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Ujjain में शिप्रा की बाढ़ में फंसे सैकड़ों परिवार, ऐसे ​किया रेस्क्यू

Ujjain शिप्रा में बाढ़ के बाद निचली बस्तियों में तीन-तीन फीट तक पानी जमा हुआ, घर छोड़कर जाने को मजबूर हुए लोग, स्कूल और धर्मशाला में प्रभावितों को शिफ्ट किया

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उज्जैन. Ujjain जिले सहित आसपास हो रही लगातार बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। शहर की आधा दर्जन निचली बस्तियों में २०० से अधिक परिवार डूब की चपेट में आए। बस्तियों में तीन नाव चलाकर १०० से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया। जिनके घर बहुमंजिला थे, उन्होंने ऊपरी मंजिल पर रात गुजारी।
शिप्रा उफान के साथ ही शनिवार सुबह से शहर के बड़े नालों में पानी बढऩा शुरू हो गया था। इससे निचली बस्तियों की सड़कें भी धीरे-धीरे जलमग्न होने लगी। दोपहर १२ बजे बाद शिप्रा का जलस्तर और बढ़ा तो बड़े नालों का पानी उलटी दिशा में बह निचली बस्तियों में घुसने लगा। दोपहर ३ बजे तक शांति नगर, एकता नगर, सुदर्शन नगर, प्रेम नगर, रेलवे कॉलोनी, गणगौर दरवाजा सहित अन्य निचली बस्तियों में बाढ़ के हालात बन गए। जायजा लेने मंत्री डॉ.मोहन यादव भी बस्तियों में पहुंचे। जन सुरक्षा की दृष्टि से विद्युत कंपनी ने इन क्षेत्रों में बिजली सप्लाई बंद कर दी। पहले से तैयार होम गार्ड व एसडीईआरएफ की टीम ने तत्काल बस्तियों में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। अलग-अलग क्षेत्रों में 5-६ बोट चलाकर १०० से अधिक लोगों को बाहर निकाला गया। बसों के जरिए नगर निगम ने बाढ़ प्रभावितों को मॉडल स्कूल, प्रजापति धर्मशाला व अन्य विस्थान केंद्रों पर पहुंचाया। यहां इनके ठहरने व भोजन की व्यवस्था की गई है। रामघाट के नजदीक बंबई वालों की धर्मशाला में बाहर से आए कुछ यात्री और आसपास के लोग फंस गए जिन्हें पिछले रास्ते से रेस्क्यू किया गया।
घरों में कमर तक पानी, गृहस्थी का सामान बर्बाद
बाढ़ के कारण लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। निचले इलाकों के कई घरों में कमर तक पानी जमा हो गया। बाढ़ की आशंका में कुछ लोगों ने पानी भरने से पहले भूतल पर रखे सामान पहली-दूसरी मंजिल पर चढ़ाना शुरू कर दिया था। जिन लोगों के पास यह व्यवस्था नहीं थी, उनकी गृहस्थी के सामान बाढ़ की चपेट में आ गया। खाद्य सामग्री के साथ ही बिजली उपकरण, बिस्तर आदि खराब होने से लोगों का भारी नुकसान हुआ है।
छत पर चढ़े युवक को ढूंढ़ती रही टीम
निगमायुक्त रौशन कुमारसिंह को सूचना मिली कि सुदर्शन नगर में एक युवक छत पर फंस गया है। उन्होंने निगम टीम को रेस्क्यू के लिए भेजा। बचाव दल के साथ इंजीनियर हर्ष जैन व मुकुल मेश्राम युवक को खोजने निकले। उन्होंने युवक को कई बार फोन भी लगाया। युवक फोन पर जो लोकेशन बता रहा था, वह क्षेत्रवासियों से पूछने पर भी टीम को नहीं मिली। गुलाबी टीशर्ट पहने युवक को खोजने में दल को खासा परेशान होना पड़ा। इस तरह टीम को एक लकवाग्रस्त बुजुर्ग के भी घर में फंसने की सूचना मिली थी।
डटी रही टीम, श्वान को भी बाहर निकाला
होमगार्ड व एसडीईआरएफ की टीम ने सिर्फ इंसान ही नहीं बाढ़ में फंसे पशुओं तक की जान की सुरक्षा की। सुदर्शन नगर में एक श्वान को नाव में बिठाकर टीम बाहर लाई। शहर के साथ ही जिले में बाढ़ आशंकित क्षेत्रों में होमगार्ड व एसडीईआरएफ की टीम पूर्व से तैनात रही। होमगार्ड डिस्टि्रक्ट कमाडेंट संतोष जाट ने होमगार्ड व एसडीईआरएफ के १५० अतिरिक्त जवानों को अलग-अलग जगह तैनात किया। जिले में विभिन्न स्थानों के लिए आपदा उपरकणों के साथ ९ डीआरसी तैयार रखी गई। शिप्रा के साथ ही कालीसिंध, चिल्लर, गंभीर नदी, पुल-पुलियाओं पर जवानों ने निगरानी रखी। जाट ने बताया कि रात में भी सभी स्थानों पर दल तैनात रखा गया है।