
शहर में बालम ककड़ी की बहार
उज्जैन. इसे हर कोई लेकर नहीं आता। हर कोई बेचता नहीं है फिर भी चाहने वाले कम नहीं है। दूर का सफर तय कर आती है और हाथों-हाथ बिक भी जाती हैं। बात बालम ककड़ी की हो रही है।
हर कोई नहीं बेचता, लेकिन चाहने वाले कम नहीं हैं
ककड़ी की जितनी भी प्रजाति है उनमें बालम ककड़ी की बात ही अलग है। ऊपर से हरी और अंदर से केसरिया हल्के रंग की निकलने वाली बालम ककड़ी इन दिनों शहर उपलब्ध है। अमूमन साल के इन्हीं दिनों में बालम ककड़ी की आमद होती है। बेचने वालों का कहना है कि अधिक बरसात के कारण इस बार देरी से आई है।
२०-२५ दिन की फसल
हालांकि बालम ककड़ी अधिक समय तक मिलती भी नहीं हैं। २० से २५ दिन तक ही इसकी उपलब्धता रहती है। कीमत के मामले में भी यह ककड़ी सब पर भारी है। शहर में अभी करीब 100 रुपए किलो मिल रही है।
रेल का सफर उज्जैन में व्यापार
शहर में मिलने वाली बालम ककड़ी की कहानी भी कुछ अलग है। इसकी कोई फसल या बाग-बगीचा नहीं होता है। धार, झाबुआ और रतलाम जिले के इस फल की उपज स्वत: होती है। यह फल वर्षाकाल के प्रारंभ में पैदा होता है और वर्षा खत्म होने के कुछ ही दिनों में अपना आकार लेकर बाजार में आता है।
बड़ा मार्केट टॉवर पर
शहर के मध्य स्थल माने जाने वाले टॉवर पर बालम ककड़ी इन दिनों मिल रही है। उज्जैन में झाबुआ और रतलाम के सैलाना से आदिवासी रेल से रात का सफर कर उज्जैन आकर इसे बेचते हैं। सबसे स्वादिष्ट बालम ककड़ी सैलाना की ही होती है।
मां चामुंडा को आज लगेगा छप्पन भोग
उज्जैन. नवरात्र की पंचमी पर 3 अक्टूबर को मां चामुंडा के दरबार में 56 भोग लगाए जाएंगे। माता का अद्भुत श्रृंगार होगा तथा सुबह खीर प्रसादी का वितरण होगा, जो रात तक चलेगा। स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए पहली बार माता के दरबार से खीर प्रसाद कटोरी में दी जाएगी। रवि राय ने बताया पं. शरद चौबे के आचार्यत्व में हरिसिंह यादव के संयोजन में मां चामुंडा को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे। प्रसाद वितरण कार्य दिन भर चलेगा। भव्य शृंगार होगा। शाम को महाआरती होगी।
Published on:
03 Oct 2019 07:00 am
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