अग्नि देव भी शिवजी के अंश का दाह सहन नहीं कर पाए और उन्होंने उस अंश को गंगा में डाल दिया। फिर भी अंश के शेष रहने पर अग्नि देव जलने लगे, फिर अग्नि देव को अंश शेष से दिव्य, रमणीय, कांचन पुत्र उत्पन्न हुआ। ऐसे ज्वलंत और अति तेजस्वी पुत्र को पाने के लिए असुर, सुर, गन्धर्व, यक्ष आदि लडऩे लगे। देवताओं और दैत्यों में भयावह युद्ध हुआ, जिसके फलस्वरूप कोलाहल मच गया।