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जिले में 25 हजार बच्चों के स्कूल से कटेंगे नाम

शिक्षा का अधिकार दांव पर....

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25 thousand children will be renamed from school in the district

शिक्षा का अधिकार दांव पर....

शाजापुर. सरकारी योजनाएं वैसे तो लोगों को राहत देने के लिए लागू की जाती है, लेकिन एक सरकारी योजना के नए नियमों के कारण जिले के अत्यंत गरीब परिवार के करीब 25 हजार से ज्यादा बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। निजी विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पढऩे वाले बच्चों की सरकार की ओर से दी जाने वाली राशि का भुगतान पिछले 3 साल से नहीं हुआ है। इसके चलते निजी विद्यालयों में अगले सत्र में बच्चों को प्रवेश मिलना मुश्किल दिखाई दे रहा है। यदि निजी विद्यालय संचालकों को आरटीइ के तहत सरकार की ओर से दी जाने वाली राशि का भुगतान नहीं हो पाया तो इनमें नि:शुल्क पढऩे वाले बच्चों का आगामी सत्र में स्कूल से नाम काटा जा सकता है।
गौरतलब है कि वर्ष 2011-12 में सरकार ने सभी प्रायवेट स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीइ) लागू किया था। इस नियम के तहत जो भी निजी विद्यालय है उनमें सबसे छोटी कक्षा मेें 25 प्रतिशत सीटें अत्यंत गरीब परिवार के बच्चों के लिए आरक्षित की जाती है। इन सीटों पर लॉटरी सिस्टम के हिसाब से अत्यंत गरीब परिवार के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। निजी विद्यालय में आरटीइ के तहत पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए प्रति विद्यार्थी के हिसाब से सत्र समाप्त होने पर संबंधित विद्यालय को शासन की ओर से तय राशि का भुगतान किया जाता है। पिछले 9 साल से चल रही इस योजना के तहत जिले के करीब 627 निजी विद्यालयों में वर्ष 2019-20 तक करीब 30 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को आरटीइ के तहत प्रवेश दिया गया। तीन साल पहले तक तो सभी विद्यालयों में पढऩे वाले विद्यार्थियों की फीस की राशि ऑनलाइन अपडेशन के बाद एक मुश्त शासन की ओर से सीधे विद्यालय के खाते में डाल दी जाती थी, लेकिन पिछले तीन साल की राशि अभी तक निजी विद्यालयों के खाते में नहीं पहुंची है। जब विद्यालय संचालकों ने इस संबंध में जानकारी ली तो उन्हें यह नहीं बताया जा रहा है कि राशि का भुगतान कब तक हो पाएगा। ऐसे में निजी विद्यालय अगले सत्र में आरटीइ वाले विद्यार्थियों का अध्यापन और नवप्रवेश बंद करने का मन बना रहे हैं।
विद्यार्थियों का दोबारा करना होगा सत्यापन
जानकारी के अनुसार निजी विद्यालयों को अपने विद्यालय में आरटीइ के तहत अध्ययन करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की समग्र आइडी, आधार कार्ड और विद्यालय के रजिस्टर का रिकार्ड ऑनलाइन अपलोड करना है। इसमें से किसी भी दस्तावेज में यदि संबंधित विद्यार्थी का नाम, पता, जन्म दिनांक में कुछ भी असमानता रहती है तो ये जानकारी पूर्ण नहीं होने पर संबंधित विद्यार्थी के विद्यालय शुल्क का भुगतान विद्यालय को नहीं मिल पाएगा। निजी विद्यालय संचालकों के अनुसार पूर्व में जो विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है उन सभी का भी पुर्नसत्यापन करना अनिवार्य किया गया है। ऐसे में सभी विद्यार्थियों का पुर्नसत्यापन कराना बहुत परेशानी भरा है, क्योंकि आरटीइ के तहत प्रवेश पाने वाले सभी विद्यार्थियों का बायोमैट्रिक सत्यापना करना होगा।
इस बार तो कुछ जानकारी ही नहीं
अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रतिवर्ष ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाता है। इस पोर्टल पर सभी आवेदक अभिभावक अपने-अपने बच्चें के प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं। इसके बाद लॉटरी सिस्टम के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न विद्यालयों में पहुंचा दिया जाता है। विद्यालय में आने के बाद विद्यालय प्रबंधन को विद्यार्थी के बारें में जानकारी मिलती है। प्रवेश लेने के बाद विद्यालय प्रबंधन को संबंधित विद्यार्थी का आधार कार्ड अपडेट करना होता है। संबंधित विद्यार्थी की जानकारी को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के बाद विद्यार्थी के हिसाब से सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क का भुगतान किया जाता है। जिले की बात की जाए तो यहां पर वर्ष 2016 -17 में करीब 2 हजार ऐसे विद्यार्थी शेष रह गए जिनके शुल्क का भुगतान दस्तावेजों में परेशानी के कारण अभी तक नहीं हो पाया। वर्ष 2017-18 में आरटीइ के तहत अध्ययनरत करीब 25 हजार विद्यार्थियों में से 80 प्रतिशत विद्यार्थियों की फीस का भुगतान नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार वर्ष 2018-19 में अध्ययनरत एक भी विद्यार्थी की फीस का भुगतान नहीं हुआ। खास बात यह है कि 2018 -19 के सत्र में विद्यार्थियों की फीस भुगतान के लिए पोर्टल ही नहीं खोला गया। वर्तमान सत्र 2019-20 के बारें में अभी तक कुछ प्रक्रिया ही आगे नहीं बढ़ी है।
फैक्ट फाइल
जिले में प्राइवेट स्कूलों की संख्या 627
आरटीई के तहत पिछले सत्र तक विद्यालय में कुल बच्चे 25 हजार
चालू सत्र में स्कूल में आरटीई के तहत नव प्रवेशी विद्यार्थी 3800
पिछले सत्र तक सरकार की ओर से दी जाने वाली फीस 4 हजार 620
पिछले सत्र तक कुल बकाया राशि 11 करोड़ 55 लाख

