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84 महादेव सीरीज : अग्नि पुत्र स्वर्ण ज्वालेश्वर महादेव की गाथा

चौरासी महादेवों की शृंखला में छठे क्रम पर स्वर्ण ज्वालेश्वर महादेव का मंदिर आता है। इनकी गाथा स्वयं भगवान शिव ने पार्वतीजी को सुनाई थी। 

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Lalit Saxena

Jul 25, 2016

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उज्जैन. चौरासी महादेवों की शृंखला में छठे क्रम पर स्वर्ण ज्वालेश्वर महादेव का मंदिर आता है। इनकी गाथा स्वयं भगवान शिव ने पार्वतीजी को सुनाई थी। श्रावण मास में पत्रिका डॉट कॉम के जरिए आप चौरासी महादेव की यात्रा का लाभ ले रहे हैं।

पौराणिक आधार एवं महत्व
एक समय भगवान शिव और माता पार्वती को सांसारिक धर्म में संलग्न रहते सौ वर्ष हो गए, लेकिन तारकासुर वध हेतु उन्हें कोई पुत्र उत्पन्न नहीं हुआ। तब देवताओं ने अग्नि देव को शिवजी के पास भेजा। शिवजी ने त्रैलोक्य हित के लिए अपना अंश अग्नि देव के मुख में स्थान्तरित कर दिया।

स्वर्ण ज्वालेश्वरं षष्ठं विद्धि चात्र यशस्विनी।
यस्य दर्शन मात्रेण धवानिह जायते ।।

देवताओं और दैत्यों में भयावह युद्ध हुआ
अग्नि देव भी शिवजी के अंश का दाह सहन नहीं कर पाए और उन्होंने उस अंश को गंगा में डाल दिया। फिर भी अंश के शेष रहने पर अग्नि देव जलने लगे, फिर अग्नि देव को अंश शेष से दिव्य, रमणीय, कांचन पुत्र उत्पन्न हुआ। ऐसे ज्वलंत और अति तेजस्वी पुत्र को पाने के लिए असुर, सुर, गन्धर्व, यक्ष आदि लडऩे लगे। देवताओं और दैत्यों में भयावह युद्ध हुआ, जिसके फलस्वरूप कोलाहल मच गया।

शिवजी ने उस स्वर्ण को बुलाया और
तब बालखिल्य ऋषि समस्त देवताओं के साथ इंद्र व बृहस्पति को आगे कर ब्रम्हाजी के पास गए और पूरा वृत्तांत सुनाया। ब्रम्हाजी सभी को साथ लेकर शिव के पास पहुंचे। तब शिवजी को ज्ञात हुआ कि यह सारा सर्वनाश अग्नि पुत्र स्वर्ण के कारण हुआ है। फिर शिवजी ने उस स्वर्ण को बुलाया और उसे ब्रम्ह हत्या का दोषी बता छेदन, दहन और घर्षण की पीड़ा भुगतने की बात कही। यह सब देखकर अग्नि देव भयभीत हुए और स्वर्ण पुत्र के साथ शिवजी की स्तुति करने लगे। अग्निदेव ने भगवान शिव से विनय की कि कृपया आप मेरे पुत्र स्वर्ण को अपने भंडार में रखें, आपके प्रसन्न होने से ही मुझे यह पुत्र मिला है। तब शिवजी ने अग्निपुत्र को गोद में बैठाकर दुलार किया और उसे महाकाल वन में स्थान दिया। वह स्थान कर्कोटक के दक्षिण में है। वह लिंग ज्वाला समान होने से स्वर्ण ज्वालेश्वर कहलाया।

कहां स्थित हैं?
श्री स्वर्ण ज्वालेश्वर महादेव राम सीढ़ी पर ढूंढ़ेश्वर महादेव के पास स्थित हैं। मान्यतानुसार श्री स्वर्ण ज्वालेश्वर महादेव के दर्शन से और स्वर्ण का दान करने से सब शुभ कार्य पूर्ण होते हैं। श्रावण मास और चतुर्थी को यहां पूजा करने का विशेष महत्व है।

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