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उज्जैन. मां काली की खास प्रतिमा तैयार की गई है, जिसे बनाने के लिए कलाकार ने अथक प्रयास किया। नौ तीर्थों की मिटï्टी तो लगाई ही गई, साथ ही नौ पवित्र नदियों के जल का भी इस्तेमाल किया गया है। इतना ही नहीं महाकाल को चढ़ाई जाने वाली भस्मी व जूट की राख भी इस प्रतिमा को गढऩे में लगाई है। जानिए इसमें और क्या है खास...
नवरात्रि पर पंडालों में माता दुर्गा/अम्बे की मूर्तियां स्थापित करने की परंपरा है। शहर में एक पंडाल ऐसा है, जहां कालिका माता की मूर्ति स्थापित कर पूजन-अर्चन किया जाता है। खास बात है कि मूर्ति के निर्माण ९ नदियों के जल, नौ तीर्थों की माटी, महाकाल की भस्मी और जूट का उपयोग किया जाता है।
22 सालों से प्रहलादनाथ महाराज (भोले बाबा) मां कालिका की मूर्ति बना रहे हैं। बाबा द्वारा वर्ष में सिर्फ एक ही मूर्ति बनाई जाती है और वह नवरात्रि पर पूजन, अर्चन के लिए मां जय दुर्गा जागरण समिति अशोक नगर को नि:शुल्क भेंट करते हैं।
मां जयदुर्गा जागरण समिति के उपाध्यक्ष धीरेन्द्रसिंह कुशवाह ने बताया कि इस वर्ष बाबा के परिवार ने तीन क्विंटल वजनी मां कालिका की मूर्ति बनाकर भेंट की। पिछले 22 वर्षों से भोले बाबा नवरात्रि पर अपने परिवार के साथ माताजी की मूर्ति बनाते आ रहे हैं। समिति संयोजक ओम भारद्वाज, अध्यक्ष आनंद बागोरिया एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा मूर्ति बनाने वाले महाराज व उनके परिवारजनों का प्रतिवर्ष कार्यक्रम के दौरान सम्मान किया जाता है।
सांदीपनि नगर में महाआरती
शारदीय नवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत ढांचा भवन स्थित
सांदीपनि नगर में महाआरती का आयोजन हुआ। तपस्विनी ग्रुप की ओर से आयोजित कार्यक्रम में आचार्य अखिलेश महाराज, प्रमोद चौबे,ओम सारवान, वीरेंद्र शर्मा अमित शर्मा मौजूद थे।
गायत्री शक्तिपीठ में अनुष्ठान की कल पूर्णाहुति
गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित सामूहिक गायत्री अनुष्ठान की पूर्णाहुति नवमी 29 सितंबर को 9 कुण्डीय गायत्री यज्ञ के साथ होगी। सुबह 8.30 से 11.30 बजे तक यज्ञ पूर्णाहुति के बाद कन्याभोज होगा। प्रचार प्रसार सेवक देवेन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार इस अवसर पर आयुष विभाग के चिकित्सा विशेषज्ञ नि:शुल्क परीक्षण/उपचार भी करेंगे।
Published on:
27 Sept 2017 09:24 pm
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