अभिभावकों को होगी परेशानी
समस्त दस्तावेजों को एकत्रित करके उसका सुधार कराने के बाद पोर्टल पर अपलोड करने में अभिभावकों को सबसे ज्यादा परेशानी होगी, क्योंकि अभिभावकों को उनके बच्चों को निजी विद्यालय में पढ़ाना है तो उन्हें समस्त दस्तावेज एकत्रित करके उसकी जानकारी को एक जैसी कराना होगी। ऐसे में सवाल यही उठता है कि जो अभिभावक अत्यंत गरीब परिवार से हैं और मजदूरी करके अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं, वे इन दस्तावेजों को कहां से सुधार करा पाएंगे, क्योंकि इसके लिए अभिभावकों को अलग-अलग विभाग में जाकर सुधार कराने के बाद ऑनलाइन सुधार भी कराना होगा। ऐसे में उक्त अभिभावकों के बच्चों के निजी विद्यालय में पढऩे पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि यदि विद्यार्थियों का ऑनलाइन अपडेशन नहीं हुआ और उनकी फीस शासन स्तर से विद्यालय को नहीं मिली तो संबंधित विद्यालय से उनके बच्चे को निकाल दिया जाएगा। यदि बच्चों को विद्यालय में पढ़ाना है तो दस्तावेज की पूर्ति करना होगी या फिर विद्यालय से निकाले जाने के बाद दोबारा प्रवेश दिलवाने के लिए अन्य विद्यार्थियों की तरह ही फीस जमा करना होगी।
(स्रोत : प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन)
&पिछले 3 साल से आरटीइ के तहत प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की फीस का भुगतान शासन स्तर से नहीं हुआ है। इसके चलते विद्यालय में आरटीइ के तहत प्रवेश पाने वाले और अध्ययनरत विद्यार्थियों के अध्यापन में परेशानी हो रही है। यदि शासन की ओर से राशि का भुगतान नहीं किया तो अगले सत्र में आरटीइ के तहत विद्यालय में अध्यापन करना और नवप्रवेश देना संभव नहीं होगा। अखिलेश मंडलोई, जिलाध्यक्ष, प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन-शाजापुर
&आरटीइ के तहत विद्यालयों के लिए भुगतान की प्रक्रिया का कार्य जारी है। वर्ष 2016 -17 में कुछ विद्यालय रह गए थे उनका भुगतान नहीं हुआ। 2017-18 में कई विद्यालयों का भुगतान हो चुका है। अभी आरटीइ के तहत प्रवेशी विद्यार्थियों के सत्यापन और आधार सत्यापन के लिए विद्यालयों को निर्देश दिए हैं। जल्द सत्र 2018-19 की फीस का भुगतान हो जाएगा। राजेंद्र क्षिप्रे,
डीपीसी-शाजापुर