मंदिर की ओर से में शव वाहन, एम्बुलेंस, बस व लोडिंग मैजिक चल रही है। इन सभी में ज्यादातर वस्तुएं दानदाता द्वारा भेंट की गई है। सवाल उठता है इसका संचालन तो मंदिर की धर्मशाला के प्रभारी की देखरेख में ही किया जाता है। शासकीय मंदिर होने से इसमे लगने वाला ईंधन कहां से भराया जाता है, यह सवाल विभाग को कुछ परेशानी दे सकता है।