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लंदन नहीं उज्जैन से चलेगा दुनिया का समय! केंद्रीय मंत्री बोले- GMT खत्म कर MST करेंगे

MP News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उज्जैन को वैश्विक समय गणना का असली केंद्र बताते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने ‘ग्रीनविच मीन टाइम’ (GMT) की जगह ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ यानी MST को लागू करने की जरूरत पर जोर देकर नई बहस छेड़ दी।

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Union Minister said we will introduce Mahakal Standard Time (MST) (फोटो- Patrika.com)

MP News: मध्य प्रदेश के उज्जैन में शुक्रवार को 'महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम' (Mahakal: The Master of Time) सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन में विज्ञान, इतिहास और आस्था का संगम देखने को मिला। इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) भी शामिल हुए। सीएम मोहन यादव ने कार्यक्रम में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उज्जैन धर्म के साथ विज्ञान की भी नगरी है। यहां की माटी में विज्ञान, गणित, खगोल और ब्रह्मांड चिंतन सदियों से विद्यमान है। शिक्षा मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि अब जीएमटी को एमएसटी से बदलने का का समय आ गया है।

सम्मलेन में देश-विदेश से कई एक्सपर्ट्स भी आए थे जिन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और मॉडर्न साइंस के मेल पर चर्चा की। इस दौरान सीएम ने साइंस सेंटर के लोकार्पण सहित 725 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इसके अलावा उन्होंने सिंहस्थ 2028 के लिए चल रही तैयारों का भी जायजा लिया।

भगवान शिव से ही समय की शुरुआत और अंत- सीएम

सीएम मोहन यादव ( CM Mohan Yadav) ने कहा कि विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की हर वस्तु समय के अधीन है, लेकिन शिव उस अनंत का प्रतीक हैं, जहां से समय जन्म लेता है और जहां समय का अंत होता है। इसीलिए वे काल के अधिष्ठाता अर्थात ‘मास्टर ऑफ टाइम’ हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान मानता है कि समय और अंतरिक्ष एक दूसरे से अविभाज्य हैं, हमारे शास्त्रों में युगों पहले शिव को विश्व स्वरूप और महाकाल कहकर इसी वैज्ञानिक सत्य को प्रतिपादित किया था।

एनईपी 2020 के बदलावों का किया जिक्र

एजुकेशन सेक्टर में अभी हो रहे बड़े बदलावों के बारे में बताते हुए, केंद्रीय मंत्री प्रधान ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 (NEP 2020) की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आज का जमाना आर्टिफीसियल इंटेलिजंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग से तय होता है, इसलिए एआई जैसे नए करिकुलम स्कूल लेवल पर ही शुरू किए जा रहे हैं। प्रधान ने आगे साफ किया कि कोई भी एक भाषा ज्ञान पर मोनोपॉली नहीं रख सकती है। इसलिए एजुकेशन को भारतीय भाषाओं और देसी कल्चर के साथ जोड़ा जा रहा है ताकि हर छात्र मुश्किल साइंटिफिक सब्जेक्ट को अपनी मातृभाषा में आसानी से समझ सके।

विकास कार्यों का किया भूमि पूजन

सीएम मोहन यादव ने इस दौरान साइंस सेंटर के लोकार्पण सहित कई विकास कार्यों की सौगात दी। सीएम ने उज्जैन में 725 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं का भूमि पूजन और लोकार्पर्ण किया। सीएम ने घोषणा की कि 22.52 करोड़ रुपये की लागत से ‘सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज’ का विस्तार किया जाएगा, जिसमें 14 नए कक्ष, डॉर्मिटरी और आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी। वहीं, 701.86 करोड़ रुपये की लागत से 19.80 किमी लंबा 4-लेन सिंहस्थ बायपास बनाया जाएगा, जिससे लगभग 5 लाख लोगों को फायदा होगा और ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होगी।

मार्ग के 14 कि.मी. का 4-लेन उन्नयन एवं 5.8 कि.मी. का 4-लेन विस्तारीकरण किया जाना है, जो इंदौर-उज्जैन 6-लेन मार्ग के शांति पैलेस चौराहा से प्रारंभ होकर उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग, उज्जैन-जावरा मार्ग तथा उज्जैन-गरोठ मार्ग को जोड़ते हुए उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 552-जी ग्राम सुरासा के समीप समाप्त होगा।

साइंस सेंटर का लोकार्पण

इसके अलावा 15 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने साइंस सेंटर का लोकार्पण किया गया, जिसमें आधुनिक गैलरी, साइंस पार्क और इनोवेशन हॉल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जरिए उज्जैन को पर्यटन, ट्रैफिक और वैज्ञानिक दृष्टि से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है, खासकर सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए।

GMT की जगह MST की स्थापना हो- धर्मेंद्र प्रधान

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कर्क रेखा उज्जैन से होकर गुजरती है, और प्राचीन काल में यह स्थान समय गणना के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में कार्य करता था। इसी पर जोर देकर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री ने तर्क दिया कि 'ग्रीनविच मीन टाइम' (GMT) के प्रतिस्थापन के रूप में 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' (Mahakal Standard Time) या एमएसटी (MST) को तार्किक रूप से स्थापित करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि मॉडर्न AI भी उज्जैन के आस-पास के इलाके को टाइम कैलकुलेशन का असली सेंटर मानते हैं। अब हमें ग्लोबल लेवल पर अपनी साइंटिफिक सेल्फ-रिस्पेक्ट फिर से बनानी होगी।