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जुए-सट्टे की लत ने मनोज को बना दिया था 10 लाख का कर्जदार, इसीलिए लिव इन पार्टनर से विवाद के बाद वीभत्स कांड को दिया अंजाम

कमरे में चाय की तपेली मिली, उसी में जहर मिलाकर लिव इन पार्टनर और उसके दोनों बच्चों को पिलाने की आशंका, बाद में खुद भी फंदे पर लटका, विसरा जांच के लिए नहीं किया सुरक्षित

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जुए-सट्टे की लत ने मनोज को बना दिया था १० लाख का कर्जदार, इसीलिए लिव इन पार्टनर से विवाद के बाद वीभत्स कांड को दिया अंजाम

जुए-सट्टे की लत ने मनोज को बना दिया था १० लाख का कर्जदार, इसीलिए लिव इन पार्टनर से विवाद के बाद वीभत्स कांड को दिया अंजाम

उज्जैन. जानकी नगर में हुए वीभत्स कांड ने शहर को झकझोरकर रख दिया। खिलौना दुकान संचालक मनोज राठौर ने लिव इन पार्टनर ममता और उसके दो लक्की और लक्ष्या की हत्या कर डाली। इसके बाद खुद भी फंदे से लटक गया। इस वारदात के बाद हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर यह स्थिति कैसे बनी, यह घटनाक्रम बना ही क्यों? पत्रिका ने इसी सवाल को तलाशने के लिए मनोज के परिवार, दोस्त और साथी दुकानदारों से बात की।
लब्बोलुबाब यह कि जानकीनगर में रहने वाला खिलौना दुकान संचालक मनोज राठौर जुए-सट्टे का आदी था। इसके चलते उसने परिवार वालोंं से 10 लाख रुपए से अधिक का कर्ज ले रखा था। इसी लत के चलते लिवइन पार्टनर ममता से उसका विवाद होता था। पिछले दिनों ममता की तबीयत खराब हो गई, उसे खून की कमी थी। इसके बावजूद मनोज उसका उपचार नहीं करवा पा रहा था। ममता की मौसी सुमित्रा शिंदे ने उसे राखी पर उपचार के लिए रुपए देकर बच्चों के लिए आटा सामान दिलाया था। ममता को साड़ी भी दी थी।
मनोज के कहने पर पति को छोड़ आई थी ममता
यह बात भी सामने आ रही है कि ममता के पहले पति सुभाष खिंची ने मनोज राठौर से कर्ज लिया था। इसके चलते पांच साल पूर्व दोनों के बीच मारपीट हुई थी। इसके बाद से ममता पहले पति को छोड़कर मनोज के कहने पर बच्चों को लेकर नागदा से जयसिंहपुरा आ गई थी। यहां दोनों कुछ दिन एक दूसरे से अलग रहे और बाद में साथ रहने लगे। शुक्रवार सुबह पुलिस ने चारों शवों का पीएम करवा परिजनों को सौंप दिया। पीएम के दौरान मनोज राठौर और ममता शिंदे दोनों के रिश्तेदार पहुंच गए थे। सुबह 9 बजे से पीएम के लिए इंतजार कर रहे परिवार को चार घंटे बैठना पड़ा। सुबह 11.30 बजे डॉक्टर पीएम के लिए पहुंचे इसके बाद पीएम हो पाया। दोपहर करीब १ बजे परिजनों को शव सौंपे गए। चारों का अंतिम संस्कार साथ में किया।

कमरे में चाय की तपेली मिली पर विसरा की जांच नहीं
एफएसएल और पुलिस की बढ़ी खामी सामने आई है। कमरे से चाय की तपेली मिली थी। आशंका है कि मनोज ने पहले चाय में जहर पिला महिला और बच्चों को अचैत किया और उसके बाद गला घोंट कर उनकी हत्या कर दी। तीनों के मुहं से झाग भी निकल रहे थे। परंतु एफएसएल ने न तो विसरा सुरक्षित करवाया और ना ही चाय की तपेली की जांच करवाई ताकि यह स्पष्ट हो सके की मनोज ने चाय में जहर मिलाकर पिलाया था या नहीं।
दो दिन से नहीं खोली थी दुकान, साथियों से ले रखा था कर्ज
मनोज राठौर जयसिंहपुरा में रहता था, उसके पिता ने भी २५ साल पूर्व फंदा लगा आत्महत्या कर ली थी। मनोज का भाई दाहोद गुजरात में काम करता है। शुक्रवार सुबह वह भी पीएम रूम पहुंच गया था। मनोज राठौर ने गढ़कालिका के पास हार-फूल दुकान लगाने वाले लोगों से भी कर्ज ले रखा था। बुधवार को उसने खिलौने की दुकान नहीं खोली। जब दूसरे दिन दुकान खोलने नहीं पहुंचा तो साथी गोलू १०.३० बजे जानकीनगर पहुंचा। यहां दरवाजा नहीं खोलने पर उसने जितेन्द्र सोलंकी और मकान मालिक आशाराम सैनिक से बात कर पुलिस को जानकारी दी। जिसके बाद अंदर का मंजर देखा तो सनसनीखेज हत्याकाण्ड सामने आया। मनोज ने ममता जो पिछले पांच साल से उसके साथ रह रही थी कि और उसके दो बच्चे लक्की और लक्ष्या की हत्या कर खुद भी फंदे पर लटक गया।
इनका कहना है
विसरा एफएसएल ने जांच के लिए सुरक्षित नहीं करवाया है। हमें चाय की तपेली भी नहीं मिली परंतु कईं साइंटिफिक एविडेंस जुटाए हैं। अभी हत्या का कारण सामने नहीं आया। शुक्रवार को सभी का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया।
राकेश भारती, टीआइ जीवाजीगंज