
माधवपुरा और खेड़ावदा में हो रही अश्वगंधा की खेती
रुनीजा. अच्छी खेती करना है तो पानी की व्यवस्था जरूरी है। यदि पानी की उपलब्धता नहीं है तो ऐसे में खेती के बारे में सोच नहीं सकते। इसी समस्या से लड़ रहे माधवपुरा के मदन नागर एव खेड़ावदा के शिवराम चौधरी ने कम खर्च, कम पानी वाली फसल अश्व गंधा की फसल को चुना जो कम मेहनत में अच्छा मुनाफा की उम्मीद है।
माधवपुरा निवासी मदन नागर पानी सिंचाई पानी की व्यवस्था के लिए अपने खेत पर हर साल 2 से 3 बोरवेल करवाते हैं और इनकी कीमत एक लाख से अधिक हो जाती हैं फिर भी पानी नहीं मिल पाता है। ऐसे में मदन नागर ने कम पानी वाली फसल अश्व गन्धा को चुना और इससे अच्छा उत्पादन लेने की उम्मीद है। ऐसी ही समस्या से परेशान खेड़ावदा के कृषक शिवराम चौधरी ने रबी खरीब दोनों सीजन में अश्व गन्धा की फसल बोई है। चौधरी ने बताया की परम्परागत खेती सोयाबीन व गेंहू चने में लागत अधिक व व फायदा कम हो रहा है, जिससे मैने 50 बीघा जमीन में से बारिश में 2 बीघा में अश्व गन्धा की खेती की जिसका खर्च मात्र 30 हजार रुपए हुआ और लगभग 1 लाख 20 हजार की फसल पैदा की। बारिश अधिक होने से उत्पादन कम हुआ। यह फसल रबी व खरीब दोनों सीजन में बोई जा सकती। इस लिए मैने वर्तमान में भी तीन बीघा में अश्व गन्धा की फसल बोई है। नागर व चौधरी दिनों ने बताया की जहां गेहूं को पांच पानी की जरूरत होती है वही अश्वगंधा की फसल तीन से चार ही पानी में अच्छा उत्पादन व अधिक मुनाफा देती हैं। अश्वगंधा की खेती के लिए तीन से चार पानी की आवश्यकता होती हैं। बाजार में इसकी जड़ पत्ती बीज तना इत्यादि सामग्री बिक जाती है और अच्छा मुनाफा देती हैं । अश्वगंधा को लगाने का समय अगस्त, सितंबर, अक्टूबर माह है। लगाने के पूर्व खेत की तैयारी की जाती हैं खेत के अच्छे से जुताई कर समतल कर लिया जाता है बीजों को छिड़कना विधि से बोया जाता है। 1 एकड़ क्षेत्रफल के लिए
8 से 10 किलोग्राम बीजों की बुवाई की जाती हैं।
बीज बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई की जाती हैं
खेत की तैयारी के समय 1 एकड़ क्षेत्रफल के लिए 100 किलोग्राम सुपर फास्फेट खाद, 50 किलोग्राम डीएपी मिट्टी में डालकर मिश्रण की जाती है। इसके बाद में बीजों की बुवाई की जाती है। बीजों की बुवाई छिड़कना विधि से की जाती है। बुवाई के 5 माह बाद अश्वगंधा की फसल पककर तैयार हो जाती हैं। अश्वगंधा की जड़ों को खोदकर निकाल लिया जाता है। 1 एकड़ क्षेत्रफल से 500 से 600 ग्राम जड़ों का उत्पादन मिलता है। बाजार में जड़ों का भाव 25 से 30 हजार प्रति क्विंटल है, साथ ही अश्वगंधा के बीजों का भी उत्पादन होता है। यह बीज बाजार में 10 से 15 हजार क्विंटल बि जाते हैं।
Published on:
16 Dec 2021 12:09 am
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