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Video माता कुंती के लिए पांडवों ने स्वर्ग से मंगवाया था हाथी, तब हो सकी थी पूजा

गज महालक्ष्मी मंदिर में हाथी अष्टमी मनाई जा रही है। विभिन्न धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चल रहा है।

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उज्जैन.श्राद्ध पक्ष की अष्टमी पर नई पेठ स्थित गज महालक्ष्मी मंदिर में हाथी अष्टमी मनाई जा रही है। विभिन्न धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चल रहा है। मंदिर में सुबह ८ से ११ बजे तक १०१ लीटर दूध से मां गजलक्ष्मी का दुग्धाभिषेक किया। साथ ही श्री सुक्तम पाठ एवं पुरुषोत्तम पाठ ५ वैदिक ब्राह्मणों द्वारा किया गया। इसके पश्चात मां लक्ष्मी का १६ शृंगार कर दोपहर १२ बजे महाआरती कर प्रसाद वितरण किया।

श्राद्ध पक्ष में आती है हाथी अष्टमी
शाम ६ से ९ बजे तक भजन संध्या का आयोजन। रात्रि ९ बजे पुन: महाआरती कर प्रसाद वितरण। मंदिर के पुजारी पं. राजेश शर्मा ने बताया कि श्राद्ध पक्ष की अष्टमी हाथी अष्टमी के रूप में मनाई जाती है। इस दिन सुहागन महिलाएं मिट्टी का हाथी बनाकर उस पर मिट्टी की लक्ष्मी को विराजित करती हैं और फिर बेसन व आटे से ने गहने मां लख्मी को धारण कराए जाते हैं। मंदिर में सुबह ८ से ११ बजे तक १०१ लीटर दूध से मां गजलक्ष्मी का दुग्धाभिषेक किया। साथ ही श्री सुक्तम पाठ एवं पुरुषोत्तम पाठ ५ वैदिक ब्राह्मणों द्वारा किया गया। इसके पश्चात मां लक्ष्मी का १६ शृंगार कर दोपहर १२ बजे महाआरती कर प्रसाद वितरण किया।

यह है कथा
पं. राजेश शर्मा के अनुसार एक समय एेसा भी आया कि पांडवों ने अपना सारा राजपाट हार कर दीनहीन रहने लगे। कौरवों को घमंड आया कि सारा राजपाठ हमारा हो गया है। लक्ष्मी हम पर मेहरबान हैं, इस बाद हम महापूजन करेंगे। अष्टमी का दिन निकट आने के पहले कौरवों ने मिट्टी का विशाल हाथी का निर्माण कराया और सभी को पूजा के लिए आमंत्रित किया। दूसरी ओर माता कुंती पूजन को लेकर चिंतित थी। अर्जुन ने देवराज इंद्र को स्थिति से अवगत कराया और इंद्र ने ऐरावत नाम का हाथी धरती पर भेजा। इधर पूजा की तैयारी चल रही थी और इंद्र ने बारिश कर दी। जिसके कारण कौरवों का मिट्टी का हाथी पानी में बह गया। दूसरी ओर कुंती ने विधि विधान से मां लक्ष्मी का पूजन किया। कुछ ही समय बाद पांडवों ने अपना खोया वैभव और राजपाठ प्राप्त कर लिया।