देनजर सिंहस्थ बॉयपास की जमीन का आरक्षित की जाए । इस मुद्दे पर भी जनप्रतिनिधि, साधं-संत व आम लोगों की आवाज को दरकिनार कर दिया।
यह है डिनोटिफिकेशन की मांग
सिंहस्थ मेला आयोजित करने के लिए शासन की और से जमीन को अधिसूचित किया जाता है। वर्ष २०१६ के सिंहस्थ में ३०६१ हेक्टयर भूमि आरक्षित की गई थी। इस भूमि में वह क्षेत्र भी शामिल है, जहां पर कॉलोनियां बन चुकी है। कुछ क्षेत्र ऐसे भी है जो सिंहस्थ मेेले में उपयोग में नहीं आई और खाली पड़ी रही। शहर में ऐसी भूमि भी है जो १९९२, २००४ व २०१६ के सिंहस्थ में भी उपयोग में नहीं आया। सिंहस्थ आरक्षित भूमि पर पक्के निर्माण व व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता है। ऐसे में अब इन भूमियों को सिंहस्थ क्षेत्र से डिनोटिफिकेशन की मांग की जा रही है।
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मैंने सिंहस्थ क्षेत्र की कॉलोनियों को लेकर पत्र लिखेे है । इसी आधार पर २५ से ज्यादा कॉलोनियां वैध हुई है आगे भी कॉलोनियां वैध होगी। (हालांकि यह नहीं बता पाए सिंहस्थ क्षेत्र की कॉलोनियों को मास्टर प्लान से बाहर क्यों नहीं किया गया)
- पारस जैन, विधायक, उज्जैन उत्तर
Updated on:
17 Jun 2023 12:34 pm
Published on:
17 Jun 2023 12:34 pm
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