उज्जैन

आखिर क्यों लगा जिला अस्पताल पर रेफर का ठप्पा

जबकि यहां आधुनिक लेबर रूम होने और हर केस हैंडल करने का दावा करते हैं डॉक्टर

2 min read
Nov 04, 2019
जबकि यहां आधुनिक लेबर रूम होने और हर केस हैंडल करने का दावा करते हैं डॉक्टर

शाजापुर. शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सुरक्षित प्रसव का सरकार का सपना अधूरा सा लग रहा है, क्योंकि ज्यादातर प्रसूताएं रेफर चक्र में उलझकर रह जाती हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल अस्पताल से जिला अस्पताल, लेकिन जिला अस्पताल में भी खामियों के चलते इन्हें उज्जैर-इंदौर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में अनेक बार रास्ते में भी गर्भवती को प्रसव को हो जाता है। जो महिलाओं और शिशुओं के लिए काफी जोखिम भरा रहता है। जिला अस्पताल पर सालों से रैफर का ठप्पा लगा हुआ है, जो आज तक नहीं हट पाया है। सुरक्षित प्रवस के लिए लोग प्रसूता को जिला अस्पताल लाते हैं, कुछ का सही इलाज हो जाता है, वहीं जरा भी जटिलता सामने आए तो डॉक्टर प्रसूता को रेफर कर देते हैं। हर माह करीब ६०-७० महिलाओं को जिला अस्पताल से रेफर किया जा रहा है। जबकि जिला अस्पताल को लेकर ये दावा किया जाता है कि यहां आधुनिक लेबर रूम और उच्च कोटि के डॉक्टर हैं, जो हर तरह के केस हैंडल कर सकते हैं। इसके बाद भी गर्भवती रेफर के खेल में उलझकर रह जाती है।
बता दें कि २२ अक्टूबर को भी जिला अस्पताल में प्रसव के लिए आई सारंगपुर निवासी कविता बाई को स्टाफ नर्स ने बाहर ले जाने की बात कहते हुए इंदौर रेफर कर दिया। परिजन उसे जननी वाहन में लेकर इंदौर के लिए रवाना हुए, लेकिन महज एक किमी की दूरी पर ही महिला को प्रसव पीड़ा तेज हुआ ही उसने नवजात को जन्म दे दिया। प्रसव के बाद जननी वाहन से ही जच्चा-बच्चा को जिला अस्पताल लाया गया। ऐसे में कभी महिला व शिशु की जान पर बन सकती है।
चार माह में ४८ सीजर, २८५ रेफर-बता दें कि शाजापुर जिला अस्पताल में करीब डेढ़ साल से एनेस्थिसिया नहीं थे। जिसके चलते जरा भी जटिलता पर महिलाओं को प्रसव के लिए रेफर कर दिया जाता था, लेकिन चार माह पहले एनेस्थिसिया की ज्वाइनिंग हो चुकी है। जिसके बाद जुलाई माह से जिला अस्पताल में ऑपरेशन होना शुरू हो गए। खास बात यह है कि जुलाई माह से अक्टूबर माह तक मात्र ४८ महिलाओं के सीजर किए गए, जबकि २८५ महिलाओं को रेफर कर दिया है। रेफर में कुछ महिलाओं को रास्ते में ही प्रसव हो गया।
१० माह में ७५० महिलाएं रेफर
जिला अस्पताल से हर माह ६०-७० गर्भवती को रेफर किया जाता है। ये आंकड़ा ८०-९० तक पहुंच जाता है। आौसतन २-३ महिलाएं हर दिन रेफर हो रही हैं। महिलाओं को अन्य शहरों में पहुंचकर प्रसव कराना पड़ता है, या फिर प्रायवेट अस्पताल में जाना पड़ता है। बता दें बीते १० माह में जिला अस्पताल से ७५० महिलाओं को रेफर किया है।
इस तरह चल रहा रेफर का चक्र
माह सामान्य प्रसव रेफर ऑपरेशन
जनवरी ३३३ ८२ ००
फरवरी ३०० ५८ ००
मार्च ३४२ ७४ ००
अपै्रल ३२६ ७५ ००
मई ३१२ ८५ ००
जून ३१६ ९१ ००
जुलाई ४५१ ७६ ०५
अगस्त ४४५ ६६ ११
सितंबर ४४८ ५४ २०
अक्टूबर ४१० ८९ १२
यहां प्रतिमाह ४०० के लगभग सामान्य प्रसव होता है, जटिलता देखते हुए महिला को रेफर किया जाता है, अस्पताल में एक ही एनेस्थिसिया मौजूद है, वह जब मौजूद नहीं होते तो गंभीर केस रेफर कर दिए जाते हैं।
डॉ. शुभम गुप्ता, सिविल सर्जन

ये भी पढ़ें

पश्चिम बंगाल बाबा लोकनाथ मंदिर में क्यों मची थी भगदड़? जाने विस्तार से…

Published on:
04 Nov 2019 08:00 am
Also Read
View All

अगली खबर